अतिसार | संग्रहणी | जुलाब का आयुर्वेदिक उपचार

Home remedy for Diarrhea.

पाचन क्रिया की विकृति से उदर के अनेक रोगों की उत्पत्ति होती है। उनमें से एक रोग अतिसार भी है। अतिसार में रोगी को बार-बार पतले दस्त होते हैं। अधिक दस्त होने से रोगी शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाता है। इस रोग की चिकित्सा में विलम्ब और भोजन में लापरवाही करने से रोगी अधिक निर्बल होकर बिस्तर पर लेट जाता है।

Why does Diarrhea happens?

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उत्पत्ति : दूषित जल और दूषित बासी भोजन करने से पाचन क्रिया विकृत होने से अतिसार की उत्पत्ति होती है। कुछ स्त्री-पुरुष वसा युक्त (घी, मक्खन, दूध आदि) खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं। इन खाद्य पदार्थों का पाचन न होने से अतिसार की उत्पत्ति होती है।

वर्षा ऋतु में नदी, तालाब और कुँओं का जल दूषित हो जाता है। नगरों में नदियों व जलाशयों का जल शुद्ध करके नलों द्वारा घरों तक पहुंचाया जाता है। वर्षा के कारण नदियों में बाए आने से उस जल में अधिक दूषित तत्त्व मिल जाते हैं। शुद्ध करने पर भी नदियों का जल पूरी तरह शुद्ध नहीं हो पाता। ऐसे दूषित जल को पीने से अतिसार रोग होता है। बाजार व घरों में खुले रखे फल, सब्जी व दूसरे खाद्य पदार्थों के सेवन से अतिसार होता है। भोजन में प्रकृति विरुद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी अतिसार होता है। संक्रामक रोगों के कारण पाचन क्रिया क्षीण होने पर अतिसार की अधिक विकृति होती है। आंतरिक ज्वर और मलेरिया में अतिसार की अधिक उत्पत्ति होती है। आंत्रशोथ में भी अतिसार की उत्पत्ति होती है। यकृत विकृति से भी अतिसार की विकृति होती है।

Symptoms of Diarrhea?

लक्षण : अतिसार में रोगी को पतले दस्त लगते हैं। रोगी के पेट में हल्का-सा शूल होता है और फिर जोर से मल का निष्कासन होता है। मल पानी जैसा पतला होता है। रोगी मल का त्याग करके तुरंत लौट आता है। कुछ देर के बाद रोगी को फिर शौच के लिए जाना पड़ता है। बार-बार शौच के लिए जाने से रोगी के शरीर में जल का अभाव हो जाता है।

कुछ भी खाने-पीने पर रोगी को शौच के लिए दौड़ना पड़ता है। ऐसी स्थिति में रोगी बहुत कमजोर हो जाता है। यदि चिकित्सा में अधिक विलम्ब किया जाए तो रोगी का बिस्तर से उठना तक मुश्किल हो जाता है। जल के अभाव के कारण रोगी को बहुत प्यास लगती है। रोगी का मुंह, जीभ, गला आदि शुष्क हो जाते हैं। होंठ भी शुष्क दिखाई देते हैं। अतिसार में जलशोष अर्थात डिहाइड्रेशन के कारण रोगी मृत्यु के कगार पर पहुंच जाता है।

What to eat on Diarrhea?

क्या खाएं?

  • बेलगिरी को सौंफ के अर्क में पीसकर खाएं। बच्चों के हरे-पीले अतिसार बंद होंगे।
  • अनार के छिलकों को जल में उबालकर क्वाथ बनाकर पीने से अतिसार बंद होता है।
  • आधी भुनी हुई सौंफ और आधी कच्ची सौंफ, दोनों को पीसकर जल के साथ सेवन करें।
  • आम और जामुन के कोमल पत्तों का रस मिलाकर सेवन करें।
  • मीठे आम का रस, अदरक का रस दही में मिलाकर सेवन करें।
  • चावल के मांड को दही या तक्र (मट्ठे) में मिलाकर सेवन करें।
  • आम की गुठली के भीतर का भाग, जामुन की गुठली और भुनी हुई हरड़ सभी चीजें बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, 3 ग्राम चूर्ण जल के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करें।
  • बेलगिरी का गूदा और गुड मिलाकर जल के साथ सेवन करने से अतिसार बंद होते हैं।
  • आंवले का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करें। अतिसार बंद होते हैं।
  • झर बेरी के कोमल पत्तों का रस 1-3 ग्राम की मात्रा में दिन में कई बार पीने से अतिसार बंद होता है।
  • छोटे बच्चों को अतिसार होने पर ओ.आर.एस. का घोल बनाकर 10-15 मिनट के अंतराल से पिलाएं।
  • दही में केला पीसकर, मिलाकर खिलाने से बहुत लाभ होता है।
  • रोगी को खिचड़ी व दही मिलाकर खिलाएं।

What to not eat on Diarrhea?

क्या न खाएं?

  • घी, तेल, मक्खन से बनी चीजें बिल्कुल न खाएं। _
  • चाय, कॉफी व शराब का भूलकर भी सेवन न करें।
  • आलू, बैंगन, अरबी, कचालू आदि का सेवन न करें।
  • उष्ण मिर्च-मसालों व अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। ७ दूषित भोजन और दूषित जल का सेवन न करें।

 

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