जुलाब । संग्रहणी का घरेलू इलाज

जुलाब । संग्रहणी – Sprue


What is the cause of Sprue?

Loading...

जुलाब होने का कारण क्या है।

अतिसार या अजीर्ण की चिकित्सा न करने पर संग्रहणी रोग उत्पन्न होता है, जिसमें रोगी की अग्नि अत्यधिक मंद हो जाती है। समय पर और हलका किया हुआ भोजन भी रोगी पच ,नहीं पाता है।

What are symptoms of Sprue?

संग्रहणी के लक्षण क्या है।

रोगी कभी पतला और कभी सख्त मल विसर्जित करता है। पेट में भारीपन, गैस बनना, पेट में दर्द, भार एवं शक्ति का कम होते जाना, अवसाद, त्वचा में रूखापन आदि लक्षण रोगी में मिलते हैं।

Home Remedies for Sprue.

जुलाब का घरेलू चिकित्सा।

  • सोंठ का चूर्ण आधी चम्मच की मात्रा में गर्म पानी के साथ सुबह-शाम लें।
  • चावलों में चांगेरी के पत्तों का रस डालकर उबालें । इसे तीन चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार लें।
  • काली मिर्च, काला नमक और चित्रक की जड समान भाग लेकर कूटें और छान कर रखें । इसे आधा-आधा चम्मच छाछ के साथ दिन में तीन बार दें ।
  • सोंठ, मिर्च, पिप्पली, दालचीनी, इलायची और तेजपात सभी एक-एक भाग तथा अनारदाना दो भाग लेकर चूर्ण बना लें। इन सबके वजन के बराबर शकर मिला दें। 1 से 3 ग्राम की मात्रा में मट्ठे के साथ सेवन करें।
  • आम, जामुन और अम्बाड़ा की बराबर मात्रा में ली हुई 200 ग्रा. छाल को 16 गुना पानी में उबालें । आधा पानी शेष रह जाने पर उतार कर छान लें और इसमें पाव भर चावल डालकर पकाएं । खिचड़ी जैसी गाढ़ी हो जाने पर आंच पर से उतार लें और इसे ग्रहणी के रोगी को सुबह-शाम खाने को दें। सप्ताह भर में ही रोग से मुक्ति हो जाएगी।
  • सूखे हुए आंवले को रात भर भिगोकर रखें या कच्चा आंवला लें। बराबर मात्रा में काला नमक डालकर बारीक पीसें । आधा-आधा ग्राम की गोली बनाकर छाया में सुखाएं व एक-एक गोली दिन में दो बार भोजन के बाद लें।
  • गाय के दूध से बना छाछ ग्रहणी के रोगी के लिए सर्वोत्तम है। पहले दिन-चार बार में आधे से एक लीटर की मात्रा में छाछ रोगी को दें। इसमें स्वाद के अनुसार काली मिर्च व काला नमक मिला लें। छाछ की मात्रा रोज बढ़ाते जाएं और 20 से 25 लीटर तक ले जाएं । शुरू में पानी और हलका भोजन दें, जिसकी मात्रा घटती जाती है: और सप्ताह भर बाद केवल छाछ ही दें। बीस दिन के बाद छाछ की मात्रा कम करते जाएं और हलका भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में देना शुरू कर दें।

Ayurvedic Medicine for Sprue.

संग्रहणी का आयुर्वेदिक औषधियां द्वारा इलाज।

अंकोठमूल चूर्ण, चूर्ण, चित्रकमूल चूर्ण, वृहत्गंगाधर चूर्ण, दाड़िमाष्टक चूर्ण, कपित्थाष्टक चूर्ण, हिंग्वाष्टक चूर्ण, जातीफलादि चूर्ण, नृपति वल्लभ रस, पीयूषवल्ली रस, महागन्धक योग, पंचामृत पर्पटी, रस पर्पटी, स्वर्ण पर्पटी ।

Other medicine available in stores by various manufacturers for Sprue.

जुलाब का पेटेंट औषधियां द्वारा इलाज।

जीमनैट सीरप व गोलियां (एमिल), गारलिल गोलियां (चरक), डर्मोनेट कैप्सूल (डाबर) इस रोग की चिकित्सा में उपयोगी पाए गए हैं।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept