संतुलित आहार का महत्व – पौष्टिक भोजन के लाभ – संतुलित आहार के लाभ

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Importance of Balanced Food – Benefits of Nutritious Food – Benefits of Balanced Diet In Hindi

स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन का बहुत महत्व होता है, क्योंकि प्रतिदिन सुबह-शाम हम जो भोजन करते हैं, उससे पाचन क्रिया संपन्न होने पर शरीर को ऊर्जा शक्ति व रोग निरोधक शक्ति मिलती है।। भोजन से प्राप्त ऊर्जा से शरीर का संचालन होता है। मांसपेशियों में क्रियाएं होती हैं। शारीरिक शक्ति के कारण हम सभी कार्य संपन्न करते हैं। संतुलित भोजन नहीं कर पाने की स्थिति में शारीरिक निर्बलता विकसित होने से हम विभिन्न रोग-विकारों से पीड़ित होते हैं। भोजन शरीर को स्वस्थ व संतुलित बनाए रखता है। शरीर के आंतरिक अंग भोजन की ऊर्जा शक्ति से सक्रिय रहते हैं। भोजन की ऊर्जा शक्ति के कारण विभिन्न कार्य करते हैं। खेलते-कूदते हैं, भार उठाते हैं और मस्तिष्क के कार्य करते हैं। भोजन में कार्बोहाइड्रेट और वसा के समावेश से ऊर्जा उत्पन्न होती है। जब हम भोजन के रूप में अनाज, दालें, आलू, घी, तेल, मक्खन, गुड़, शक्कर और मेवों का सेवन करते हैं तो शरीर को ऊर्जा मिलती है। ऊर्जा के लिए प्रोटीन का भी सेवन किया जाता है।

भोजन से शरीर में नए तंतुओं की उत्पत्ति होती है। नए तंतुओं की उत्पत्ति गर्भवती महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। प्रतिदिन शारीरिक श्रम करने से तंतु नष्ट होते रहते हैं। भोजन से नए तंतुओं के निर्माण की क्रिया चलती रहती है। शरीर में भोजन के विभिन्न खाद्य प्रोटीन, खनिज लवण और जल से तंतुओं का निर्माण होता है। दूध, दही, दूध से बने खाद्य, मूंगफली, सूखे मेवे, दालें, सोया बीन, मांस-मछली, अंडे से शरीर को प्रोटीन मिलते हैं। पौष्टिक व संतुलित भोजन से शरीर को रोग-निरोधक शक्ति प्राप्त होती हैं। इस शक्ति की उपलब्धि खनिज लवण, प्रोटीन, जल, विटामिन आदि से होती है। शरीर को फल-सब्जियों, अंकुरित अनाज, दालों, दूध, दही, पनीर, अंडों से अधिक रोग-निरोधक शक्ति मिलती है।

कार्बोहाइड्रेट

कार्बोहाइड्रेट दो प्रकार के होते हैं। एक शक्कर देने वाले, दूसरे मांड देने वाले। कार्बोहाइड्रेट शरीर को शक्ति देने के साथ-साथ ऊष्मा भी देते हैं। शक्कर वाले कार्बोहाइड्रेट शीघ्र पच जाते हैं। कार्बोहाइड्रेट सभी अनाजों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। जौ, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, शर्करा, आलू, चावल, गन्ना, चुकंदर, खजूर तथा केले में विशेष रूप से कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। शक्कर और गुड़ में अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इनके जल्दी पच जाते है।

कार्बोहाइड्रेट शरीर के ताप को स्थिर रखते हैं। इनकी सहायता के बिना वसा की पाचन क्रिया संपन्न नहीं होती है। मांसपेशियों का निर्माण भी कार्बोहाइड्रेट की सहायता से होता है।

प्रोटीन

शरीर में शक्ति और स्फूर्ति प्रोटीन से उत्पन्न होती है। शरीर में कोषाणुओं (सैल) की उत्पत्ति और नष्ट हुए कोषाणुओं का पुनर्निर्माण भी प्रोटीन द्वारा होता है। प्रोटीन से शक्ति भी विकसित होती है। प्रोटीन दालों में पर्याप्त मात्रा में होता है। दालों के अतिरिक्त चना, मटर, पनीर, मेवे और दूध में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है।

प्रोटीन शरीर को रोग निरोधक शक्ति प्रदान करता है। प्रोटीन से मानसिक शक्ति विकसित होती है। मांसपेशियों का निर्माण भी प्रोटीन से होता है।

प्रोटीन कई प्रकार के होते हैं। कुछ प्रोटीन जल में घुलनशील होते हैं, जबकि कुछ प्रोटीन जल में नहीं घुलते । अंडे की सफेदी भी एक प्रकार का प्रोटीन होता है। प्रोटीन में कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन, नाइट्रोजन, गंधक और फॉस्फोरस मौलिक तत्त्व पाए जाते हैं। प्रोटीन अम्ल और क्षार में संतुलन बनाए रखता है। रक्त के लाल कणों में उपस्थित हीमोग्लोबिन आक्सीजन को शरीर के प्रत्येक अंग में पहुंचाता है। कार्बन-डाइ-ऑक्साइड को शरीर से निष्कासन के लिए फुफ्फुस (फेफड़ों) में पहुंचाता है। वयस्क स्त्री-पुरुषों को शरीर की आवश्यक ऊर्जा का 10-12 प्रति शत प्रोटीन से प्राप्त होता है। गर्भावस्था में स्त्रीयों को 15 प्रति शत प्रोटीन से प्राप्त होना चाहिए।

वसा

शरीर की शक्ति, स्फूर्ति और मस्तिष्क के लिए वसा सबसे गुणकारी तत्त्व है। विशेषज्ञों के अनुसार वसा में चरबीदार अम्ल और ग्लिसरीन का मिश्रण होता है। वसा का निर्माण कार्बन-हाइड्रोजन और आक्सीजन के तत्वों से मिलकर होता है। वसा में नाइट्रोजन तत्त्व नहीं होता है। कार्बोहाइड्रेट की अपेक्षा वसा 2.5 गुणा अधिक शक्ति और ऊष्मा प्रदान करती है। वसा शरीर की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करती है, लेकिन अधिक वसा के सेवन से स्थूलता बढ़ती है।

जल से हल्की होने के कारण यह उस पर तैरती है। शीतल वातावरण में रखने से वसा जम जाती है। वसा के सेवन से शरीर को उष्णता और ऊर्जा मिलती है। वसा के कारण त्वचा स्निग्ध और कोमल बनी रहती है।

वसा जीवन तत्वों के विभिन्न अवयवों में पहुंचाने का कार्य करती है। त्वचा के नीचे पाए जाने वाली वसा शरीर की उष्णता को बाहर नहीं निकलने देती । इस तरह वसा शरीर के तापमान को स्थिर रखती है। वसा शौच निष्कासन में सहायता करती है। कोष्ठबद्धता को नष्ट करती है।

कैल्शियम

कैल्शियम शरीर की अस्त्रियों को शक्ति प्रदान करता है। दांतों को भी कैल्शियम से रोग-निरोधक शक्ति मिलती. है। रक्त को जमने की शक्ति भी कैल्शियम से मिलती है। इससे हृदय की गति संतुलित रहती है। कैल्शियम दूध, पनीर, दही, अंडों के अतिरिक्त फल-सब्जियों में अधिक मात्रा में होता है। कैल्शियम के अभाव में बच्चों को रिकेट और स्त्रियों में मृदलास्थि के रोग उत्पन्न होते हैं। प्रतिदिन 1 ग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है।

100 ग्राम चने में 202, मटर में 20, सोया बीन में 240, पालक में 73, मेथी में 395, सरसों के साग में 155, बंदगोभी में 39, चने के साग में 340, फूलगोभी में 33, में 66, टमाटर में 20, खीरे में 10, करेले में 20, Rig में 20, संतरे में 26, अनन्नास में 20, अनार में 10, नीबू में 70, अंगूर में 20, फालसे में 129, अंजीर में 80, आम में 14, अमरूद में 10 मिलीग्राम मात्रा में कैल्शियम होता है।

दूध

दूध में प्रोटीन 3.5 प्रति शत मात्रा में होता है। दूध में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम आदि खनिज लवण और विटामिन ‘सी’ और ‘डी’ भी मिलता है। दूध में वसा घुली रहती है। दूध में कार्बोहाइड्रेट व दुग्ध शर्करा (लेक्टोज) भी होते हैं। दूध को उबालकर सेवन करना चाहिए।

दही

दूध को उबालने के बाद दही बनाया जाता है। दही के गुण दूध से परिवर्तित हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दही अधिक गुणकारी होता है। उबले हुए दूध में ‘लेक्टिक अम्ल’ की उत्पत्ति करने वाले जीवाणुओं से दही बनाया जाता है। दही में प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, वसा और विटामिन ‘ए’ और ‘डी’ भी उपलब्ध होते हैं। दूध की अपेक्षा दही की पाचन क्रिया जल्दी होती है। प्रवाहिका (पेचिश) और अतिसार (दस्त) में दही बहुत लाभप्रद होता है। हृदय रोगों में और उच्च रक्तचाप बढ जाने पर दही के सेवन से रक्त में उपस्थित कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो जाती है। दही के तत्त्व यकृत में कॉलेस्ट्रॉल के निर्माण को रोक देते हैं। दही की लस्सी पीने से ग्रीष्म ऋतु की उष्णता नष्ट होती है। कोष्ठबद्धता को : नष्ट करने में दही से निर्मित तक्र (मट्ठा) बहुत सहायता करता है।

धान्य

गेहूं, चावल, चना, बाजरा, मक्का आदि अनाज अधिकांश व्यक्ति खाते हैं। गेहूं में 13 प्रति शत प्रोटीन और 70.92 प्रति शत कार्बोहाइड्रेट तथा 2.27 प्रति शत वसा होती है। गेहूं के बाद चावल का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। चावल में प्रोटीन व वसा (चिकनाई) की मात्रा कम होती है। चावल में 18.8 प्रति शत कार्बोहाइड्रेट होता है। श्वेतासार की पूर्ति के लिए चावल का सबसे अधिक सेवन किया जाता है। मशीन द्वारा पॉलिश किए जाने पर चावल के विटामिन ‘बी’ 75 प्रति शत, प्रोटीन 30 प्रति शत नष्ट हो जाते हैं। चावल शीतल व पौष्टिक होता है।

जल

कुछ व्यक्ति संतुलित भोजन में जल का समावेश नहीं करते हैं। भोजन के साथ जल पीने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ मना करते हैं। शारीरिक शक्ति व स्फूर्ति के लिए जल बहुत आवश्यक होता है। पाचन क्रिया जल की सहायता से संपन्न होती है। जल की अधिक कमी से शरीर की मांसलता नष्ट होती है। जीवनयापन मुश्किल हो जाता है। नदी, तालाब और कुंओं से जल प्राप्त किया जाता है। नदियों के जल को अधिक गुणकारी माना जाता था, लेकिन महानगरों में नालों का दूषित जल नदी में डालने से नदी का जल दूषित हो जाता है। नदी के जल में कल-कारखानों का कूडा-करकट डालने से जल अधिक विषैला हो जाता है। ऐसे जल के सेवन से विभिन्न रोगों की उत्पत्ति होती है। महानगरों में नदियों का जल उपकरणों द्वारा शुद्ध करके वितरित किया जाता है। प्रतिदिन वयस्क स्त्री-पुरुषों को 15-16 गिलास जल अवश्य पीना चाहिए । ग्रीष्म ऋतु में अधिक जल की आवश्यकता होती है।

नदी, तालाबों, कुंओं के अतिरिक्त वर्षा से भी जल प्राप्त होता है। वर्षा के जल को एकत्र कर शुद्ध किया जाता है। विभिन्न फल-सब्जियों में भी जल की विशेष मात्रा होती है। अनार में 78, अंगूर में 85.5, संतरे में 87.8, मौसमी में 84.6, नाशपाती में 73.6, पपीते में 89.6, अनन्नास में 86.5, खूबानी में 85.3, अंजीर में 80.8, बेल में 84.00, आंवले में 81.2, खीरे में 95, ककड्डी में 96.4, तरबूज में 95.6, टमाटर में 94.3, गाजर में 86.00, मूली में 94.4, गोभी में 90.2, पालक में 91.7, बथुआ में 70, मेथी में 81.8, चुकंदर में 83.8, प्रति शत जल की मात्रा होती है। 100 ग्राम सिंघाडों में 50 ग्राम जल की मात्रा होती है। गर्भावस्था में स्त्रियों को सिंघाडे खाने से कैल्शियम, लौह, फॉस्फोरस भी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होता है।

गन्ने का रस पीने से स्नायुओं की क्षीणता नष्ट होती है। गन्ने के रस में उपलब्ध लौह तत्त्व रक्ताल्पता (एनीमिया) में शरीर को बहुत लाभ पहुंचाते हैं। मूत्र का अवरोध भी नष्ट होता है।

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