हस्तमैथुन का आयुर्वेदिक उपचार

Masturbation Home Remedies In Hindi

आधुनिक चिकित्सक हस्तमैथुन की विकृति को हानिकारक नहीं मानते हैं, जबकि आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार हस्तमैथुन से शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत हानि होती है। हस्तमैथुन से वीर्य की बहुत क्षति होती है और युवावस्था में नवयुवक अपने को नपुंसक अनुभव करने लगते हैं।

Why does Masturbation happens?

हस्तमैथुन क्यों होता है?

उत्पत्ति : हस्तमैथुन की कुवृत्ति किशोरावस्था में दूसरे हम उम्र लड़कों के साथ अधिक घनिष्ठता और एकांत के वातावरण में प्रारंभ होती है। होस्टलों में रहने वाले लड़के हस्तमैथुन की कुवृत्ति के अधिक शिकार होते हैं। आजकल तो लकड़ियों में भी हस्तमैथुन की कुवृत्ति तीव्र गति से बढ़ रही है।

आधुनिक यौन स्वच्छंद वातावरण में अश्लील फिल्मों के देखने से उत्पन्न कामोत्तेजना किशोरों में हस्तमैथुन की अधिक कुवृत्ति उत्पन्न करती है। स्कूल व कॉलेजों का वातावरण भी कामोत्तेजना को विकसित करके नवयुवकों को हस्तमैथुन की ओर आकर्षित करता है। बसों में अधिक भीड़ होने पर लकड़ियों से स्पर्श की अनुभूति शरीर में कामोत्तेजना को प्रबल करती है और युवक हस्तमैथुन करके कामोत्तेजना को शांत करते हैं।

What are Symptoms of Masturbation?

हस्तमैथुन के लक्षण क्या है?

लक्षण : हस्तमैथुन की कुवृत्ति से वीर्य की अधिक क्षति होने से मस्तिष्क को बहुत हानि होती है। स्मरणशक्ति अधिक क्षीण हो जाने से युवक शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ जाते हैं। कुछ स्मरण नहीं रह पाने के कारण परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाते। हस्तमैथुन की कुवृत्ति से सिरदर्द होता है। कुर्सी से उठकर खड़े होने, सीढ़ियां चढ़ने पर नेत्रों के आगे अंधेरा छा जाता है। किसी में चक्कर आते हैं।

मनोवैज्ञानिक रूप से हस्तमैथुन से पीड़ित नवयुवक संकोची स्वभाव के हो जाते हैं और उनमें सबसे अलग रहने की आदत बन जाती है। उनके मन में यह आशंका बनी रहती है कि कोई उनकी कुवृत्ति को जान लेगा तो उन्हें बहुत अपमानित होना पड़ेगा। ऐसे नवयुवक लकड़ियों से बातें करते हुए भी बहुत संकोच अनुभव करते हैं।

What to eat on Masturbation?

हस्तमैथुन होने पे क्या खाएं?

  • प्रतिदिन अधिक-से-अधिक दही का सेवन करें।
  • हल्के, सुपाच्य खाद्य पदार्थों का सेवन करें
  • भोजन के साथ प्रतिदिन खीरा, ककड़ी, टमाटर, मूली का सलाद बनाकर नींबू का रस मिलाकर सेवन करें।
  • गाजर, गन्ने का रस, संतरे, मौसमी का रस, अनन्नास का रस पिएं।
  • केले को काटकर उसमें मधु मिलाकर खाएं।
  • अनार के छिलकों को पीसकर, जल में मिलाकर, छानकर पिएं।
  • जामुन की गुठली को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ सेवन करें।
  • हरी सब्जियां, पालक, बथुआ, मेथी, घीया, तोरई, टिंडे की सब्जी खाएं, लेकिन उनमें मिर्च-मसालों का इस्तेमाल न करें।
  • दूध को ठंडा करके पिएं।
  • सूखे धनिए को कूटकर छानकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण मिसरी मिलाकर जल के साथ सेवन करें।
  • आंवले, गाजर, सेब का मुरब्बा प्रतिदिन खाएं और ऊपर से दूध पिएं।
  • हस्तमैथुन के रोगी कोष्ठबद्धता से सुरक्षा के लिए रात्रि को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण हल्के गर्म जल से सेवन करें।
  • काले तिल व गोखरू कूट-पीसकर दूध में देर तक उबालें। आधा दूध शेष रह जाने पर पिएं। हस्तमैथुन की निर्बलता नष्ट होती है।
  • बेल के पत्तों के रस में मधु मिलाकर शिश्न पर लेप करने से हस्तमैथुन से उत्पन्न विकृति नष्ट होती है।

What to not eat on Masturbation?

हस्तमैथुन होने पे क्या नहीं खाएं?

  • बस या रेल में यात्रा करते समय लकड़ियों को स्पर्श न करें।
  • घी, तेल से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • अपने मित्रों के बीच अश्लील बातें न करें।
  • किसी नवयुवती को देखकर अपने मस्तिष्क में अश्लील कल्पना न करें।
  • उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें।

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