अर्श रोग । बवासीर का घरेलू नुस्खे

Home remedy for Hemorrhoids or Piles In Hindi

अधिक समय तक कोष्ठबद्धता (कब्ज) की विकृति बनी रहे तो पुरीष (मल) अधिक शुष्क और कठोर हो जाता है। जब शुष्क और कठोर मल को जोर लगाकर निष्कासित करते हैं तो गुदा नली में छिल जाने से जख्म बन जाते हैं। मल द्वार के भीतर और बाहर मांसांकुर (मस्से) बन जाते हैं। मांसांकुर बनने की इस विकृति को अर्श रोग (बवासीर) कहा जाता है।

Why does Piles happens?

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बवासीर क्यों होता है?

उत्पत्ति : अर्श रोग की उत्पत्ति पाचन क्रिया की विकृति के कारण होती है। जब भोजन अनियमित रूप से किया जाता है, भोजन में अधिक उष्ण मिर्च-मसालों और अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है, अधिक चाउमीन और फास्ट फूड का सेवन करते हैं तो वसा (चिकनाई) के अभाव में मल शुष्क और कठोर होने लगता है। शुष्क मल से रगड़ खाकर भीतर की कोमल त्वचा छिल जाती है और व्रण (जख्म) बन जाते हैं। मल द्वार पर मांसांकुर बन जाते हैं। शौच के समय जोर लगाने पर मांसांकुर से रक्तस्राव होने लगता है।

कोष्ठबद्धता के अतिरिक्त दूसरे अनेक कारणों से भी अर्श रोग की उत्पत्ति होती है। अधिक समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने, मांस, मछली, अंडे खाने, छोले-भटूरे, चाट-पकौड़ी, गोल-गप्पें खाने, अधिक धूम्रपान व शराब पीने, रात्रि में अधिक जागने, अधिक घुड़सवारी, ऊंट पर लम्बी यात्रा करने से भी अर्श रोग की विकृति होती है। शारीरिक रूप से अधिक स्थूल (मोटे) होने पर भी स्त्री-पुरुष अर्श रोग के शिकार होते हैं। यकृत (जिगर) की विकृति भी अर्श रोग से पीड़ित कर सकती है।

What are Symptoms of Hemorrhoids?

बवासीर के लक्षण क्या है ?

लक्षण : अर्श रोग की चिकित्सा में विलम्ब करने से अधिक रक्तस्राव होने से रोगी शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है। अर्श रोग से पीड़ित स्त्री-पुरुष अधिक रक्तस्राव होने के कारण रक्ताल्पता के शिकार होते हैं। मांसांकुरों में शोथ (सूजन) होने से रोगी को कुर्सी व सोफे पर बैठने में बहुत पीड़ा होती है।

रोगी बस व स्कूटर पर यात्रा नहीं कर पाता। पीड़ा के कारण रात को नींद नहीं आती | शरीर में रक्त की कमी से सिर में चक्कर आते हैं। नेत्रों के आगे बार-बार अंधेरा छा जाता है। कोष्ठबद्धता के कारण शौच के समय अर्श रोगी को बहुत पीड़ा होती है।

What to eat on Piles ?

बवासीर होने पे क्या खाएं?

  • तक्र (मट्ठे) में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • कोष्ठबद्धता के कारण अर्श रोग की अधिक उत्पत्ति होती है, इसलिए रोगी कोष्ठबद्धता नष्ट करने के लिए त्रिफला चूर्ण हल्के गर्म जल से रात्रि के समय सेवन करें।
  • हरी सब्जियां पालक, बथुआ, मेथी, सरसों व चौलाई का खूब सेवन करें।
  • भोजन के साथ सुबह-शाम सलाद का सेवन करें।
  • करेले के पत्तों के 20 ग्राम रस में मिसरी मिलाकर एक सप्ताह तक सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 ग्राम रस मिलाकर पिएं।
  • छोटी पीपल का 3-4 ग्राम चूर्ण मधु मिलाकर चाटने से अर्श रोग नष्ट होता है।
  • बड़ी इलायची को भूनकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 3 ग्राम चूर्ण प्रातःकाल जल के साथ सेवन करें।
  • अजवाइन के 3 ग्राम चूर्ण में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर तक्र (मट्ठे) के साथ सेवन करने से कोष्ठबद्धता के साथ अर्श रोग नष्ट होता है।
  • आंवले, गाजर या हरड़ का मुरब्बा खाकर दूध पीने से बहुत लाभ होता है।
  • भोजन के बाद गुड और हरड़ का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन खाने से अर्श रोग नष्ट होता है।
  • धनिए के 5 ग्राम रस में मिसरी मिलाकर सेवन करने से अर्श रोग में रक्तस्राव बंद होता है।
  • नीम की पकी निबौरियों को छाया में सुखाकर, चूर्ण बनाकर रखें। 3 से 5 ग्राम चूर्ण प्रातःकाल जल के साथ सेवन करने से अर्श रोग में बहुत लाभ होता है।
  • मूली के 20 ग्राम रस में 5 ग्राम घी मिलाकर प्रातःकाल सेवन करें।
  • अशोक वृक्ष की छाल और फूलों को रात को जल में डालकर रखें। प्रातः उठकर थोड़ा-सा मसलकर, छानकर पीने से बहुत लाभ होता है।

What to not eat on Hemorrhoids?

बवासीर होने पे क्या नहीं खाएं?

  • उड़द की दाल व पिष्ठी से बने व्यंजनों का सेवन न करें।
  • मैदे से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें। ‘
  • उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों के खाद्य पदार्थों से अर्श रोगी को अधिक हानि होती है।
  • ऊंट, साइकिल, स्कूटर पर लम्बी यात्रा न करें।
  • दूषित व बासी भोजन न करें।
  • बाजार में चाट-पकौड़ी, छोले-भटूरे, गोल-गप्पें, समोसे आदि न खाएं।
  • चाइनीज व फास्ट फूड न खाएं।
  • आलू, बैंगन, अरबी, फूलगोभी व कचालू का सेवन न करें।
  • मांस-मछली व अंडे का सेवन न करें।
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