गैस की शिकायत । वायु विकार । अफारा

गैस की शिकायत । वायु विकार । अफारा – Flatulence

आज कल के मशीनी युग की भाग-दौड़ में गैस की शिकायत एक आम समस्या बन गई है। शहरों में प्रायः हर व्यक्ति गैस की परेशानी से पीड़ित है। गांवों में भी अधिकांश लोग इस रोग से परेशान होते हैं।

कारण : पेट में गैस बनने के प्रमुख कारणों में असंयमित तथा अनियमित आहार-विहार करना, चाय, कॉफी, शराब, धूम्रपान की लत, अधिक खट्टे, तीखे, मिर्च-मसालेदार, गरिष्ठ पदार्थ खाना, रात्रि जागरण करना, समय पर न सोना, पानी कम पीना, परिश्रम बिल्कुल न करना, मानसिक तनाव, चिंता, शोक में डूबे रहना, प्राकृतिक वेगों को रोकना, भोजन में सलाद का सेवन न करना, चना, मटर, उड़द, मूंग, आलू, मसूर, चावल आदि का भोजन में अधिक सेवन, कब्ज की शिकायत, बेमेल भोजन करना आदि होते हैं।

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लक्षण : इस रोग में डकारें आना, अपानवायु का बार-बार निकलना जिससे आराम महसूस होना, पेट में गैस भरने से बेचैनी, घबराहट, छाती में जलन, आंतों में गड़गड़ाहट की आवाजें, पेट व पीठ में हलका दर्द, सिर भारी होना, दर्द की शिकायत, दस्त साफ न होना, भूख खुलकर न लगना, आलस्य व थकावट, नाड़ी दुर्बलता, नींद न आना, दिल की धड़कन बढ़ना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।

What to eat during Flatulence?

क्या खाएं

  • भूख लगने पर ही सुपाच्य, सादा, प्राकृतिक भोजन करें।
  • भोजन के बीच-बीच में लहसुन की कली, हींग अल्प मात्रा में खाएं।
  • भोजन के बाद थोड़ा-सा गुड खाएं। दोपहर के भोजन के बाद एक कप छाछ पिएं।
  • हरी सब्जियों में मूली, बथुआ, करेला, सहिजन, मेथी, अदरक, नीबू, पालक, आंवला, टिंडा, हरा धनिया अधिक सेवन करें।
  • सुबह-शाम के भोजन के बाद छोटी हरड़ मुंह में डाल कर चूसें।
  • आधा चम्मच अजवाइन में चुटकी भर काला नमक मिलाकर भोजन के बाद चबाएं और गुनगुना पानी पी लें।

What not to eat during Flatulence?

क्या न खाएं

  • बासी, गरिष्ठ, तले, मिर्च-मसालेदार, चटपटे भोजन से परहेज करें।
  • भोजन में आलू, मटर, अरवी, चना, अरहर, सेम, उड़द की दाल, चावल न खाएं।
  • चाय, कॉफी, तंबाकू, शराब, सिगरेट का सेवन न करें।
  • भोजन के साथ अधिक मात्रा में पानी न पिएं।
  • भोजन जल्दी-जल्दी, बिना चबाए न निगलें।

Remedial Measures in Flatulence Prevention.

रोग निवारण में सहायक उपाय


What to do during Flatulence?

क्या करें

  • प्रतिदिन कोई-न-कोई व्यायाम करने की आदत बनाएं। शाम को घूमने जाएं। वैसे प्रातःकाल का भ्रमण श्रेष्ठ होता है।
  • रात्रि में जल्दी सोकर पूरी व गाढ़ी नींद लें।
  • सप्ताह में एक दिन का उपवास करें।
  • सुबह उठते ही कुल्ला कर एक गिलास पानी पीने की आदत डालें।
  • गर्म जल में तारपीन का तेल मिलाकर पेट की मालिश करके सिकाई करें।

What not to do during Flatulence?

क्या न करें

  • भोजन करते समय मानसिक तनाव, चिंता, भय, क्रोध, ईर्ष्या के विचार मन में न लाएं। बाद में भी इनसे बचें।
  • दिन में सोने की आदत छोड़ दें।
  • भोजन के तुरंत बाद शारीरिक या मानसिक परिश्रम न करें।
  • प्राकृतिक वेगों यानी अपानवायु, मल, मूत्र, वमन, प्यास, भूख, नींद आदि को न रोकें।
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