आन्त्र कृमि का घरेलू इलाज

आन्त्र कृमि – Intestinal Worms


What is the cause of Intestinal Worms?

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आन्त्र कृमि होने का कारण क्या है।

दूषित जल या भोजन का सेवन करने से पेट में कीड़े हो जाते हैं। ककड़ी, खीरा, टमाटर, मूली आदि जो कच्ची ही खाई जाती हैं और पेट के लिए बहुत उपयोगी हैं, यदि गंदे नाले के पानी (जिसमें मल-मूत्र का विसर्जन होता है) में उगाई गई हों, तो शरीर के लिए लाभदायक ये सब्जियां भी कीड़ों की वाहक बन जाती हैं, क्योंकि इनमें कीड़ों के अंडे आ जाते हैं। मांस भी यदि भलीभांति पकाया न गया हो, तो पेट में कीड़ों का कारण बनता है।

What are symptoms of Intestinal Worms?

आन्त्र कृमि के लक्षण क्या है।

पेट में दर्द, कब्ज की शिकायत, भूख अधिक लगना (बड़े कीड़ों के कारण) या भूख कम लगना (छोटे कीड़ों के कारण) ।

Home Remedies for Intestinal Worms.

आन्त्र कृमि का घरेलू चिकित्सा।

  • सुबह खाली पेट एक गिलास गाजर का रस पीने से दस-पंद्रह दिन में पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • मुनक्का के बीज निकाल कर उसमें कच्चे लहसुन के टुकड़े लपेट कर दिन में तीन बार एक सप्ताह तक लें।
  • आधा पाव टमाटर के रस में पांच-सात पुदीने की पिसी हुई पत्तियां, आधा नीबू का रस, चुटकी भर काली मिर्च व काला नमक डालकर सुबह खाली पेट लें।
  • अजवायन चार भाग व काला नमक एक भाग का चूर्ण बनाकर डेढ से दो ग्राम की मात्रा में रात में गर्म पानी के साथ सेवन करें।
  • 1 करेले का रस शकर मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • सुबह खाली पेट 50 ग्राम गुड खाएं । पंद्रह मिनट बाद 2 ग्राम अजवायन का चूर्ण बासी पानी के साथ लें।
  • नीम की दस पत्तियों का रस शहद मिलाकर सुबह खाली पेट दें।
  • बथुए के 4 चम्मच रस में थोड़ा सेंधानमक डालकर खाली पेट लें।
  • तुलसी के पत्तों का १ चम्मच रस चुटकी भर काली मिर्च डालकर खाली पेट लें।
  • नारियल की जटा को पानी में उबालें । यह गुनगुना पानी खाली पेट पिएं ।
  • आम की गुठली सुखाकर पीस लें। इसमें बराबर मात्रा में मेथी के दानों का चूर्ण मिलाकर 1 चम्मच सुबह-शाम छाछ के साथ लें।
  • आधा चम्मच कलौंजी के बीज १ चम्मच पिसे हुए चावलों के साथ रात को सोते हुए लें।
  • रात को सोते समय दो सेब छिलके सहित खाएं ।
  • कच्चे पपीते में विद्यमान पापेन नामक एन्जाइम, पपीते के बीजों में विद्यमान कैरिसिन नामक तत्व व पपीते की पत्तियों में विद्यमान कारपेन नामक तत्त्व पेट के कीड़ों को समाप्त करने में समर्थ होते हैं। अतः इनका उपयोग पेट के कीड़े (गोल कृमि) निकालने हेतु किया जा सकता है।
  • कच्चे पपीते का 4 चम्मच रस बराबर मात्रा में शहद के साथ ‘एक गिलास गर्म पानी के साथ लें। दो-तीन घंटे बाद 20-30 मि.ली. एरंड का तेल गर्म दूध के साथ लें। इसका प्रयोग लगातार तीन दिन तक करें।
  • पपीते की पत्तियों का रस या पपीते के बीज चार चम्मच की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर रात को दें।
  • अनार की जड़ और तने की छाल में विद्यमान तत्व प्युनिसिन पेट के कीड़ों, खासकर फीताकृमियों के निकालने में काफी प्रभावी पाया गया है। यह तत्त्व तने की अपेक्षा जड की छाल में अधिक मात्रा में होता है। १0-30 ग्राम छाल पाव भर पानी में उबालें। आधा रह जाने पर उतार कर ठंडा कर लें व रोगी को पिलाएं। एक-एक घंटे के अंतर से इसकी तीन खुराक दें। अंतिम खुराक के 2-3 घंटे बाद 20-50 मिली. एरंड का तेल एक गिलास गर्म दूध के साथ दें।

Ayurvedic Medicine for Intestinal Worms.

आन्त्र कृमि का आयुर्वेदिक औषधियां द्वारा इलाज।

काम्पिल्लक फल रज चूर्ण, पलाशबीज चूर्ण, शिग्रु बीज चूर्ण, सोमराज्ययादि चूर्ण, विडंगादिचूर्ण, कृमिकुठार रस, कृमि मुद्गर रस, विडंगारिष्ट ।

Other medicine available in stores by various manufacturers for Intestinal Worms.

आन्त्र कृमि का पेटेंट औषधियां द्वारा इलाज।

त्रिफलाद्यचूर्ण (धूतपापेश्वर), कृमिधातिनीवटिका (झंडु), कृमिनोल सीरप व गोलियां (संजीवन), क्रुम्निल गोलियां (चरक), वोरमेम सीरप व गोलियां (माहेश्वरी) व कृमिघन वटिका (नागार्जुन-केरल) कृमि रोग में प्रभावकारी हैं।

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