जलोदर । उदर में पानी भरना पर क्या खाएं, क्या न खाएं और रोग निवारण में सहायक उपाय

जलोदर । उदर में पानी भरना – Dropsy

इस बीमारी में पेट में पानी भर जाता है, जिससे सृजन आने के कारण पेट का आकार बढ़ जाता है। व्यक्ति अनेक प्रकार के पाचन संबंधी रोगों से ग्रस्त हो जाता है और चलने-फिरने में भी बहुत कष्ट होता है।

कारण : जलोदर उत्पन्न होने के प्रमुख कारणों में यकृत, हृदय, गुर्दे, प्लीहा, फेफड़े, अग्न्याशय आदि अंगों के कार्यों में आई विकृति, रक्त संचार में बाधा उत्पन्न होना, कामला (पीलिया), बवासीर, अग्निमांघ रोग, नाड़ी अर्बुद, क्षय, कैंसर, रक्त वाहिनियों की बीमारियां आदि होते हैं।

लक्षण : इस रोग के लक्षणों के रूप में पेट का आकार बड़ा होना, जिस करवट लेटें उसी ओर का पेट फूलना, हृदय की धड़कन बढ़ना, सांस लेने में कठिनाई, बेचैनी, उठने-बैठने, चलने में कष्ट, कब्ज की शिकायत, टांगें सूजना, हिलने-डुलने से उदर में जल तरंगों का निनाद स्पष्ट सुनाई पड़ना, पेट दबाने पर पानी की गति मालूम पड़ना आदि देखने को मिलते हैं।

What to eat during Dropsy?

क्या खाएं

  • भोजन में पुराने चावल का भात, मूंग की दाल, जौ का मांड़ खाएं।
  • पिप्पली दूध में उबाल लें, फिर छान कर 2-3 बार पिएं।
  • प्यास लगने पर पानी की जगह मक्खन निकला हुआ मट्ठा, मीठे अनार का रस, मूली के पत्तों और गाजे का रस सेवन करें।
  • साग-सब्जियों में करेला, लाल सहिजन, मूली, लहसुन, कासनी, प्याज, मकोय, परवल, पालक, शलगम, सेम, बैगन आदि खाएं।
  • फलों में आम, अंजीर, मीठे: अनार, खरबूजा, पपीता आदि का सेवन करें।

What not to eat during Dropsy?

क्या न खाएं

  • भारी, गरिष्ठ, तले हुए, मिर्च-मसालेदार भोजन न खाएं।
  • खिचड़ी, नये चावल का भात, खट्टी चीजें, दही, नमक, तंबाकू नशीली चीजें, मछली तथा अधिक पानी का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करें।

Remedial Measures in Dropsy Prevention.

रोग निवारण में सहायक उपाय


What to do during Dropsy?

क्या करें

  • प्रातः एवं सायं काल खुली हवा में टहलें।
  • स्नान गर्म पानी से ही करें।
  • शरीर में शीतल वायु न लगे, इसके लिए हमेशा गर्म कपड़े पहनें।
  • पेशाब की हाज़त लगने पर मूत्र त्याग अवश्य करें।

What not to do during Dropsy?

क्या न करें

  • किसी भी प्रकार का व्यायाम, आसन न करें।
  • कब्ज की शिकायत पैदा न होने दें।

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