सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग खतरनाक हो सकता है

0
67

सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग खतरनाक हो सकता है

Using cosmetics can be dangerous

स्वयं को सुंदर और आकर्षक दिखाने की प्रवृत्ति के कारण ही आजकल सौंदर्य प्रसाधनों का प्रचलन सर्वाधिक होने लगा है। बिना मेकअप किए अब व्यक्तित्व अधूरा-सा लगता है। सुंदरता की ललक ने अपने पांव इस तरह पसारे हैं कि स्त्रियां तरह-तरह के बनाव-शृंगार करती रहती हैं। इससे वे न केवल चेहरे, वरन् अपने अन्य अंगों के दोषों को अस्थाई तौर पर छिपा कर झूठी तसल्ली पा लेती है।

पुरुष भी पीछे नहीं – Men are not behind

ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिलाएं ही अपना बनाव-शृंगार करती हैं, वरन् पुरुष भी अब पीछे नहीं। हर पत्नी अपने पति को खूबसूरत, जवान, बांका और चुस्त-दुरुस्त देखना चाहती है, अतः शहरों में अब पुरुषों के लिए भी ‘ब्यूटी पार्लर’, ‘हेयर ड्रेसिंग सैलून’ तथा ‘ हैल्थ क्लब’ खुल गए हैं, जहां सुंदर दिखने के लिए विभिन्न प्रसाधन सामग्रियों का उपयोग आधुनिक मशीनों से नई-नई तकनीकों से किया जाता है।

यदि बनाव शृंगार करने में प्राकृतिक प्रसाधन सामग्रियों का उपयोग किया गया हो, तो सुंदर और आकर्षक दिखने के लिए ‘ब्यूटी पार्लर’ संस्कृति की इस प्रवृत्ति को बुरा नहीं कहा जा सकता, लेकिन यदि रसायन युक्त कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों का या घटिया क्वालिटी का इस्तेमाल अधिक किया जाए, तो उससे न केवल पैसा बर्बाद होता है, बल्कि त्वचा की स्वाभाविकता एवं कोमलता को भी काफी नुकसान होता है और कई तरह के रोगों को बढ़ावा मिलता है।

बढ़ती मांग – Increasing demand

सर्वेक्षणों से पता चला है कि पिछले एक दशक में सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री छह- सात गुना बढ़ गई है और इनके उत्पादन में पंद्रह प्रतिशत की दर से प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है। तरह-तरह के आकर्षक विज्ञापनों के माध्यम से ग्राहकों को लुभाया जाता है। त्वचा को मुलायम, चिकनी, आकर्षक, चेहरे की कांति बढ़ाने, गालों की त्वचा को गुलाब की तरह लालिमा युक्त बनाने के वायदे खूब किए जाते हैं।

नकली उत्पादों की भरमार – Abundance of fake products

आजकल बाजार में नकली सौंदर्य प्रसाधनों की भरमार है। यह बात समूचे विश्व में प्रमाणित हो चुकी है। ये सौंदर्य प्रसाधन सस्ते तो होते हैं, परंतु हानि ज्यादा पहुंचाते हैं। इस कारण इन सस्ते बाजारी सौंदर्य प्रसाधनों के स्थान पर घरेलू नुसखों का प्रयोग किया जाए, तो न तो ये हानि पहुंचाएंगे और न ही त्वचा पर इनका कोई साइड इफेक्ट होगा।

प्रसाधनों के प्रकार – Types of toiletries

आजकल बाजार में होंठों को खूबसूरत बनाने के लिए तरह-तरह के शेड वाली लिपस्टिक, नाखूनों को रंगने के लिए नेल पालिश, चेहरे को सुंदर बनाने के लिए खुशबूदार पाउडर व क्रीम, पूरे शरीर की त्वचा को निखारने के लिए विभिन्न प्रकार के लोशन, खूशबूदार परफ्यूम्स, आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल, सुरमे, आई लाइनर, आई ब्रो पेंसिल, मस्कारा, बालों के लिए शैम्पू और शादीशुदा महिलाओं के लिए सिंदूर, बिंदी, कुमकुम जैसे सौंदर्य प्रसाधन आसानी से सर्वत्र उपलब्ध होते हैं।

नियमित प्रयोग के दुष्परिणाम – Side effects of regular use

बहुत से युवक-युवतियां दूसरों की देखादेखी, अपने को उनसे अधिक खूबसूरत बनाने के चक्कर में आवश्यकता से अधिक और नियमित रूप से सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करते हैं । उन्हें इनके प्रयोग से होने वाली हानियों का ठीक से ज्ञान नहीं होता। परिणाम जब सामने आते हैं, तब तक चेहरा कुरूप हो चुका होता है। यहां तक कि चेहरे का सारा आकर्षण ही जाता रहता है।

सामान्य तौर पर सौंदर्य प्रसाधनों के उपयोग से जो दुष्परिणाम नजर आते हैं, उनमें एलर्जी होना, खुजली होना, त्वचा पर दानें उभर आना, उनमें जलन होना, होंठों का लाल, काला, बदरंग होकर फटना, उस पर पपड़ी पड़ना, रिसना, सुजन आना, पसीने के अवरोध से चर्म विकार आदि प्रमुख लक्षण होते हैं। लंबे समय तक हानिकारक रसायनों के प्रयोग से त्वचा का कैंसर तक हो सकता है। सौंदर्य प्रसाधनों के अत्यधिक प्रयोग से त्वचा रोमछिद्रों के बंद हो जाने के कारण पसीना व विजातीय तत्वों के शरीर से बाहर निकलने में बाधा पहुंचती है। इनमें मिलाए गए कृत्रिम रंग व हानिकारक रसायन हमारी त्वचा द्वारा सोख लिए जाते हैं और त्वचा के विभिन्न रोग उत्पन्न करते हैं।

टैल्कम पाउडर (Talcum Powder): सभी घरों में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। बहुत से लोग चेहरे के अलावा नहाने के बाद इसे शरीर पर छिड़क कर लगाते हैं। इस दौरान पाउडर डस्ट के सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। जब लंबे समय तक नियमित पाउडर छिड़कने का सिलसिला चलता रहता है, तो इससे फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचने की संभावना होती है । दमे, क्रानिक, ब्रॉन्काइटिस और फेफड़ों की अन्य तकलीफों से पीड़ित लोगों को पाउडर डस्ट से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। टैल्कम पाउडर में जो डिओडोरेंट मिलाया जाता है, उससे त्वचा संबंधी रोग उत्पन्न करते हैं।

लिपस्टिक(Lipstick): नियमित रूप से लिपस्टिक का प्रयोग करने से होंठों का स्वाभाविक रंग नष्ट हो जाता है। उसमें सूखापन, दरारें पड़ना, पपड़ी जमना, सृजना, रिसना यहां तक कि होंठ काले पड़ जाते हैं। इसमें इओसिन नामक रंग लैनोनिन रसायन के साथ प्रयुक्त किया जाता है। लिपस्टिक जब होंठों के माध्यम से शरीर में पहुंचती है, तो अनेक प्रकार की बीमारियां पैदा होती हैं।

नेल पालिश(Nail Polish): नाखूनों पर नियमित रूप से प्रयोग की जाने वाली नेलपालिश से नाखून बंदरंग, चमकहीन और उनकी बनावट बिगड़ सकती है तथा वे कमजोर होकर जल्दी टूटते हैं। पैरों की उंगलियों में सृजन आ सकती है।

आंखों के प्रसाधन(Eye product): आंखों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रसाधनों में आई पेंसिल, आई लाइनर, आई शैडो, मस्कारा, काजल, सुरमा न केवल आंखों में खारिश पैदा करते हैं, बल्कि आंखों को नुकसान भी पहुंचाते हैं। क्योंकि इनमें सीसा, कोलतार के रंग जैसे हानिकारक तत्व मिले होते हैं। मस्कारा के नियमित प्रयोग से आंखों के आस-पास की त्वचा में जलन होने लगती है। आई लाइनर से आंखों की श्लेष्मा झिल्ली के खराब होने का खतरा होता है।

हेयर शैम्पू(Hair shampoo): शैम्पू में सिंथेटिक डिटरजेंट होता है। साबुन आधारित शैम्पू में पानी के खनिज के कारण बाल कड़क, रूखे और भूरे हो जाते हैं। इनके लगाने से बालों को पोषण, मजबूती और सुरक्षा प्रदान नहीं होती। इसमें सेल्टोल्स और डाइ-आक्सीजन जैसी जहरीली अशुद्धियां होती हैं, जिनसे एलर्जी हो सकती है। ये शैम्पू आंखों में जलन, बालों के झड़ने जैसी बीमारियां भी पैदा कर सकते हैं। इसलिए हर्बल का प्रयोग करें।

हेयर रिमूवर्स(Hair Removers): अनचाहे बालों को हटाने के लिए बाजार में सुगंधित हेयर रिमूवर मिलते हैं। इनमें बेरियम सल्फेट नामक रसायन मिलाया जाता है, जिससे त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते उभर आते हैं और एक्जिमा तक हो सकता है।

फेस क्रीम(Face cream): चेहरे पर लगाई जाने वाली क्रीम यदि वसा अथवा तेल आदि स्निग्ध पदार्थों के माध्यम से बनाई जाए, तब तो ठीक है, अन्यथा क्रीमों में या तो नमी सोख लेने वाले तत्व होते हैं अथवा उनमें ऐसे तत्वों का सम्मिश्रण होता है, जो त्वचा के रोमकूपों में संकोच उत्पन्न करते हैं, जिससे शरीर से पसीना, अन्य विजातीय तत्वों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और वे विजातीय पदार्थ शरीर के अंदर ही रहकर विकृति पैदा करते हैं, परन्तु आजकल बाजार में हर तरह की त्वचा के अनुरूप क्रीमें मिलने लगी हैं।

बिंदी: माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी का चिपचिपा पदार्थ त्वचा को प्रभावित करता है और इसके नियमित प्रयोग से उस स्थान पर खुजली और त्वचा रोग भी हो सकते हैं, दानें उभर सकते हैं। कभी-कभी तो सफेद दाग तक पड़ जाते हैं।

सिंदूर: सुहाग का प्रतीक चिह्न ‘सिंदूर’ में साधारणतया लेड आक्साइड रसायन रहता है, जो एक विषैली धातु है। इसे मांग में भरने से सिर की त्वचा निरन्तर अनेक वर्षों तक इसके संपर्क में आती रहती है, जिससे बाल झड़ने, टूटने, छोटे पड़ने तथा जल्दी सफेद होने लगते हैं। रोमकूपों के साथ यह रसायन मस्तिष्क के भीतर जा पहुंचता है और अनिद्रा, सिर दर्द, विस्मरण, उदासी आदि कई तरह की तकलीफें पैदा करता है। रक्त के साथ मिलकर वह शरीर के अन्य भागों में पहुंच कर उपद्रव खड़े करता है।

उपयोग से पहले एलर्जी टेस्ट करें – Test before use for allergy

किसी भी सौंदर्य प्रसाधन को अपनाने से पहले उसकी एलर्जी संबंधी जांच अवश्य कर लें। इसके लिए कलाई के नीचे या कान के पीछे थोड़ा-सा भाग साफ करके थोड़ा-सा सौंदर्य प्रसाधन लगा लें और 24 घंटे तक उसका असर देखें। यदि वहां कुछ भी प्रतिक्रिया के लक्षण नजर नहीं आते हैं और साबुन से धोने के बाद भी कोई कष्ट नहीं होता, तब तो आप वह प्रसाधन चेहरे आदि स्थानों पर इस्तेमाल कर सकते हैं, अन्यथा नहीं।

खरीदते समय सावधानी बरतें – Use caution when buying

सौंदर्य प्रसाधन हमेशा कंपनियों का बना ओरिजिनल पैकिंग में, सील बंद अवस्था में एवं विश्वसनीय दुकान से ही खरीदें। सस्ते के चक्कर में पड़कर कभी भी मिलते-जुलते नामों की सौंदर्य सामग्री फेरीवालों, सड़क पर बैठ कर बेचने वालों से घटिया कंपनी की बनी चीजें न खरीदें।

रासायनिक तत्वों से मिलकर बने सौंदर्य प्रसाधनों का कम से कम इस्तेमाल करें, क्योंकि उसके तत्व त्वचा और स्वास्थ्य, दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। इन्हें यूं ही खुला कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से ये खराब हो जाते हैं।

जागरूक बनें – Be aware

अपने सौंदर्य की देखभाल, रख-रखाव और मेकअप की तकनीक सीखना यद्यपि आज के जमाने में प्रत्येक जागरूक युवक-युवती, महिला के लिए आवश्यक है, फिर भी अंधानुकरण करके अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहना निश्चय ही एक गलत आदत है। अतः रासायनिक सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग कम रना हित में होगा।

हर्बल प्रसाधन अपनाएं – Adopt herbal cosmetics

इसमें कोई संदेह नहीं कि प्राचीनकाल के सौंदर्यवर्धक योग आजकल के कैमिकल्स- युक्त प्रसाधनों .से कई गुना श्रेष्ठ हैं। आयुर्वेद में ऐसे सैकड़ों नुसखे भरे पड़े हैं, जिनको अपनाने से रूप सौंदर्य निखर उठता है। जड़ी-बूटियों से निर्मित सौंदर्य प्रसाधन भारत की प्राचीन पद्धति है, जो वास्तव में श्रेष्ठ और दीर्घकालिक असरकारक है। यही वजह है कि आजकल हर्बल पर आधारित सौंदर्य प्रसाधनों का प्रचलन दिन-पर-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इनके प्रयोग करने से त्वचा को बिना नुकसान पहुंचाए ही अपने सौंदर्य को आकर्षक रख सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here