अजीर्ण का घरेलू इलाज

अजीर्ण – Dyspepsia


What is the cause of Dyspepsia?

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अपच होने का कारण क्या है।

भोजन और नींद में अनियमितता होने, भारी (गरिष्ठ) व चिकनाई युक्त भोजन अधिक मात्रा में कुछ दिनों तक लगातार करते रहने, शारीरिक श्रम का अभाव होने तथा ईर्ष्या, भय, चिंता, क्रोध आदि मानसिक कारणों से यह रोग उत्पन्न होता है।

What are symptoms of Dyspepsia?

अजीर्ण के लक्षण क्या है।

शरीर के पाचक रसों की उत्पत्ति में गड़बड़ी होने तथा आमाशय की प्रेरक गति प्रभावित होने से जब भोजन ठीक प्रकार से नहीं पचता है, तो पेट में भारीपन और बेचैनी-सी रहती है। दिन में कई बार शौच जाने के बावजूद पेट साफ नहीं हो पाता। इससे ऐसी अवस्था उत्पन्न हो जाती है कि हलका एवं समय पर किया हुआ भोजन भी नहीं पच पाता है।

Home Remedies for Dyspepsia.

अपच का घरेलू चिकित्सा।

  • अदरक का एक-एक चम्मच रस दिन मैं दो बार नमक या गुड के साथ भोजन के पूर्व लें।
  • सोंठ का आधा चम्मच चूर्ण दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें।
  • एक नीबू का रस दिन में तीन बार भोजन के बाद गर्म पानी से लें।
  • छोटी हरड़ का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में दिन में दो बार गुड़ या नमक के साथ भोजन से पहले लें।
  • काली मिर्च एवं नमक, दो-दो चुटकी, कटे हुए आधे नीबू पर रखकर आंच पर गर्म करके भोजन के बाद दिन में तीन बार चूसें ।
  • भोजन से पहले 100 ग्राम खुबानी खाएं।
  • आंवलों का रस पांच से छह चम्मच, एक चम्मच पानी मिलाकर दिन में तीन बार लें।
  • भोजन के बाद चुटकी भर अजवायन पीस कर लें।
  • काला नमक व देसी अजवायन 1 : 4 के अनुपात में किसी शीशे या चीनी मिट्टी के बरतन में डालकर, नीबू का इतना रस निचोड़ें कि दोनों वस्तुएं उसमें डूब जाएं। इस बरतन को छाया में रखकर सुखाएं । सूखने पर नीबू के रस में पुन: डुबो दें। यह क्रिया सात बार करें। यह मिश्रण १ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ लें। अजीर्ण के अतिरिक्त पेट के अन्य रोगों, उल्टियां आने और जी मिचलाने में भी यह मिश्रण अत्यंत लाभदायक है।
  • तुलसी के दस पत्ते पीसकर इसमें नमक मिलाकर शरबत की तरह पिएं ।
  • रोगी को मोठ की दाल खिलाएं।
  • कचरी के चूर्ण में सेंधा नमक मिलाकर गर्म पानी या मट्ठे के साथ दें।
  • फलों में पपीता या अमरूद अथवा दोनों मिलाकर इसमें काला नमक काली मिर्च व इलायची मिलाकर भोजन से पहले लें। भोजन इतना करें कि पेट कुछ खाली रहे।
  • सब्जियों में टमाटर अजीर्ण में बहुत लाभदायक है । प्रातःकाल खाली पेट, कटे हुए टमाटरों पर काला नमक व काली मिर्च डालकर लें।
  • गाजर अथवा टमाटर का रस प्रातः व सायं लेने से भी इस रोग में बहुत लाभ मिलता है। दोनों का रस मिलाकर भी ले सकते हैं। यह रस सुबह के समय खाली पेट व शाम को भोजन से एक घंटा पहले लें।
  • टमाटर के रस की जगह इसका सूप भी लिया जा सकता है। इसी प्रकार कच्चे प्याज के पत्तों से बना सूप भी लिया जा सकता है। रस या सूप दोनों में काली मिर्च व काला नमक डालकर लें।
  • फलों में अनार या फालसे का रस भी पेट के रोगों में अच्छा कार्य करता है। लंबे समय तक प्रयोग करने के लिए अनार का शरबत बनाकर रखा जा सकता है।

What to eat or not in Dyspepsia?

अजीर्ण होने पे भोजन एवं परहेज।

  • अजीर्ण में हलका भोजन लें। चावल व मूंग की दाल की 1 और 2 के अनुपात में बनी खिचड़ी रोगी को लेनी चाहिए। रोटी के साथ मूंग की दाल या हरी सब्जी (घिया, तोरी, टिंडा, पालक आदि) का प्रयोग किया जा सकता है।
  • रोटी बनाते समय उसमें 7-8 दाने अजवायन के डाल लें।
  • अजीर्ण के रोगी को तला हुआ व गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए। घी या तेल की मात्रा भोजन में न्यूनतम हो। :
  • उड़द की दाल, दही आदि का प्रयोग भी रोगी को नहीं करना चाहिए।
  • मूंगफली व केले जैसे फलों का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • भोजन के बाद एक गिलास छाछ (मट्ठा) का प्रयोग अजीर्ण में विशेष रूप से फायदेमंद है, किंतु छाछ में से मक्खन पूरी तरह निकाल लिया गया हो, अन्यथा मक्खन पाचकाग्नि को और मंद कर देगा। छाछ में अजवायन, भुना व पिसा जीरा तथा काला नमक डालकर लें । यदि छाछ मिलना संभव न हो, तो भोजन के बाद गर्म पानी पिएं। यह पानी उबालने के बाद इतना ठंडा कर लेना चाहिए कि उसे कर आसानी से पीया जा सके।

Ayurvedic Medicine for Dyspepsia.

अपच का आयुर्वेदिक औषधियां द्वारा इलाज।

अजवायन का अर्क 15 से 20 मि.ली. दिन में दो-तीन बार बराबर की मात्रा में गर्म पानी मिला कर दें। भोजन के बाद कुमारी आसव या रोहितकारिष्ट 15 से 20 मि.ली. तीन बार लें। अजीर्ण के साथ यदि यकृत की कार्यप्रणाली ठीक न हो, तो आरोग्यवर्धिनीवटी का प्रयोग ताप्यादिलौह अथवा यकृदारि लौह के साथ कराएं । आंवला चूर्ण, लवण भास्कर चूर्ण, हिंग्वाष्टक चूर्ण या शिवक्षार पाचन चूर्ण भोजन . के बाद एक-एक चम्मच गर्म पानी के साथ दें। रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण लें।

Other medicine available in stores by various manufacturers for Dyspepsia.

अजीर्ण का पेटेंट औषधियां द्वारा इलाज।

सीरप ओजस (चरक), वज्रकल्क, पाचक पिप्पली (धूतपापेश्वर), पंचारिष्ट (झंडु) या पंचासव (बैद्यनाथ) या जिमनेट सीरप व गोलियां (एमिल), गैसोल गोलियां व सैन. डी. जाइम सीरप (संजीवन) का प्रयोग भी अजीर्ण में लाभदायक है।

कई बार किसी वस्तु विशेष का अधिक मात्रा में सेवन करने से भी अजीर्ण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। रसोईघर में विद्यमान निम्नलिखित वस्तुओं के प्रयोग से ऐसे अजीर्ण में तुरंत फायदा होता है :

अजीर्णकारी द्रव्य अजीर्णनाशक द्रव्य
1. अमरूद काला नमक, काली मिर्च व लौंग पीसकर चूसना ।
2. आम 1 ग्राम सोंठ और गुड मिलाकर चूसना ।
3. इमली गुड
4. उड़द की दाल शक्कर या गुड़ में हींग मिलाकर, गोली बनाकर दो गर्म पानी से लें।
5. केला दो छोटी इलायची चबाकर खाएं ।
6. खरबूजा मिसरी अथवा चीनी मिलाकर
7. खीर काली मिर्च
8. गन्ना बेर (4 से 6)
9. घी काली मिर्च व काले नमक वाली चाय
10. चने की दाल सिरका
11. चावल अजवायन या गर्म दूध
12. जामुन नमक
13. तरबूज लौंग व काला नमक
14. दही काला नमक व पिप्पली
15. पनीर गर्म पानी
16. पूरी/कचौड़ी गर्म पानी/चाय (नमक से बनी)
17. बाजरा/मकई छाछ
18. बेर सिरका/गन्ना
19. मटर सोंठ, काली मिर्च
20. मूंगफली गुड
21. मूली मूली के पत्ते
22. लड्डू पिप्पली, लौंग
23. शकरकंदी गुड
24. नारियल चावल का धोवन
25. अधिक भोजन जमीरी नीबू का रस
26. गेहूं की रोटी ककड़ी

 

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