बवासीर का घरेलू इलाज

अर्श व बवासीर – Piles & Hemorrhoids


What is the cause of Piles?

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बवासीर होने का कारण क्या है।

मल द्वार के अंदर या बाहर जब रक्त आने वाली शिराओं का कोई गुच्छा फूल जाए, तो चारों ओर की श्लेष्मकला और मांस के साथ उभार के रूप में त्वचा से बाहर निकल आता है। यही उभार अर्श कहलाता है और यह रोग बवासीर। यह अर्श यदि मल द्वार के बाहर हो, तो बाह्य और मल द्वार के अंदर हो, तो आंतरिक कहलाता है। यदि अर्श में से खून निकलता हो, तो इसे खूनी बवासीर कहते हैं।

What are symptoms of Hemorrhoids?

बवासीर के लक्षण क्या है।

मल त्याग के समय इन मस्सों में काफी दर्द होता है। यदि खूनी बवासीर है, तो मल त्याग के समय इन मस्सों में से दर्द के साथ खून भी निकलता है।

विशेष :

  1. यदि किसी हृदय रोगी या उच्च रक्त चाप वाले रोगी को खूनी बवासीर आती हो, तो उसकी लाक्षणिक चिकित्सा ही करें, खून को बिलकुल न_ रोकें, क्योंकि इन रोगियों में बवासीर के ये मस्से सुरक्षा कवच का कार्य करते हैं। यदि मस्सों में से खून निकलना बंद कर दिया जाए, तो रोगी को हार्ट-अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है।
  2. मल त्याग के समय बाएं पैर पर जोर डालकर बैठें ।

Home Remedies for Piles.

बवासीर का घरेलू चिकित्सा।

  • कलमी शोरा और रसौंत बराबर मात्रा में लेकर मूली के रस में घोट लें। मटर के दाने के बराबर की गोलियां बनाकर सुखा लें। चार-चार गोली सुबह-शाम पानी के साथ दें।
  • रीठे का छिलका कूट कर तवे पर इतना भूनें कि वह जल कर कोयला बन जाए। इसमें समान मात्रा में कत्था मिलाकर पीसकर रख लें। यह दवा 100 मिली ग्राम की मात्रा में एक चम्मच मलाई या मक्खन के साथ सुबह-शाम दें।
  • दो सूखे हुए अंजीर 19 घंटे तक पानी में भिगोकर सुबह-शाम लें।
  • सूखे नारियल की जटा को जलाकर राख कर लें, पीसकर छान लें और आधा-आधा चम्मच 1 गिलास मट्ठे के साथ दिन में तीन बार लें।
  • फुलाई हुई फिटकरी एक ग्राम की मात्रा में लेकर दही की मलाई के साथ सुबह-शाम लें।
  • जिमीकंद 150 ग्राम, काली मिर्च और हलदी 3-3 ग्राम व बड़ी इलायची के बीज 1 ग्राम । सब को कूटकर शीशी में रख लें। आधा-आधा चम्मच की मात्रा में उबाल कर ठंडा किए हुए पानी से दिन में तीन बार लें।
  • जिमीकंद को भूनकर भुर्ता बना लें व घी या तेल में तलकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम एक माह तक प्रयोग करें।
  • इमली के बीज का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम गाय के दूध से लें।
  • सत्यानाशी या इंद्रायण की जड पानी में पीसकर मस्सों पर लगाएं।
  • खट्टे सेब का रस मस्सों पर लगाएं।
  • हर रोज सुबह खाली पेट अमरूद खाएं।
  • नीम की छाल का एक चम्मच चूर्ण गुड से सुबह-शाम लें।
  • रोगी को खाली पेट एक पाव आलू बुखारे खिलाएं।
  • दिन में तीन-चार बार पके हुए पपीते पर काला नमक व काली मिर्च डालकर खिलाएं।
  • सुबह खाली पेट मूली व मूली के छिलकों पर काला नमक व काली मिर्च डाल कर लें।
  • मस्सों पर घिया के पत्तों को पीसकर लेप करें।
  • अरहर व नीम की पत्तियां मिलाकर पीसें और मस्सों पर लगाएं।
  • मलत्याग के बाद गुदा को पानी से साफ करें और स्वमूत्र लगाएं।

Ayurvedic Medicine for Hemorrhoids.

बवासीर का आयुर्वेदिक औषधियां द्वारा इलाज।

चित्रकमूल चूर्ण, यवानीफल चूर्ण, विजयाचूर्ण, अर्शकुठार रस, नित्योदित रस, चंद्रप्रभावटी।

बाह्य प्रयोग हेतु काशीशादि तेल भी प्रयोग किया जा सकता है।

Other medicine available in stores by various manufacturers for Piles.

बवासीर का पेटेंट औषधियां द्वारा इलाज।

पाइलेक्ट गोलियां (एमिल), गोलियां व मलहम (चरक), पायराइड गोलियां (वैद्यनाथ), पाइलैक्स गोलियां (हिमालय), पाइलैम कैप्सूल (माहेश्वरी), अर्शोंना वटी (संजीवन)।

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