नपुंसकता का घरेलू इलाज

नपुंसकता – Impotence

नपुंसकता एक मनोदैहिक रोग है। वास्तव में नपुंसकता के अंतर्गत दो विभिन्न रोगों का ग्रहण किया जाता है। पहला—वीर्य में शुक्राणुओं की कमी या पूर्णतः अभाव, जिसके चलते पुरुष सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ होता है, भले ही वह यौन क्रिया में अपनी सहचरी को पूर्ण रूप से संतुष्ट करने में सक्षम हो। दूसरा—किसी शारीरिक या मानसिक कारण के चलते जब पुरुष यौन क्रिया में अपनी सहचरी को संतुष्ट नहीं कर पाए। इस स्थिति में पुरुष यौनांग मैं या तो उत्तेजना आती ही नहीं है और आती भी है, तो शीघ्र समाप्त हो जाती है। पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या का पर्याप्त या अपर्याप्त होना इस स्थिति में गौण है। अधिकांश मामलों में दोनों स्थितियां साथ-साथ होती हैं और एक रोग की चिकित्सा में प्रयुक्त की जाने वाली अधिकांश औषधियां दूसरे रोग की चिकित्सा में भी सहायक होती हैं। संभवतः इसी कारण से शास्त्रों में दोनों रोगों का वर्णन पृथक रूप से नहीं मिलता है।

What is the cause of Impotence?

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नपुंसकता होने का कारण क्या है।

नपुंसकता का कारण शारीरिक भी हो सकता है और मानसिक भी। अफीम, चरस, शराब, हेरोइन, स्मैक आदि नशीले पदार्थों का सेवन किशोरावस्था में हस्तमैथुन, यौवनकाल में स्त्री प्रसंगों में अधिकाधिक लिप्त रहना, लंबे समय तक चले रोग के कारण हुई कमजोरी, कब्ज, अपच, अजीर्ण, वायु प्रकोप आदि पेट के रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा आदि रोग व इनकी चिकित्सा हेतु ली जा रही दवाओं के दुष्प्रभाव आदि ऐसे शारीरिक कारण हैं, जिनसे पुरुष में यौनेच्छा की कमी या यौनेच्छा होने के बावजूद पुरुष यौनांग में उत्तेजना न होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इन्जेक्शन, कैपसूल, गोलियां व पीने वाली एलोपैथिक दवाओं का प्रचलन नशे के रूप में आजकल अधिक बढ़ रहा है।

मानसिक कारणों में व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा, सांसारिक समस्याओं से उत्पन्न होने वाला तनाव, घर या कार्यस्थल में होने वाले कलह-क्लेश से उपजा विषाद (डिप्रेशन) आदि मुख्य हैं। इसके अतिरिक्त स्त्री आकर्षक न हो, रौबीली हो, रतिक्रिया में सक्रिय रूप से सम्मिलित न हो, तो भी नपुंसकता की स्थिति आ सकती है। इसके अतिरिक्त अवैध संबंधों के दौरान होने वाला भय, चिंता, आशंका भी नपुंसकता का कारण बनता है।

शुक्राणुओं की कमी या अभाव संबंधी नपुंसकता का कारण शारीरिक होता है। किशोरावस्था से ही अप्राकृतिक मैथुन में लिप्त होना, युवावस्था में भी अधिकाधिक मैथुन कर्म में प्रवृत्त होना व पौष्टिक भोजन का अभाव इसके मुख्य कारण हैं। इसके अतिरिक्त अधिक गर्मी वाले स्थान पर लंबे समय तक कार्यरत रहने अथवा एक्स-रे आदि के विकिरण में लंबे समय तक कार्य करते रहने से भी वीर्य में शुक्राणुओं की कमी हो जाती है। वीर्य में शुक्राणुओं का पूर्णतः अभाव विभिन्न कारणों से जन्मजात भी हो सकता है और कनफेड़ आदि रोग होने के कारण बाद में भी हो सकता है।

What are symptoms of Impotence?

नपुंसकता के लक्षण क्या है।

वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना, स्वस्थ शुक्राणुओं का प्रतिशत कम होना, शुक्राणुओं का आकार असामान्य होना अथवा शुक्राणुओं का पूर्णतः अभाव होना नपुंसकता के लक्षण हैं।

यौनेच्छा में कमी या यौनेच्छा का पूर्णतः अभाव, स्त्री के स्पर्श, आलिंगन व मधुर व्यवहार के बावजूद लिंग में बिल्कुल भी उत्तेजना न होना या उत्तेजना होने पर शीघ्र ही समाप्त हो जाना आदि लक्षण दूसरे प्रकार की नपुंसकता में पाए जाते हैं।

चिकित्सा

मनोचिकित्सा के अंतर्गत रोगी में आत्मविश्वास जगा कर उसे आश्वस्त किया जाता है कि उसे किसी प्रकार का कोई रोग या कमजोरी नहीं है। किशोरावस्था में अप्राकृतिक मैथुन में प्रवृत्त रहे युवकों को प्रथम यौन संबंध के समय डर बना रहता है कि कहीं वह यौन क्रिया सुचारु रूप से संपन्न न कर सकें। आत्मविश्वास की कमी के कारण पहली बार मैथुन क्रिया में असफल रहने पर पुरुष के मस्तिष्क में यह बात घर कर जाती है कि वह मैथुन-कर्म के योग्य नहीं है। यदि रोगी शारीरिक रूप से सक्षम हो, तो केवल मनोचिकित्सा के द्वारा ही उसका उपचार संभव है। यदि शारीरिक रूप से भी रोगी कमजोर है, तो निम्नलिखित चिकित्सा रोगी को दे सकते हैं

  • सुबह खाली पेट अंजीर के पके हुए फल खाएं।
  • सूखे अंजीर, किशमिश, छोटी इलायची के दाने, बादाम की गिरी, पिस्ता, व मिस्री 20-90 ग्राम व केशर 2 ग्राम । सबको बारीक कूट-पीस कर कांच के बरतन में डालें व उसमें गाय का घी डालकर दस दिन तक धूप दिखाएं। १ चम्मच तक यह दवा दूध के साथ-सुबह शाम लें।
  • सूखे अंजीर, शतावरी, सफेद मूसली, किशमिश, बादाम की गिरी, पिश्ता, सालम मिस्री, गुलाब के फूल, शीतल चीनी सभी 100-100 ग्राम लेकर सबको बारीक पीसकर चीनी की चाशनी में पका लें। जमने योग्य हो जाए तो 10-10 ग्राम लौह भस्म, केशर, अभ्रम भस्म व प्रवाल भस्म डालकर अच्छी तरह मिला दें। 2-१ चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ दें।
  • तुलसी और गिलोय का एक-एक चम्मच स्वरस समान भाग शहद के साथ लें।
  • बंगभस्म को शहद और तुलसी के पत्तों के स्वरस में घोटकर मूंग के दानों के बराबर की गोलियां बनाएं व 1-1 गोली सुबह-शाम दूध के साथ लें।
  • असगंध नागौरी (छोटी असगन्ध) व विदारी कन्द समान भाग लेकर कूटकर रख लें। एक-एक चम्मच सुबह-शाम मिस्री मिले हुए गर्म दूध के साथ लें। यदि इसके सेवन से कब्ज की शिकायत हो, तो असगंध और विदारी कन्द के साथ सोंठ भी समान मात्रा में लें। कब्ज होने की दशा में असगंध व आंवला का समान भाग चूर्ण भी ले सकते हैं।
  • बड़ा गोखरू, गिलोय, सफेद मूसली, विदारी कन्द, मुलेठी व लौंग बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं व आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ लें।
  • काले धतूरे के बीज छाया में सुखा लें और बारीक पीस कर शहद के साथ घोट लें। उड़द की दाल के बराबर की गोलियां बना लें। एक-एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ लें।
  • सफेद मूसली 200 ग्राम, शीतल चीनी 100 ग्राम, वंशलोचन 50 ग्राम व छोटी इलायची के बीज 50 ग्राम लेकर कूटें। इसमें 20-20 ग्राम अभ्रक भस्म व प्रवाल भस्म मिला कर रख लें । एक-एक ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ लें।
  • उड़द की दाल व कौंच के बीज समान मात्रा में पीसकर चूर्ण बना कर रख लें। 50-100 ग्राम की मात्रा में प्रातः व सायं दूध में खीर की तरह पका कर लें।
  • शुद्ध शिलाजीत व छोटी पीपल का चूर्ण 10-10 ग्राम लेकर उसमें 1-1 ग्राम बंगभस्म व प्रवालभस्म मिला लें। यह मिश्रण 1 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम लें।
  • सफेद मूसली, पुनर्नवा, असगन्ध, गोखरू, शतावर व नागबला सभी को बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें । एक-एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम _ मिस्री मिलें हुए दूध से लें।
  • काली मूसली, सफेद मूसली, कौंच के बीज, असगंध, शतावर, तालमखाना, छोटी इलायची के बीज व छोटी पीपल बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं। एक-एक चम्मच सुबह-शाम मिस्री मिले हुए दूध से लें।
  • अंबर को तिल के तेल में मिलाकर समागम से 1 घण्टा पहले इन्द्रिय पर लेप करें। इससे स्तंभन शक्ति बढ़ती है।
  • कपूर को गुलाब के इत्र में मिला कर समागम से 1 घण्टा पहले इन्द्रिय पर लेप करने से भी स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।

Ayurvedic Medicine for Impotence.

नपुंसकता का आयुर्वेदिक औषधियां द्वारा इलाज।

रतिवल्लभरस, शुद्ध शिलाजीत, मकरध्वज, मन्मथ रस, शतावरी पाक, मूसली पाक, अश्वगन्धारिष्ट, चन्द्रकला रस, लवंगादि चूर्ण, कामचूड़ामणि रस, धातु पौष्टिक चूर्ण, अभ्रक भस्म, शुक्रवल्लभ रस, हीरा भस्म, स्वर्ण भस्म आदि औषधियां नपुंसकता की चिकित्सा हेतु वर्षों से प्रयोग की जाती रही हैं।

Other medicine available in stores by various manufacturers for Impotence.

नपुंसकता का पेटेंट औषधियां द्वारा इलाज।

डिवाइन आनन्द प्लस कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा), शुक्र संजीवनी वटी व शिवाप्रवंग स्पेशल (धूतपापेश्वर), मदन विनोद वटिका (झण्डु), एशरी फोर्ट कैपसूल (एमिल), टैन्टैक्स फोर्ट (हिमालय), केशरादिवटी (बैद्यनाथ), पालरिवीन फोर्ट व नियो गोलियां (चरक) आदि।

शुक्राणु वृद्धि

वीर्य में शुक्राणुओं की वृद्धि हेतु निम्न औषधियों का प्रयोग किया जा सकता है—

  • तुलसी के बीज व गुड बराबर मात्रा में लेकर कूटें व मटर के बराबर की गोलियां बनाएं। 2-2 गोली सुबह-शाम दूध के साथ लें।
  • सत गिलोय 1 भाग, सफेद मूसली 2 भाग, तालमखाने 3 भाग लेकर सबको कूट-पीस लें। तीनों के बराबर मिस्री मिला लें। एक-एक चम्मच गर्म दूध के साथ लें।
  • शतावर, मुलेठी, सत गिलोय, शुद्ध शिलाजीत, वंशलोचन, तालमखाने, छोटी इलायची के बीज, पाषाणभेद, लौह भस्म व बंग भस्म सभी को समान मात्रा में लें। इन सबके वजन के बराबर मिस्री मिला लें। एक चम्मच दवा सुबह-शाम दूध के साथ लें।
  • स्वर्ण भस्म 1 भाग, कस्तूरी 2 भाग, रजत भस्म 3 भाग, जावित्री 4 भाग, केशर 5 भाग, छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण 5 भाग, जायफल का चूर्ण 6 भाग व वंशलोचन का चूर्ण 7 भाग लेकर अच्छी तरह मिला लें। पान के स्वरस में घोटकर मूंग की दाल के बराबर गालियां बना लें। 1-2 गोली शहद, मलाई या मक्खन के साथ लेकर ऊपर से दूध पी लें।

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शुक्राणु वृद्धि का पेटेंट औषधियां द्वारा इलाज।

स्वामला कम्पाउन्ड (धूतपापेश्वर), एडीजोआ कैप्सूल (चरक), स्पीमेन गोलियां (हिमालय), सीमेन्टों गोलियां (एमिल), अश्वगन्धा कैप्सूल (माहेश्वरी), वाजीएम कैप्सूल, गोलियां व तेल (माहेश्वरी), डिवाइन हैल्थ प्लस कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा)।

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