कुष्ठ । कोढ़ पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय

कुष्ठ । कोढ़ – Leprosy

रोग शरीर की धातुओं और अंगों को नष्ट करता है, उसे कुष्ठ रोग कहते है। यह मुख्यतः त्वचा, श्लेष्म कलाओं और तंत्रिकाओं का संक्रामक रोग है, जो ‘बेसिलस’ लेप्रो नामक जीवाणु से शरीर में मुंह, नाक, फटी हुई त्वचा, जननेंद्रियों के माध्यम से प्रवेश कर जाता है। रोगी के घनिष्ठ संपर्क से यह रोग एक स्वस्थ व्यक्ति को भी हो सकता है। एक बार यह रोग हो जाए, तो आजीवन बना रहता है। स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों को यह रोग अधिक होता है।

कारण : कुष्ठ रोग उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में विरुद्ध आहार, गरिष्ठ भोजन, नये अनाज, मछली, दही, अत्यंत खट्टे एवं लवण युक्त पदार्थों का सेवन, धूप में घूमकर आते ही या परिश्रम के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने, अत्यधिक गर्म स्थान में रहने, उड़द, तिल, दूध, गुड सब एक साथ खाने, भोजन के तुरंत बाद मैथुन करने, नीच कर्म करने तथा वात, पित्त और कफ का कुपित होना आदि होते हैं।

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लक्षण : कुष्ठ के लक्षणों में प्रारंभ में ज्वर होना, दुर्बलता, पाचन में गड़बड़ी, पेशियों में सुई चुभने जैसी पीड़ा, त्वचा पर उद्भेद उभरना, गांठें पड़ना, उनका फूटना और घाव होना, हाथ-पैर की अंगुलियां, पलकें, भौंहें, नाक की झिल्ली में गलाव पड़ना, चमड़ी का मुर्दा होना, स्वाद व गंध का ज्ञान लुप्त होना आदि देखने को मिलते हैं। अंग विकृति भी देखने को मिलती है।

What to eat during Leprosy?

क्या खाएं

  • पौष्टिक भोजन खाएं। मूंग की खिचड़ी, चपाती भोजन में लें।
  • अंकुरित चना, जिमीकंद, पालक, बथुआ, आंवला, अनार, दूध, मक्खन, घी, तुरई, कुलफा, फूल गोभी, परवल का अधिक सेवन करें।
  • विटामिनों से भरपूर फल खाएं।

What not to eat during Leprosy?

क्या न खाएं

  • बादी, गरिष्ठ, तले, गर्म प्रकृति के खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • मांस, मछली, मिर्च-मसाले, मसूर की दाल, आलू बैगन आदि न खाएं।
  • नमक का पूर्ण परित्याग करें।

Remedial Measures in Leprosy Prevention.

रोग निवारण में सहायक उपाय


What to do during Leprosy?

क्या करें

  • रोगी को अलग साफ-सुथरे स्थान पर रखें, स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखें।
  • दूषित मनोवृत्तियों को दूर करने के लिए सूर्य उपासना, ईश्वर प्रार्थना, महापुरुषों, महात्माओं के दर्शन आदि सद्कर्म करें।
  • गोमूत्र 2 चम्मच की मात्रा में छानकर सुबह-शाम नियमित सेवन करें।
  • नीम के तेल में चालमोगरा का तेल बराबर की मात्रा में मिलाकर सारे शरीर पर सुबह-शाम नियमित मालिश करें।
  • धैर्य, लगन, परहेज व डॉक्टर के निर्देशानुसार पूरा इलाज कराएं।
  • शंख की ध्वनि रोज सुनें। इससे कुष्ठ के कीटाणु नष्ट होते हैं।

What not to do during Leprosy?

क्या न करें

  • रोगी को गर्म, गंदे, अस्वस्थ वातावरण में न रखें।
  • परस्ती गमन, वैश्या गमन करने से बचें।
  • तेज धूप में, अग्नि की आंच के निकट न बैठें।
  • रोगी से घृणा न करें।
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