यकृत वृद्धि । जिगर । लीवर का बढ़ना का घरेलू उपचार

Home remedy for Hepatomegaly, Enlarged Liver or Fatty Liver In Hindi

किशोरावस्था में प्रकृति विरुद्ध आहार सेवन करने से यकृत (जिगर) पर हानिकारक प्रभाव पड़ने से यकृत वृद्धि होती है। यकृत वृद्धि से रोगी को बहुत हानि होती है। शरीर में रक्त का निर्माण नहीं होता है और रोगी प्रतिदिन निर्बल हो जाता है। यकृत वृद्धि रोगी के लिए प्राण घातक हो सकती है।

Why does Hepatomegaly happens?

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लीवर क्यों बढ़ता है?

उत्पत्ति : अनियमित समय पर भोजन करने, भोजन में गरिष्ठ व उष्ण मिर्च-मसालों व अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से पाचन क्रिया विकृत होने पर यकृत विकृति होती है। हर समय कुछ-न-कुछ खाते रहने की बुरी आदत यकृत को बहुत हानि पहुंचाती है।

अधिक शराब पीने वाले स्त्री-पुरुषों का यकृत भी अधिक विकृत होता है। दूषित जल पीने व दूषित भोजन करने से अधिक यकृत विकृति होती है। घी, तेल आदि से बने खाद्य पदार्थ पाचन क्रिया को विकृत करके यकृत में शोथ की उत्पत्ति करते हैं।

अधिक उष्ण व अम्लीय खाद्य पदार्थों के सेवन से यकृत को बहुत हानि पहुंचती है और यकृत में शोथ की उत्पत्ति होती है। कुछ संक्रामक रोगों के कारण यकृत वृद्धि होती है। मलेरिया रोग में यकृत को हानि होती है। मलेरिया रोग में रक्त दूषित होने से यकृत विकृति होती है। आंत्रिक ज्वर में यकृत वृद्धि अधिक होती है।

Symptoms of Enlarged Liver?

लीवर बढ़ने के लक्षण क्या है ?

लक्षण : यकृत में शोथ होने से यकृत को दबाकर देखने पर पीड़ा होती है। यकृत वृद्धि में चिकित्सा में विलम्ब होने व भोजन में बदपरहेजी करने से यकृत को अधिक हानि पहुंचती है और प्राण घातक स्थिति बन जाती है। यकृत वृद्धि में रोगी हल्के ज्वर से पीड़ित रहता है। यकृत वृद्धि के चलते रोगी को कभी कोष्ठबद्धता होती है तो कभी अतिसार । रोगी अजीर्ण रोग से पीड़ित होता है। वमन विकृति भी हो सकती है। यकृत की विकृति पीलिया रोग की उत्पत्ति भी कर देती है। यकृत वृद्धि से पीड़ित रोगियों में प्लीहा वृद्धि भी होती है। अर्श रोग व जलोदर की उत्पत्ति भी यकृत वृद्धि के कारण हो सकती है।

यकृत वृद्धि से पीड़ित रोगी शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाता है। उसकी पाचन शक्ति बहुत क्षीण हो जाती है। कुछ रोगी उदर शूल से अधिक पीड़ित होते है।

What to eat on Fatty Liver?

लीवर बढ़ने पे क्या खाएं?

  • यकृत वृद्धि में रोगी को सेब व उसका रस पिला सकते हैं।
  • जामुन के कोमल पत्तों का अर्क 5 ग्राम मात्रा में 4-5 दिन तक सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
  • यकृत वृद्धि में गोमूत्र कपड़े द्वारा दो बार छानकर 20-20 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम पीने से बहुत लाभ होता है।
  • मूली और मकोय का 20-20 ग्राम रस मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  • हरी मकोय का अर्क, गुलाब के फूल 20 ग्राम और अमलतास का गूदा 20 ग्राम, सभी को एक साथ पीसकर यकृत के ऊपर लेप करने से लाभ होता है।
  • मकोय का रस 30 ग्राम मात्रा में लेकर, हल्का गर्म करके यकृत पर लेप करें।
  • भांगरे के 10 ग्राम रस में अजवाइन का 2 ग्राम चूर्ण मिलाकर सेवन करने से यकृत वृद्धि नष्ट होती है।
  • रोगी को अनार, जामुन, लीची आदि फल खिलाएं।
  • पपीता खाने से यकृत वृद्धि में बहुत लाभ होता है।
  • सोंठ, धनिया व काला नमक को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 2-2 ग्राम चूर्ण दिन में दो-तीन बार सेवन कराएं।
  • यकृत वृद्धि में तक्र (मट्ठे) के सेवन से बहुत लाभ होता है, लेकिन तक्र से घी की चिकनाई निकाल लेनी चाहिए।
  • घीया, तोरई, बथुए आदि की सब्जी खिलाएं, लेकिन सब्जी में घी, मक्खन, तेल और मिर्च का नहीं लगाएं।
  • पीपल के 3 ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर दिन में दो बार सेवन कराएं।
  • यकृत वृद्धि के रोगी को गाजर खाने व रस पीने से लाभ होता है।
  • यकृत वृद्धि में 25 ग्राम करेले का रस जल मिलाकर पिलाएं।
  • नारियल का जल पीने से यकृत वृद्धि में लाभ होता है।

What to not eat on Fatty Liver?

लीवर बढ़ने पे क्या नहीं खाएं?

  • यकृत वृद्धि में उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न कराएं।
  • घी, तेल, मक्खन, अंडे, मांस, मछली का सेवन न करें।
  • गरिष्ठ खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।
  • अरबी, कचालू, उड़द की दाल, मिठाई, खोए का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी और शराब का सेवन न करें।
  • रोगी को बाजार के चटपटे व्यंजनों, छोले-भटूरे, गोल-गप्पें, आलू की टिकिया, समोसे आदि नहीं खाने चाहिए।
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