अम्लपित्त । एसिडिटी पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय

अम्लपित्त। एसिडिटी – Hyperacidity

यह एक ऐसा उदर रोग है, जो आमाशय में अम्ल की मात्रा बढ़ जाने से उत्पन्न होता है। फास्ट फूड् के इस जमाने में हर तीसरा व्यक्ति इस रोग से पीड़ित नजर अता है।

कारण : अधिक मिर्च-मसालेदार समोसे, कचौरी, पावभाजी, मांसाहार, अचार, चटनी, दही, इमली, नीबू, हरी मिर्च, प्याज, लहसुन, गर्म पदार्थ, शराब, चाय, कॉफी, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट का अधिक सेवन, चिंता, क्रोध, देर रात जगना, एस्प्रिन जैसी दर्द निवारक गोली का खाली पेट सेवन, मानसिक तनाव, अधिक समय तक भूखा रहना, अधपका मांस खाना जैसे कारणों से यह रोग होता है।

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लक्षण : इस रोग की पहचान पेट व छाती में जलन, खट्टी डकारें आना, मुंह में पानी भर आना, पेट में दर्द, भारीपन, गैस की शिकायत, कलेजा जलता हुआ प्रतीत होना, खट्टी उलटी होना, गले में जलन, जी मिचलाना, कब्ज आदि लक्षणों से होती है।

What to eat during Hyperacidity?

क्या खाएं

  • भोजन में हलके आहार, दलिया, चावल, जौ का सत्तू, साबूदाना, मिष्ठान्न, सिंघाड़ा, मूंग, पेठा खाएं। मक्खन, मलाई, घी भी ले सकते हैं।
  • फलों में केला, पपीता, चीकू , आंवला, नीबू , अनार, फालसा, नारियल का कच्चा फल और उसका पानी, खीरा आदि सेवन करें।
  • सब्जियों में लौकी, परवल, करेला, तुरई, गाजर, ककड़ी, प्याज, मूली, शलगम; बथुआ आदि का साग खाना चाहिए। हरा धनिया अधिक खाएं।
  • ठंडा दूध एक-एक कप की मात्रा में दिन में 3-4 बार सेवन करें।
  • सुबह खाली पेट एक-दो गिलास पानी पिएं।
  • आंवले का मुरब्बा एक- कप दूध के साथ भोजन के बाद सुबह-शाम लें।

What not to eat during Hyperacidity?

क्या न खाएं

  • भोजन में भारी व देर से पचने वाले गरिष्ठ आहार न लें।
  • नये अनाज, ऋतु विरुद्ध आहार, उड़द, घी, तेल में तली चीजें सेवन न करें।
  • मिर्च-मसालेदार, चटपटे, अधिक नमक युक्त, अचार, चटनी, दही, सिरका, मछली, मांस, अंडा, हरी मिर्च, मिठाइयां, सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसी रोग बढ़ाने वाली चीजें न खाएं-पिएं।
  • चाय, कॉफी, शराब, तंबाकू जैसी चीजों का सेवन न करें।
  • कचालू, मेथी, लहसुन, मूंगफली, तिल, कुलथी, अरवी न खाएं।

Remedial Measures in Hyperacidity Prevention.

रोग निवारण में सहायक उपाय

What to do during Hyperacidity?

क्या करें

  • क्रोध, चिंता, मानसिक तनाव को दूर करने का प्रयत्न करें।
  • पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी आधे घंटे तक रखें।
  • सुबह खाली पेट नियमित रूप से घूमने जाएं।
  • नाड़ियों की उत्तेजना शांत करने के लिए सारे शरीर की रोजाना मालिश करें।
  • जैमथिरेपी के मतानुसार मोती धारण करना लाभप्रद होगा।
  • बढ़े हुए अम्लपित्त के दोषों का शमन, वमन करा कर करें।

What not to do during Hyperacidity?

क्या न करें

  • रोगी को कब्ज की शिकायत न होने दें।
  • दर्द निवारक दवाएं, विशेषकर एस्प्रिन खाली पेट सेवन न करें।
  • अधिक समय तक खाली पेट न रहें।
  • देर रात तक न जगें।
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