दाद पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय

दाद – Ring Worm

आयुर्वेद में दाद को दद्रु और एलोपैथी में रिंग वर्म (Ring Worm) या टीनिया (Tinea) के नाम से जाना जाता है। यह रोग हाथ-पैर, सिर, त्वचा, दाढ़ी, नाखून, लिंग, जांघ, पेट के निचले भाग और अंडकोष में ज्यादातर होता है।

कारण : इस रोग का कारण विभिन्न प्रकार के कवक (Fungus) होते हैं, जिनके संक्रमण से यह शरीर के विभिन्न अंगों में फैलता है।

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लक्षण : लक्षणों के रूप में त्वचा पर दाद 25, 50 पैसे या एक रुपये के सिक्के के समान गोलाई लिए छोटी-छोटी बारीक के रूप में दिखता है। गंज रोग की तरह आसपास के बालों का झड़ना, पुरानी लुप्त होकर नई फुंसियां निकलना, त्वचा का मोटा होना और खुजली होना मुख्य रूप से देखने को मिलते हैं। पुरानी दाद का स्थान उभरा हुआ और शोथ युक्त दिखाई पड़ता है।

What to eat during Ring Worm?

क्या खाएं

  • पुराने गेहूं, चावल, मूंग की दाल भोजन में लें।
  • दूध के साथ गुलकंद का सेवन करें।
  • सब्जियों में जिमीकंद, बथुआ, मूली, लहसुन, आलू, प्याज खाएं।
  • फलों में अनार, नीबू, गाजर, पपीता, केला सेवन करें।
  • 2 चम्मच नीम के पत्तों का रस सुबह-शाम पिएं।
  • चने के आटे की रोटियां बिना नमक मिलाए घी लगाकर रोजाना खाएं।

What not to eat during Ring Worm?

क्या न खाएं

  • भारी, गरिष्ठ, तेल में तले, मिर्च-मसालेदार भोजन न करें।
  • नये अनाज से बनी रोटियां न खाएं।
  • दही, खटाई, इमली, अम्लवर्द्धक पदार्थ सेवन न करें।
  • मांस, मछली, गुड, तिल, शराब के सेवन से परहेज करें।

Remedial Measures in Ring Worm Prevention.

रोग निवारण में सहायक उपाय


What to do during Ring Worm?

क्या करें

  • हाथ-पैर के नाखून साफ व काटकर रखें।
  • रोगी की टोपी, तौलिए, रूमाल, तकिए, कंघे, टूथब्रश, कपड़े का प्रयोग अन्य को करने से रोकें।
  • पीड़ित अंग की सफाई नीम के काढ़े से रोज करें।
  • व्यक्तिगत सफाई की ओर पूरा ध्यान दें। साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • त्वचा, नाखून, अंगुलियों के बीच तथा वृषण, गुदा, हाथ-पैर, सिर की नियमित सफाई करें। रोजाना स्नान अवश्य करें।
  • लाल मिर्च का तेल, पपीते का दूध या मूली के बीजों को नीबू के रस में पीसकर गरम करके दाद पर सुबह-शाम नियमित रूप से लगाएं।

What not to do during Ring Worm?

क्या न करें

  • पीड़ित अंग को नाखून से न खुजलाएं।
  • खुजलाए हुए हाथों से शरीर के अन्य अंगों को न खुजलाएं।
  • मैले-कुचैले, दाद पीड़ित अंग के संपर्क में रहे कपड़े बिना साफ किए दुबारा न पहनें।
  • रोजाना स्नान कर व्यक्तिगत सफाई अपनाने में आलस्य न करें।
  • नहाने में साबुन का प्रयोग कम करें।
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