कील-मुंहासे, बार-बार मूत्र त्याग, गुर्दों में शूल, माइग्रेन, अनिद्रा, बालों का नष्ट होना, पिंडलियों की पीड़ा, टी.बी., रक्तपित्त, एक्जिमा, सफ़ेद दाग, चक्कर आना, थकावट, एनीमिया और आग से जलन का गाजर द्वारा इलाज

विविध रोग-विकार का गाजर  द्वारा घरेलू इलाज


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कील-मुंहासे – Pimples

किशोरावस्था को पार करके युवावस्था की ओर बढ़ते हुए लड़के व लड़कियां मुंहासों से पीड़ित होते हैं। प्रारम्भ में लड़के-लड़कियां तरह-तरह की क्रीम व लोशन लगाकर मुंहासों को नष्ट करने की कोशिश करते हैं, लेकिन मुंहासे अधिक विकृत रूप धारण कर लेते हैं।

उत्पत्ति : होटल, रेस्तरां में अधिक उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने से रक्त में पित्त और अम्लता की अधिकता होने से मुंहासों की अधिक उत्पत्ति होती है।

परीक्षा के दिनों में अधिक मानसिक तनाव से ग्रस्त रहने के कारण अधिक मुंहासे निकलते हैं। ऋतुस्राव में अवरोध होने से व ऋतुस्राव में अधिक विलम्ब होने से लड़कियों को अधिक मुंहासे निकलते हैं।

लक्षण : चेहरे पर कील-मुंहासों की उत्पत्ति होने से चेहरे का सौंदर्य आकर्षण नष्ट हो जाता है। चेहरे के अतिरिक्त गर्दन और पीठ पर भी मुंहासे निकल आते हैं।

मुंहासों के पकने पर तीव्र पीड़ा होती है। मुंहासों में खुजली होने पर नाखूनों से मुंहासे छिल जाने पर त्वचा पर मुंहासों के निशान बन जाते हैं। नाखूनों से मुंहासे नष्ट करने पर मुंहासे अधिक विकृत रूप धारण कर लेते हैं।

Home Remedies for Pimples through Carrot.

कील-मुंहासे का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • मुंहासों की विकृति होने पर कुछ दिनों तक फास्ट फूड, छोले-भठूरे, समोसे-कचौरी व चाउमीन से परहेज रखने से अधिक जल्दी लाभ होता है। चेहरे की स्वच्छता का बहुत ध्यान रखना चाहिए। चेहरे को नीम का तेल मिलाकर साफ करना चाहिए।
  • गाजर का रस सुबह-शाम पीने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम तत्त्व मिलता है जो मुंहासों को नष्ट करने में सहायता करता है।
  • गाजर का रस पीने व मुरब्बा खाकर दूध पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होने के साथ मुंहासों का प्रकोप कम होता है।
  • चाय-कॉफ़ी का सेवन बंद करके गाजर का रस पीने से मुंहासों से सुरक्षा होती है।
  • गाजर का रस रक्त की उष्णता व अम्लता को नष्ट करके मुंहासों की उत्पत्ति रोकने में सहायता करता है। ग्रीष्म ऋतु में गाजर का शर्बत सेवन करने से मुंहासों की विकृति शांत होती है।

बहुमूत्रता ( बार-बार मूत्र त्याग ) – Polyuria

बहुमूत्रता की विकृति किसी भी स्त्री-पुरुष को हो सकती है। प्रौढ़ावस्था में मूत्राशय की किसी गड़बड़ के कारण अधिक मूत्र त्याग की शिकायत हैं’ही सकती है। शीत ऋतु में बहुमूत्रता का अधिक प्रकोप देखा जा सकता।

उत्पत्ति : बहुमूत्रता की विकृति अधिक उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने वालों को अधिक होती है। मूत्राशय के आसपास चोट लग जाने पर शोथ हो जाने से बहुमूत्रता की शिकायत हो सकती है। मधुमेह रोग से पीड़ित स्त्री-पुरुषों को बहुमूत्रता की अधिक विकृति होती है।

लक्षण : बहुमूत्रता से पीड़ित होने पर रोगी को बार-बार मूत्रत्याग के लिए दौड़ना पड़ता है। ऑफिस में काम करने वाली स्त्रियों को बहुमूत्रता के कारण बहुत परेशानी होती है। रात्रि में उठकर मूत्रत्याग के लिए जाने से नींद खराब होती है।

Home Remedies for Polyuria through Carrot.

बहुमूत्रता का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • 300 ग्राम ताजी गाजरों को बारीक टुकड़े करके सिल पर पीसकर उसमें थोड़ा-सा कलमी शोरा मिलाकर नाभि के नीचे के भाग पर लेप करने से बहुमूत्रता की विकृति में बहुत लाभ मिलता है।
  • शीत ऋतु में अधिक शीतल खाद्य पदार्थों के सेवन से बहुमूत्रता की विकृति हो जाती है। रात्रि में बार-बार मूत्रत्याग के लिए उठने पर नींद खराब होती है। गाजर के 100 ग्राम रस में 3 ग्राम मात्रा में कलमी शोरा डालकर पीने से बहुमूत्रता की विकृति नष्ट होती है। गाजर के रस को हल्का-सा गर्म करके सेवन करें।

गुर्दों में शूल – Kidney Pain

गुर्दों में शूल की विकृति अनेक कारणों से हो सकती है। कुछ स्त्री-पुरुषों को गुर्दों में पथरी होने के कारण शूल की विकृति होती है तो कुछ स्त्री-पुरुषों के गुर्दों में शोथ होने के कारण शूल की अधिकता होती है।

उत्पत्ति : अधिक शराब पीने से गुर्दों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। गुर्दों में शोथ होने से शूल की विकृति होती है। होटल, रेस्तरां में स्वादिष्ट , चटपटा, उष्ण मिर्च-मसालों और अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक समय तक करने से भी गुर्दों में शूल की विकृति होती है।

कुछ स्त्री-पुरुष कैल्शियम, फास्फेटयुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं। ऐसे लोगों के गुर्दों में पथरी बन जाती है। पथरी के मूत्र नली में पहुंचकर अवरोध उत्पन्न करने पर तीव्र शूल होता है।

लक्षण : गुर्दों में शूल की विकृति रोगी के लिए असहनीय होती है। रोगी बुरी तरह तड़प उठता है। कई बार शूल की अधिकता से रोगी बेहोश भी हो जाता है। चिकित्सा में विलम्ब करने से प्राणघातक स्थिति बन सकती है। गुर्दों में पथरी होने पर चिकित्सक ऑपरेशन का परामर्श देते हैं, लेकिन सभी स्त्री-पुरुष ऑपरेशन कराने की स्थिति में नहीं होते।

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गुर्दों में शूल का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • ऑपरेशन न कराने की स्थिति में औषधियों के सेवन से गुर्दों में शूल की विकृति को नष्ट किया जा सकता है। गाजर बहुत गुणकारी वनस्पति है। इसके सेवन से गुर्दों में शूल की विकृति को नष्ट किया जा सकता है।
  • 200 ग्राम ताजी गाजर के रस में 3 ग्राम यवक्षार मिलाकर रोगी को दिन में दो-तीन बार पिलाएं। कुछ ही दिनों में गुर्दों की पथरी नष्ट होने से शूल से मुक्ति मिलती है।
  • गाजर का रस और नारियल का जल बराबर-बराबर मात्रा में लेकर उसमें थोड़ा-सा सोडा-बाई-कार्ब (खाने का सोडा) मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करें। इससे गुर्दों की पथरी का निवारण होता है।
  • गाजर के 100 ग्राम रस में मूली का 50 ग्राम रस मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करने से गुर्दों में शूल की विकृति नष्ट होती है।
  • गाजर खाने और गाजर का रस पीने से गुर्दों में शूल की विकृति से सुरक्षा होती है। गाजर के रस में उपलब्ध सोडियम गुर्दों को अधिक सुरक्षित रखता है।
  • गाजर का रस, चुकंदर का रस और ककड़ी या खीरे का रस प्रत्येक 150 ग्राम मिलाकर पीने से बहुत लाभ होता है। गुर्दे (वृक्क/किडनी ) और मूत्राशय की पथरी को गाजर तोड़कर निकाल देती है।
  • गाजर का रस प्रतिदिन 3-4 बार सेवन करने से पथरी टूटकर मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है।
  • गाजर के बीजों को पीसकर चूर्ण बनाकर सेवन करने से भी पथरी निकल जाती है।

आधासीसी ( माइग्रेन ) – Migraine

आधासीसी अर्थात माइग्रेन की विकृति में रोगी के आधे सिर में तीव्र शूल होता है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले, बुद्धिजीवी , अध्यापक और कम्पयूटर पर अधिक समय तक काम करने वाले आधासीसी रोग से अधिक पीड़ित होते हैं।

उत्पत्ति : मानसिक कार्यों में अधिक समय तक संलग्न रहने वाले स्त्री-पुरुष आधासीसी के अधिक शिकार होते हैं। मानसिक तनाव के कारण आधासीसी जल्दी होता है। आहार में घी, दूध, मक्खन आदि वसायुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक समय तक अभाव बना रहे तो आधासीसी की विकृति होती है। आधुनिक परिवेश में फास्टफूड, चाउमीन, पीजा आदि के सेवन से आधासीसी की अधिक उत्पत्ति देखी जाती है।

लक्षण : आधासीसी रोग में रोगी के दाएं या बाएं आधे मस्तक में तीव्र शूल होता है। आधासीसी रोग को ‘ सूर्यावर्त’ भी कहते हैं, क्योंकि दूसरे रोग में सुबह सूर्य के साथ शूल की उत्पत्ति होती है। दोपहर तक शूल बढ़ता जाता है। उसके बाद शूल घटने लगता है। सूर्य के छिपने के साथ ही शूल नष्ट हो जाता है। फिर अगले दिन सूर्योदय के साथ शूल की पुनः उत्पत्ति होती है।

Home Remedies for Migraine through Carrot.

माइग्रेन का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • गाजरों के रस के सेवन से मस्तिष्क की शुष्कता का निवारण होने से आधासीसी रोग में बहुत लाभ होता है।
  • कोष्ठबद्धता के कारण आधासीसी रोग की उत्पत्ति होती है। कोष्ठबद्धता के नष्ट होने से अनेक रोगियों का आधासीसी रोग कम हो जाता है। गाजरों के रस के साथ पालक का रस मिलाकर पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है और आधासीसी का निवारण होता है।
  • अधिक मानसिक कार्य करने वालों को सुबह-शाम गाजर का रस पीना चाहिए। गाजर का रस पीने से स्नायु को भरपूर शक्ति मिलती है और आधासीसी रोग से सुरक्षा होती है।
  • गाजर के रस में विटामिन ‘ए’ पर्याप्त मात्रा में होता है। गाजर का रस पीने से नेत्र ज्योति प्रबल होती है। नेत्रों का अधिक काम करने वालों को गाजर के रस से अधिक लाभ होता है। आधासीसी रोग से सुरक्षा होती है।
  • गाजर की हरी पत्तियों पर हल्का-सा घी लगाकर, किसी कपड़े में बांधकर, पोटली बनाकर गर्म तवे पर सेक लें, फिर उन पत्तियों को कुचलकर रस निकालकर नाक में बूंद-बूंद टपकाने से आधासीसी का दर्द नष्ट होता है।

अनिद्रा ( नींद नहीं आना ) – Insomnia

आधुनिक परिवेश में अधिक दौड़-धूप और व्यस्त होने से अधिकांश स्त्री-पुरुषों में मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। ऐसी स्थिति में स्नायु विकृति होने से अनिद्रा रोग की उत्पत्ति होती है।

उत्पत्ति : भोजन में अधिक चटपटा, स्वादिष्ट या उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने पर पाचन क्रिया की विकृति से अनिद्रा रोग की उत्पत्ति होती है। मानसिक तनाव भी रातों की नींद को नष्ट कर देता है। उदर रोगों के कारण नींद की बहुत हानि होती है। कोष्ठबद्धता के कारण उदर में दूषित वायु की उत्पत्ति होने पर, दूषित वायु मस्तिष्क में पहुंचकर नींद को नष्ट कर देती है।

लक्षण : अनिद्रा की विकृति होने पर रोगी को देर रात तक नींद नहीं आती। यदि रोगी सो जाता है तो कुछ देर बाद ही उसकी नींद खुल जाती है और फिर पूरी रात बिस्तर पर करवटें बदलते गुजर जाती है। अनिद्रा के कारण रोगी बहुत बेचैन दिखाई देता है। कभी-कभी अनिद्रा की विकृति इतनी बढ़ जाती है कि रोगी नींद की ढेर सारी गोलियां खाकर आत्महत्या कर लेता है।

Home Remedies for Insomnia through Carrot.

अनिद्रा का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • अनिद्रा रोग को नष्ट करने में गाजर गुणकारी वनौषधि की तरह सहायता करती है। रात्रि को बिस्तर पर जाने से पहले 200 ग्राम गाजर का रस पीने से अनिद्रा की विकृति नष्ट होती है।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में 5 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण मिलाकर सेवन करने से अनिद्रा रोग में बहुत लाभ होता है।
  • कुछ व्यक्तियों को कोष्ठबद्धता के कारण नींद नहीं आती है। गाजर के रस में नीबू का रस मिलाकर पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होने पर नींद आने लगती है।
  • गाजर के रस में मिश्री मिलाकर पीने से भी अनिद्रा रोग नष्ट होता है।
  • सुबह-शाम गाजर खाने व गाजर का रस पीने से अच्छी नींद आती है।
  • अनिद्रा रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम स्नान करना चाहिए। सुबह-शाम भ्रमण करने से भी अनिद्रा के रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम स्नान करना चाहिए। सुबह-शाम भ्रमण करने से भी अनिद्रा नष्ट हो जाती है।

अल्पायु में बालों का नष्ट होना – Hair Loss

विभिन्न कारणों से अल्प आयु में बाल नष्ट हो जाने से कुछ पुरुष गंजे होकर रह जाते हैं। स्त्रियों की अपेक्षा पुरुष गंजेपन के अधिक शिकार होते हैं। कुछ पुरुष तो 25-30 वर्ष की आयु में गंजे होने लगते हैं।

उत्पत्ति : चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार जो स्त्री-पुरुष अधिक उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने चटपटे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं, उनके शरीर में पित्त की अधिक वृद्धि होने से बालों को अधिक हानि पहुंचती है। पित्त की उष्णता सिर के बालों को सफेद कर देती है या नष्ट कर देती है। पौष्टिक भोजन के अभाव में बालों को भरपूर पोषक तत्त्व नहीं मिल पाते तो बाल जडों से नष्ट होकर टूटने लगते हैं।

लक्षण : सिर धोने के बाद जब बालों को तौलिए से पोंछा जाता है तो तौलिए पर बहुत-से टूटे हुए बाल दिखाई देते हैं। बालों के तेजी से टूटने के कारण सिर गंजा होने लगता है।

Home Remedies for Hair Loss through Carrot.

बालों का झड़ना का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • शारीरिक निर्बलता के कारण जब बाल तेजी से नष्ट होने लगें तो प्रतिदिन 200 ग्राम गाजर का रस पीना चाहिए। गाजर के रस में भरपूर विटामिन होते हैं जो बालों को पोषक तत्त्व देकर, उन्हें शक्ति प्रदान करते हैं। बाल जडों से मजबूत होते हैं।
  • गाजर की सब्जी बनाते समय कुछ घरों में गाजर की पत्तियों को काटकर फेंक दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार गाजर की पत्तियों में फॉस्फोरस, कैल्शियम, खनिज लवण विशेष मात्रा में होते हैं। गाजर की सब्जी खाने से बालों को अधिक पौष्टिक शक्ति मिलती है। बाल लम्बे, घने और काले होते हैं।
  • गाजर के 150 ग्राम रस में पालक या चुकंदर का रस मिलाकर पीने से बालों को अधिक पोषक तत्त्व मिलते हैं। बाल लम्बे, घने और काले होते हैं। अल्प आयु में उनका टूटना बंद होता है।
  • गाजर के हलवे में मधु मिलाकर खाने से बालों का टूटना बंद होता है।
  • प्रतिदिन गाजर खाने या गाजर का रस पीने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिलने से बालों को बहुत लाभ पहुंचता है।
  • गाजर खाने से पित्त विकृति नष्ट होती है। पित्त की विकृति ही अल्प आयु में बालों को सफेद करती है और उन्हें जडों से खोखला करके नष्ट करती है। गाजर खाने वालों को इस विकृति में बहुत लाभ होता।

पिंडलियों की पीड़ा – Calf pain

घर में विवाह, जन्मदिन की पार्टी हो अथवा कोई पर्व-त्योहार हो उसमें अधिक दौड़-धूप करने वाली स्त्रियों को प्रायः यह शिकायत होती है कि उनकी पिंडलियां बहुत दर्द करती हैं।

ऑफिस में काम करने वाली स्त्रियाँ भी शाम को घर लौटने पर पिंडलियों में पीड़ा की शिकायत करती हैं। पिंडलियों की पीड़ा स्त्री-पुरुषों को अधिक बेचैन कर सकती है।

उत्पत्ति : ट्रेन या बस में लम्बी यात्रा करने से पिंडलियों में पीड़ा होने लगती है। ऑफिस या घर में अधिक सीढ़ियां उतरनी-चढ़नी पड़ें तो पिंडलियों में दर्द होने लगता है।

पांवों के सहारे देर तक खड़े रहने और कुर्सी पर देर तक बैठने से भी पिंडलियों में पीड़ा की उत्पत्ति हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शीतल वायु व जल में अधिक देर तक पांव डुबोकर रखने पर पिंडलियों में पीड़ा हो सकती है।

लक्षण : घुटनों के नीचे और टखनों के ऊपर पिंडलियों के मांसल भाग में पीड़ा की विकृति होती है। साधारण-सी पीड़ा रात्रि में बिस्तर पर आराम करते समय इतनी बढ़ जाती है कि रोगी बेचैन हो उठता है। उसकी आंखों से नींद उड़ जाती है।

Home Remedies for Calf pain through Carrot.

पिंडलियों की पीड़ा का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • शीतल वायु के प्रकोप से पिंडलियों में पीड़ा होने पर गाजर के 200 ग्राम रस में सोंठ का 3 ग्राम चूर्ण और पीपलामूल का 3 ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से पीड़ा का अंत होता है।
  • एक बड़े बर्तन में जल भरकर, उसमें गाजर की पत्तियां डालकर देर तक आग पर गर्म करें जब उसमें से भाप निकलने लगे तो उसकी भाप पिंडलियों पर लगाएं। थोड़ी देर तक भाप से सेंकने पर पिंडलियों की पीड़ा नष्ट हो जाती है।
  • गाजर को गर्म राख या गर्म बालू रेत में दबाकर भून लें। ऊपर का छिलका चाकू से हटाकर, गाजर को मिक्सी में पीसकर, उसमें मधु मिलाकर सेवन करें। इसमें 3 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिला लेने से पिंडलियों की पीड़ा नष्ट होती है।
  • शारीरिक निर्बलता के कारण पीड़ा होने पर गाजर का हलवा खाने से पिंडलियों की पीड़ा का निवारण होता है।

क्षय रोग ( टी.बी. ) – Tuberculosis

प्रदूषित वातावरण में रहने और दूषित भोजन करने व दूषित जल पीने से क्षय रोग की उत्पत्ति होती है। क्षय रोग लम्बे समय तक चलने वाला रोग है। लेकिन इस रोग की उचित चिकित्सा कराई जाए तो शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।

उत्पत्ति : गंदी बस्तियों में रहने वाले लोग जब दूषित भोजन व जल का इस्तेमाल करते हैं तो उनके शरीर में क्षय रोग के जीवाणु पहुंचकर रोग की उत्पत्ति करते हैं।

क्षय रोग से पीड़ित गाय-भैंस का दूध पीने से भी इस रोग की उत्पत्ति हो सकती है। घर में किसी एक व्यक्ति को क्षय रोग हो तो उसके साथ खाने-पीने और बिस्तर पर सोने से क्षय रोग हो जाता है।

लक्षण : क्षय रोगी को खांसी बहुत होती है। देर तक खांसने के बाद थोड़ा-सा बलगम (कफ) निकलता है। क्षय रोगी के मुंह और नाक में जीवाणु छिपे रहते हैं। जो खांसने, पर वायु में फैलकर दूसरे स्वस्थ व्यक्ति तक पहुंचकर उसे रोगी बना देते हैं। क्षय रोग की चिकित्सा में अधिक विलम्ब करने व भोजन में लापरवाही करने से रोग अधिक उग्र रूप धारण कर लेता है और जोर से खांसने पर रक्त मिला कफ भी निकलने लगता है।

Home Remedies for Tuberculosis through Carrot.

क्षय रोग का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • शारीरिक रूप से निर्बल होने पर क्षय रोग के जीवाणु जल्दी संक्रमण करके रोगी बनाते हैं। शारीरिक निर्बलता को दूर करने के लिए सभी स्त्री-पुरुष व बच्चों को गाजर का खूब सेवन करना चाहिए।
  • गाजर को दांतों से चबाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में पालक या चुकंदर का 50 ग्राम रस मिलाकर पीने से भरपूर शक्ति मिलती है।
  • गाजर के 25 ग्राम रस में छोटी पीपल का चूर्ण 3 ग्राम और मधु 10 ग्राम मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार सेवन से क्षय रोग में बहुत लाभ होता है।
  • गाजर के 500 ग्राम रस में दूध 500 ग्राम मात्रा में मिलाकर, आग पर देर तक पकाएं। जब दूध और रस आधा रह जाए तो उसमें 25 ग्राम मिश्री मिलाकर, कांच के पात्र में डाल दें। प्रतिदिन 10-15 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम खाने से क्षय रोग में ज्वर व खांसी नष्ट होती है। शारीरिक निर्बलता भी नष्ट होती है।

रक्तपित्त – Haemoptysis

रक्तपित्त की विकृति में रोगी की नाक, कान, गुदा ( मलद्वार) आंख,, योनि व मूत्र मार्ग से रक्त निकलने लगता है। रक्तपित्त की चिकित्सा यदि तुरंत नहीं की जाए तो अधिक रक्त निकल जाने से प्राणघातक स्थिति बन सकती है।

उत्पत्ति : अधिक उष्ण खाद्य पदार्थों का सेवन करने से, शरीर में पित्त की मात्रा अधिक होने पर रक्तपित्त की विकृति होती है। शारीरिक क्षमता से अधिक शारीरिक श्रम करने, उष्ण वातावरण में रहने, तेज धूप में चलने-फिरने से भी रक्तपित्त की विकृति हो सकती है। उष्ण वातावरण में बच्चों के खेलने , भागने , दौड़ने से नाक से रक्तस्राव होने लगता है।

लक्षण : रक्तपित्त में नाक और गुदा से अधिक रक्तस्राव होता है। ऋतुस्राव (मासिक धर्म) में अवरोध होने पर कई लड़कियों की नाक से रक्तस्राव होने लगता है। उच्च रक्तचाप की अधिकता के कारण भी नाक से रक्तस्राव हो सकता है।

Home Remedies for Haemoptysis through Carrot.

रक्तपित्त का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • बच्चों के धूप में खेलने पर जब नाक से रक्तस्राव होने लगे तो सबसे पहले उसके सिर पर नल से अथवा किसी पात्र से शीतल धार डालें। 5-7 मिनट में रक्तस्राव बंद हो जाएगा।
  • गाजर का रस ठंडा करके पिलाने से नाक से रक्तस्राव बंद होता है। अधिक रक्तस्राव की विकृति होने पर दिन में कई बार गाजर का रस पिलाना चाहिए।
  • गाजर के 100 ग्राम रस में पेठे का 100 ग्राम रस और मिश्री मिलाकर पीने से रक्तस्राव की विकृति नष्ट होती है।
  • अर्श रोग के कारण मल द्वार से रक्तस्राव होता है तो रोगी को प्रतिदिन गाजर का रस पिलाएं। गाजर का रस पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है और रक्तस्राव बंद होता है।
  • गाजर का रस 150 ग्राम में चुकंदर का रस 50 ग्राम मात्रा में मिलाकर है’पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और रक्तस्राव से सुरक्षा होती।
  • गाजर के 150 ग्राम रस में 50 ग्राम पालक का रस मिलाकर पीने से रक्तपित्त की विकृति में बहुत लाभ होता है।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में 10 ग्राम आंवले का रस मिलाकर पीने से रक्तपित्त की विकृति में बहुत लाभ होता है।

एक्जिमा – Eczema

जनसाधारण में एक्जिमा को छाजन, अकौता के नाम से सम्बोधित किया जाता है। एक्जिमा की एक बार उत्पत्ति हो जाए तो लम्बे समय तक उसका निवारण नहीं हो पाता है।

उत्पत्ति : दूषित वातावरण में रहने और प्रकृति विरुद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले एक्जिमा से अधिक पीड़ित होते हैं। कान के पीछे, गर्दन, पांवों में टखनों के पास और हाथों में उंगलियों पर एक्जिमा की विकृति होती है। जननेन्द्रियों के आसपास एक्जिमा होने से रोगी को बहुत पीड़ा होती है। एक्जिमा वंशानुगत भी हो सकता है।

लक्षण : एक्जिमा होने पर रोगी को बहुत खुजली होती है। अधिक खुजलाने से जख्म बन जाते हैं। जख्मों से पूय का स्राव होता है।

जीवाणुओं के संक्रमण से एक्जिमा वर्षों तक बना रहता है। एलर्जी के कारण एक्जिमा तेजी से फैलता है।

Home Remedies for Eczema through Carrot.

एक्जिमा का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • एक्जिमा से जल्दी मुक्ति पाने के लिए रोगी को भोजन में उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने चटपटे खाद्य पदार्थों का सेवन बंद कर देना चाहिए। सिगरेट, बीड़ी , पीने से भी परहेज करना चाहिए।
  • गाजर का रस पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है। कोष्ठबद्धता नष्ट होने से शरीर के दूषित तत्त्व शौच के साथ निष्कासित हो जाने से एक्जिमा का प्रकोप कम होता है।
  • गाजर का रस पीने से रक्त शुद्ध होता है और रक्त विकार नष्ट होते हैं। एक्जिमा की उत्पत्ति रक्त विकार के कारण होती है। गाजर के रस का सेवन करने से एक्जिमा का निवारण होता है।
  • गाजर और पालक का रस मिलाकर पीने से एक्जिमा नष्ट होने लगती है। कुछ सप्ताह तक निरंतर सेवन करना चाहिए।

शरीर की त्वचा का श्वेत रंग – Vitiligo

शारीरिक निर्बलता के कारण जब शरीर में रक्त की अत्यधिक कमी होती है तो त्वचा का रंग सफेद, पीला दिखाई देने लगता है। रक्त की कमी से त्वचा का गुलाबीपन नष्ट होने से सौंदर्य-आकर्षण नष्ट हो जाता है।

उत्पत्ति : त्वचा का रंग श्वेत या पीला होने की विकृति शरीर में रक्त की कमी के कारण होती है। आंत्रिक ज्वर (टायफाइड) , अस्थमा, क्षय रोग (टी.बी.) , मधुमेह (डायबिटीज) में रक्त की अत्यधिक कमी हो जाने से त्वचा का रंग पीला या श्वेत होने लगता है। दुर्घटना के कारण शरीर से अधिक रक्तस्राव होने पर भी त्वचा का रंग श्वेत दिखाई देने लगता है। रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया में त्वचा का रंग अधिक श्वेत दिखाई देता।

लक्षण : शरीर में रक्त की कमी हो जाने से चेहरे की गुलाबी आभा नष्ट हो जाती है। त्वचा का रंग श्वेत व पीला दिखाई देता है। त्वचा खुरदरी हो जाती है। उसकी कोमलता और स्निग्धता नष्ट हो जाती है। त्वचा के शुष्क हो जाने से खुजली की विकृति होती है। सौंदर्य-आकर्षण नष्ट हो जाता है।

Home Remedies for Vitiligo through Carrot.

सफ़ेद दाग का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • शरीर में किसी कारण से रक्त की अत्यधिक कमी होने पर डॉक्टर पौष्टिक आहार व फल-सब्जियों का सेवन करने के लिए कहते हैं, लेकिन फलों के महंगे होने के कारण सभी व्यक्ति फलों का सेवन नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में गाजर सबसे उपयोगी वनस्पति है। गाजर खाने और उसका रस पीने से कुछ दिनों में रक्त की कमी पूरी होने से त्वचा गुलाबी दिखाई देने लगती है।
  • गाजर का 200 ग्राम रस और पालक का 50 ग्राम रस मिलाकर पीने से रक्ताल्पता की विकृति नष्ट होती है और त्वचा का रंग गुलाबी होने लगता है। चेहरे का सौंदर्य विकसित होने लगता है।
  • गाजर का मूली, खीरा, चुकंदर के साथ सलाद बनाकर खाने से बहुत लाभ होता हैं। पाचन क्रिया प्रबल होने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती
  • गाजर के 200 ग्राम रस में चुकंदर या अनार का 50 ग्राम रस मिलाकर पीने से त्वचा का रंग तेजी से गुलाबी होता है।
  • गाजर का हलवा या गाजर का मुरब्बा खाने से भी शारीरिक शक्ति विकसित होने वे त्वचा का रंग गुलाबी होता है।
  • गाजर की कांजी बनाकर पीने से पाचन शक्ति प्रबल होती है। सब खाया-पीया जल्दी पच जाता है। शारीरिक शक्ति विकसित होती है।

सिर में चक्कर आना – Dizziness

मस्तिष्क की निर्बलता के कारण सिर में चक्कर आने की विकृति होती है। शारीरिक निर्बलता होने पर मस्तिष्क पर भी हानिकारक प्रभाव होता है। सिर में चक्कर आने से स्त्री-पुरुषों को बहुत परेशानी होती है।

उत्पत्ति : सिर में चक्कर आने की विकृति किसी रोग के कारण लम्बे समय तक पीड़ित होते रहने से होती है। आंत्रिक ज्वर में शारीरिक रूप से निर्बल हो जाने पर चक्कर आने लगते हैं। रक्ताल्पता के रोग में बिस्तर से झुक से उठने पर चक्कर आने लगते हैं। अधिक मानसिक कार्य करने और सक खाद्य पदार्थों के सेवन नहीं करने के कारण भी विकृति की उत्पत्ति होती है।

लक्षण : सिर में चक्कर आने की विकृति में रोगी के उठकर खड़े होने पर नेत्रों के सामने अंधेरा छा जाता है। रोगी के चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में सिर में चक्कर आने लगते हैं। मधुमेह रोग में सिर में चक्कर आने की विकृति अधिक होती है। सहवास में अधिक संलग्न रहने व हस्तमैथुन की अधिकता से वीर्य नष्ट होने पर सिर में चक्कर आने लगते हैं।

Home Remedies for Dizziness through Carrot.

चक्कर आने का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • यदि किसी रोग के कारण शारीरिक निर्बलता की उत्पत्ति हुई हो तो पहले उसके निवारण के लिए रोगी को पौष्टिक आहार देना चाहिए।
  • गाजर और पालक का रस मिलाकर पीने से शारीरिक एवं मानसिक क्षीणता दूर होने से चक्कर आने की विकृति नष्ट होती है।
  • रक्ताल्पता के रोगी को गाजर के रस के अतिरिक्त गाजर का सूप पीने से बहुत लाभ होता है।
  • गाजर के मुरब्बे पर चांदी का वर्क लगाकर सेवन करने से मस्तिष्क की है’क्षीणता नष्ट होने से सिर में चक्कर आने की विकृति का निवारण होता।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में संतरे या पालक का 100 ग्राम रस और 10 ग्राम मधु मिलाकर सेवन करने से चक्कर आने की विकृति नष्ट होती।
  • गाजर के हलवे में शुद्ध घी, मेवे और दूध से बना मावा (खोया) मिलाकर खाने से सिर में चक्कर आने की विकृति नष्ट होती है।
  • गाजर खाने और सलाद बनाकर खाने से भी सिर चकराने की विकृति में बहुत लाभ होता है।

अधिक थकावट – Tiredness

कुछ स्त्री-पुरुष घंटों परिश्रम के काम करने पर भी थकावट अनुभव नहीं करते, जबकि कुछ स्त्री-पुरुष थोड़ी देर परिश्रम करने से थक जाते हैं। कुछ स्त्री-पुरुषों को सीढ़ियां चढ़ने में भी बहुत थकावट और परेशानी होने लगती।

उत्पत्ति : भोजन में पौष्टिक तत्त्व की कमी के कारण शारीरिक निर्बलता होने पर अधिक थकावट होती है। रक्ताल्पता रोग में भी स्त्री-पुरुष अधिक थकावट अनुभव करते हैं। रक्त की कमी के कारण अधिकांश लोग थकावट से परेशान होते हैं। अधिक शारीरिक श्रम करने से भी थकावट होती है।

Home Remedies for Tiredness through Carrot.

अधिक थकावट का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • शरीर में रक्त की कमी होने पर थकावट अनुभव होती है। ऐसी स्थिति में गाजर खाने और गाजर का रस पीने से रक्त की कमी दूर होने पर थकावट नहीं होती है।
  • गाजर को चबाकर खाते हुए थोड़ा-सा गुड खाने से भरपूर शक्ति मिलती है। शरीर में उत्साह और स्फूर्ति उत्पन्न होती है।
  • शरीर में अधिक दूषित तत्त्व एकत्र होने से थकावट की विकृति होने पर गाजर और गुड का सेवन करने से मूत्र अधिक निष्कासित होता है। मूत्र के साथ दूषित तत्त्व निकल जाते हैं। रक्त शुद्ध हो जाने से थकावट नहीं होती है।
  • कोष्ठबद्धता (कब्ज) की अधिक विकृति होने से आंत्रों में मल के एकत्र होने से शरीर में आलस्य और थकावट की अनुभूति होती है। कुछ काम करते ही सभी अधिक थकावट अनुभव करते हैं। ऐसे में प्रतिदिन गाजर और पालक का रस मिलाकर पीने से थकावट नहीं होती है।

रक्ताल्पता ( एनीमिया ) – Anemia

रक्ताल्पता अर्थात एनीमिया रोग में स्त्री-पुरुष इतने निर्बल हो जाते हैं कि उन्हें चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगती है। सीढ़ियां चढ़ना तो उनके लिए बहुत कठिन हो जाता है।

उत्पत्ति : रक्ताल्पता की विकृति आहार में पौष्टिक तत्त्वों की कमी के कारण होती है। आहार में हरी सब्जियां, पत्ते वाले शाक और दालों का बहुत कम मात्रा में सेवन करने से शारीरिक निर्बलता विकसित होती है और कुछ दिनों के बाद स्त्री-पुरुष रक्ताल्पता के शिकार हो जाते हैं। स्त्रियों में ऋतुस्राव की विकृति उन्हें रक्ताल्पता का रोगी बना देती है। अधिक बच्चों को जन्म देने के कारण स्त्रियाँ रक्ताल्पता से पीड़ित होती हैं। अतिसार और संग्रहणी रोग में भी स्त्री-पुरुष रक्ताल्पता के शिकार होते हैं। किसी दुर्घटना में अधिक रक्तस्राव होने से रक्ताल्पता की विकृति हो सकती है।

लक्षण : रक्ताल्पता में रक्त की अत्यधिक कमी होने से शरीर की त्वचा का रंग श्वेत व पीला दिखाई देने लगता है। शारीरिक रूप से रोगी इतना निर्बल हो जाता है कि कुछ कदम चलने में उसके पांव लड़खड़ाने लगते हैं। रोगी को बिस्तर से उठकर खड़े होने में चक्कर आते हैं। नेत्रों के सामने अंधेरा-सा छा जाता है। सीढ़ियां चढ़ने में सारा शरीर पसीने से भीग जाता है। हृदय जोरों से धड़कने लगता है।

Home Remedies for Anemia through Carrot.

एनीमिया का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • प्रतिदिन गाजर और नीबू के रस का सलाद बनाकर खाने से रक्ताल्पता कम होती है। गाजर के सलाद में मूली, टमाटर, खीरा व चुकंदर को काटकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • प्रतिदिन 200 ग्राम गाजर का रस पीने से रक्ताल्पता नष्ट होती है। गाजर के रस में थोड़ा-सा नमक व नीबू का रस मिलाने से स्वाद बढ़ जाता है।
  • गाजर के रस में नमक और अदरक का रस मिलाकर पीने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) में लाभ होता है। नमक और अदरक का रस निम्न रक्तचाप के प्रभाव को कम करते हैं।
  • गाजर का रस 200 ग्राम और पालक का रस 50 ग्राम मिलाकर कुछ सप्ताह तक पीने से रक्ताल्पता की विकृति नष्ट होती है।
  • अधिक बच्चों को जन्म देने से जब रक्ताल्पता उत्पन्न होती है तो स्त्रियों को प्रसव के बाद गाजर का रस प्रतिदिन सेवन करने से बहुत लाभ होता।
  • बच्चों को गाजर का रस पिलाने से उनके रक्त की वृद्धि होती है और शारीरिक निर्बलता नष्ट होती है। बच्चे रक्ताल्पता से सुरक्षित रहते हैं।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में चुकंदर का 50 ग्राम रस मिलाकर प्रतिदिन पीने से रक्ताल्पता बहुत जल्दी नष्ट होती है। शीत ऋतु में गाजर का हलवा अधिक मात्रा में सेवन किया जा सकता है।
  • गाजर के रस में मधु मिलाकर पीने से शरीर में रक्त की वृद्धि तेजी से होती है और रक्ताल्पता से मुक्ति मिलती है। मधुमेह रोगी मधु का इस्तेमाल चिकित्सक के परामर्श पर करें।

आग से जलने पर – Burns

थोड़ी-सी लापरवाही से कोई भी आग से जल सकता है। छोटे बच्चे माचिस से खेलते-खेलते कई बार तीली जलाते हुए आग से जल जाते हैं। किचन में काम करते हुए, दूध उबालते हुए व दूसरे काम करते हुए नवयुवतियां आग से जल जाती हैं। दीपावली पर बम-पटाखों से जलने की बहुत दुर्घटनाएं होती हैं।

लक्षण : आग से जल जाने पर बहुत जलन और पीड़ा होती है। तीव्र जलन के कारण कई बार पीड़ा व तड़प असहनीय हो जाती है। आग से त्वचा जलकर नष्ट हो जाती है और मांस दिखाई देने लगता है। ऐसे में जीवाणुओं के संक्रमण का बहुत भय रहता है। जले हुए भाग पर जीवाणु संक्रमण करके पूय (मवाद) की उत्पत्ति करते हैं। ऐसी स्थिति में अधिक हानि की सम्भावना बन जाती है।

Home Remedies for Burns through Carrot.

आग से जलने का गाजर द्वारा घरेलू उपचार।

  • आग से जल जाने पर गाजर बहुत गुणकारी औषधि का काम करती है। गाजर को कद्दूकस पर घिसकर, फिर उसे सिल पर पीसकर जले हुए भाग पर लेप कर दें। थोड़ी देर बाद गाजर के रस से लेप को गीला करते रहें। ऐसा करने से जलन व पीड़ा कम होती है और फफोले भी नहीं बनते।
  • गाजर को पीसकर कई दिन तक जले भाग पर लेप करने से जख्म जल्दी नष्ट होते हैं। जलने का निशान भी नहीं बनता।
  • गाजर को पीसकर, उसमें मधु मिलाकर जले हुए भाग पर लगाने से जलन व पीड़ा शीघ्र नष्ट होती है।
  • गाजर का रस पिलाने से भी जल जाने वाले को बहुत लाभ होता है।
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