भगंदर का घरेलू उपचार

Home remedy for Anal fistula In Hindi

भगंदर बहुत कष्टदायक रोग है। भगंदर से पीड़ित रोगी न बिस्तर पर पीठ के बल लेट सकता है और न कुर्सी पर बैठकर कोई काम कर सकता है। सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में भी रोगी को बहुत पीड़ा होती है।

Why does Anal fistula happens?

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भगंदर क्यों होता है?

उत्पत्ति : भगंदर रोग में मल द्वार के ऊपर की ओर व्रण (पिड़िकाएं ) बनते हैं। व्रण त्वचा में काफी गहरे हो जाते हैं। नासूर की तरह व्रण से रक्त मिश्रित पूयस्राव होता है। लम्बे समय तक भगंदर रोग नष्ट नहीं होता। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अधिक समय तक उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से रक्त दूषित होने पर भगंदर रोग की उत्पत्ति होती है।

शौच के बाद स्वच्छ जल से मल द्वार के आस-पास स्वच्छ नहीं करने से भी गंदगी के कारण व्रण की विकृति होती है। अधिक समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले इस रोग से अधिक पीड़ित होते हैं। साइकिल पर लम्बी दूरी तक यात्रा करने वाले, साइकिल पर अधिक सामान ढोने वाले, ऊंट, घोड़े की अधिक सवारी करने वाले भंगदर रोग से पीड़ित होते हैं।

What are Symptoms of Anal fistula?

भगंदर के लक्षण क्या है ?

लक्षण : भगंदर रोग में व्रण बहुत गहरे हो जाते हैं। कई बार व्रण के अधिक गहरे हो जाने से मल भी उनसे लगता है। ऐसे में कोष्ठबद्धता हो जाने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है। भगंदर से हर समय रक्त मिश्रित पूयस्राव होने से कपड़े खराब होते हैं। रोगी को चलने-फिरने में भी बहुत कठिनाई होती है। भगंदर रोग में सूक्ष्म कीटाणु भी उत्पन्न होते हैं।

What to eat on Anal fistula?

भगंदर होने पे क्या खाएं?

  • 25 ग्राम अनार के ताजे, कोमल पत्ते 300 ग्राम जल में देर तक उबालें। जब आधा जल शेष रह जाए तो उस जल को छानकर भगंदर को धोने से बहुत लाभ होता है।
  • नीम के पत्तों को जल में उबालकर, छानकर भगंदर को दिन में दो बार अवश्य साफ करें।
  • काली मिर्च और खदिर (लाजवंती) को जल के छीटे मारकर पीसकर भगंदर पर लेप करें।
  • लहसुन को पीसकर, घी में भूनकर भगंदर पर बांधने से जीवाणु नष्ट होते हैं।
  • नीम की पत्तियों को पीसकर भगंदर पर लेप करने से बहुत लाभ होता है।
  • आक के दूध में रुई भिगोकर सुखाकर रखें । इस रुई को सरसों के तेल के साथ भिगोकर काजल बनाएं। काजल मिट्टी के पात्र पर बनाएं। इस काजल को भगंदर पर लगाने से बहुत लाभ होता है।
  • आक का दूध और हल्दी मिलाकर उसको पीसकर शुष्क होने पर बत्ती बना लें। इस बत्ती को भगंदर के व्रण पर लगाने से बहुत लाभ होता है।
  • हल्दी, आंवलों का रस और दंती की जड़, सभी बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लेप करें।
  • चमेली के पत्ते, गिलोय, सोंठ और सेंधा नमक को कूट-पीसकर तक्र (मट्ठा) मिलाकर भगंदर पर लेप करें।
  • अग्निमंथ (छोटी अरणी) की जड़ को जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। इस क्वाथ को छानकर मधु मिलाकर सुबह-शाम पीने से बहुत जल्दी भगंदर रोग नष्ट होता है।
  • कोष्ठबद्धता के कारण भगंदर रोग तेजी से फैलता है। कोष्ठबद्धता को जल्दी से नष्ट करें।
  • त्रिफला का 5 ग्राम चूर्ण रात्रि के समय हल्के गर्म जल के साथ सेवन करें। कोष्ठबद्धता शीघ्र नष्ट होती है।

What to not eat on Anal fistula?

भगंदर होने पे क्या नहीं खाएं?

  • उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से निर्मित खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • घी, तेल से बने पकवानों का सेवन न करें।
  • ऊंट, घोड़े व स्कूटर, साइकिल पर यात्रा न करें।
  • अधिक समय कुर्सी पर बैठकर काम न करें।
  • दूषित जल से स्नान न करें।
  • शौच के बाद नदी, तालाब व नालों के जल से मल द्वार को साफ न करें।
  • भगंदर रोग के चलते सहवास से अलग रहें।
  • बाजार के चटपटे, स्वादिष्ट छोले-भटूरे, समोसे, कचौरी, चाट-पकौड़ी आदि का सेवन न करें।
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