पीलिया पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय

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पीलिया – Jaundice

हमारे शरीर के रक्त में जब बिलिरूबिन की मात्रा 0.8 मिलीग्राम प्रति 100 मिली लीटर से अधिक हो जाती है, तो त्वचा, नाखून, आंखें व पेशाब पीले रंग की दिखने लगती हैं। इसी अवस्था को पीलिया रोग के नाम से जाना जाता है। यह रोग जिगर की खराबी से पैदा होता है। जब जिगर का पित्त आंतों में न पहुंचकर सीधे खून में मिल जाता है, तो सारे शरीर में पीलापन छाने लगता है।

कारण : पीलिया रोग उत्पन्न होने के अन्य प्रमुख कारणों में मलेरिया होना, रक्तस्राव से अधिक खून निकलना, अनेक प्रकार के जीवाणुओं अथवा विषाणुओं का संक्रमण, संक्रमित पानी और भोजन का सेवन, खून के माध्यम से संक्रमण, वीर्य अधिक नष्ट करना, पाचन क्रिया की गड़बड़ी, पौष्टिक भोजन का अभाव, अधिक मिर्च-मसालेदार, चटपटी चीजें खाना, अधिक शराब पीना, संक्रमित व्यक्ति को लगाए इंजेक्शन की सुई से स्वस्थ व्यक्ति को इंजेक्शन लगाना आदि होते हैं।

लक्षण : कई दिनों तक बुखार बना रहना, कमजोरी, थकान, भूख न लगना, घी-तेल की तली चीजों के प्रति अरुचि, चिड़चिड़ा स्वभाव, नींद ठीक से न आना, पेट दर्द, आंख, नाखून, त्वचा एवं मूत्र का रंग पीला होना आदि लक्षण इस रोग में देखने को मिलते हैं।

What to eat during Jaundice?

क्या खाएं

  • हलका, सुपाच्य, ताजा भोजन जैसे—चावल, दलिया, खिचड़ी, बाजरे, जौ, गेहूं की चोकर युक्त रोटी बिना घी के खाएं।
  • साबूदाना की खीर, अरारोट, बार्ली, मूंग, मसूर, अरहर की पतली दाल, कच्चे नारियल का पानी, मूली के पत्तों का रस, ताजा छाछ, मलाई रहित क्रीम निकला दूध, शहद, गन्ना, गन्ने का रस (शुद्धता का ध्यान रखते हुए) सेवन करें।
  • बुखार की स्थिति में मीठे फलों का रस ग्लूकोज मिलाकर पिएं।
  • हरी सब्जियों में कच्ची मूली, लौकी, करेला, प्याज, पुदीना, फूल गोभी, पालक, धनिया, मेथी, परवल, गाजर, लहसुन, पत्ता गोभी खाएं।
  • फलों में पपीता, आंवला, चीकू, खजूर, अंगूर, मीठा, अनार, मौसमी, सेब, टमाटर, संतरा, नीबू का सेवन करें।
  • हमेशा उबला, छना, क्लोरीन से स्वच्छ किया हुआ पानी ही पिएं।
  • सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीबू निचोड़कर पिएं।

What not to eat during Jaundice?

क्या न खाएं

  • भारी, गरिष्ठ, घी-तेल में तला, मिर्च-मसालेदार, अधिक नमकीन, खटाई द.. अचार, सिरके से बने पदार्थ भोजन में न खाएं।
  • दूध, घी, तेल, मिठाइयां, बेसन की चीजें, मैदे के व्यंजन, मांस, मछली न खाएं।
  • कचालू, अरवी, राई, हींग, गुड, चना, उड़द की दाल, चीनी आदि से भी परहेज करें।
  • चाय, कॉफी, तंबाकू, गुटखा, शराब का सेवन न करें।
  • बासी भोजन और अशुद्ध पानी न पिएं।

Remedial Measures in Jaundice Prevention.

रोग निवारण में सहायक उपाय


What to do during Jaundice?

क्या करें

  • भोजन साफ बर्तन में जाली या ढक्कन से ढककर रखें।
  • जब तक रोग दूर न हो जाए, पूर्ण विश्राम करें।
  • हाथों के नाखूनों को समय-समय पर काटते रहें।
  • शौचालय से आने के पश्चात् और भोजन करने से पहले हाथों की सफाई साबुन और पानी से अच्छी तरह करें।
  • रोगी के कपड़े, व्यक्तिगत चीजें, बर्तन उबले पानी से भली-भांति साफ करें।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता की ओर पूरा ध्यान दें।
  • किसी भी प्रकार का इंजेक्शन लगवाते समय डिस्पोजेबल सिरिंज व निडिल का ही प्रयोग करें।
  • पैरों और हाथों के बल घर में थोड़ा चलें। इससे यकृत का अच्छा व्यायाम होगा।

What not to do during Jaundice?

क्या न करें

  • मात्र झाड़-फूंक पर निर्भर न रहें। पीलिया जानलेवा साबित हो सकता है।
  • बाजार में ठेलों पर मिलने वाली खाने की खुली चीजें न खाएं।
  • सब्जियां, फल बिना स्वच्छ पानी से धोए सेवन न करें।
  • कब्ज की शिकायत पैदा न होने दें।
  • रोगी के कपड़े, निजी वस्तुएं, बर्तन आदि इस्तेमाल न करें।
  • स्त्री-प्रसंग करने की कोशिश न करें।
  • परिश्रम का कार्य न करें।

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