मुंह की दुर्गंध / बदबू का घरेलू उपचार

Halitosis ~ Bad Breath Natural Cure In Hindi

मुंह से आने वाली दुर्गंध आस-पास वालों को बुरी तरह परेशान कर देती है। मुंह से आने वाली दुर्गंध से क्षुब्ध होकर लोग उस व्यक्ति के पास बैठना, उससे बातें करना तक बंद कर देते हैं। दुर्गंध के कारण स्त्री-पुरुष अपने आस-पास के परिचितों में अधिक उपेक्षित होते हैं।

Why does Bad Breath happens?

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मुंह की बदबू क्यों होता है?

उत्पत्ति : मुंह से दुर्गंध की उत्पत्ति अनेक कारणों से होती है। उदर में विकृति होने, कोष्ठबद्धता के कारण और मसूढ़ों में सड़न होने पर मुंह से दुर्गंध आती है। ग्रीष्म ऋतु में अधिक उष्ण खाद्य पदार्थों के सेवन से उदर में अधिक गर्मी होने से मुंह से दुर्गंध आने लगती है। लहसुन, प्याज आदि खाने पर भी मुंह से दुर्गंध आती है।

सबसे अधिक दुर्गंध उदर विकृति के कारण आती है। पाचन क्रिया विकृत होने से उदर में दूषित वायु की उत्पत्ति होती है। दूषित वायु मुंह या गुदा मार्ग से निकलती है तो आस-पास बैठे लोगों को दुर्गंध आती है। कुछ स्त्री-पुरुष कोष्ठबद्धता से कई-कई दिन तक पीड़ित रहते हैं। आंत्रों में मल के सड़ने से दूषित वायु मुंह द्वारा निकलती है तो दुर्गंध से स्वयं रोगी का जी भी मिचलाने लगता है। ऐसे में वमन भी हो सकती है।

प्रतिदिन दांत साफ नहीं करने से दांतों के बीच फंसे अन्न-कण मसूढ़ों में सड़न उत्पन्न कर देते हैं तो मुंह से दुर्गंध आने लगती है। पायरिया रोग में से पूय (पीव) निकलने पर भी मुंह से दुर्गंध आती है।

What are Symptoms of Halitosis?

मुंह की दुर्गंध के लक्षण क्या है?

लक्षण : मुंह से निकलने वाली दुर्गंध को पहले आस-पास बैठे व्यक्ति अनुभव करते हैं। जब कुछ व्यक्ति दुर्गंध की शिकायत करते हैं तो रोगी को दुर्गंध की विकृति का पता चलता है। कोष्ठबद्धता होने पर मुंह से दुर्गंध आती है तो रोगी का जी मिचलाता है। वमन की इच्छा होती है। कोष्ठबद्धता के कारण हल्का उदर शूल भी हो सकता है। दांतों की विकृति में पायरिया रोग होने पर बहुत दुर्गंध आती है। मसूढ़ों पर उंगली फेरने से पूय भी निकलती है। मुंह से दुर्गंध के साथ रोगी का जी मिचलाता है। यदि देर तक मुंह को जल से साफ नहीं किया जाए तो वमन भी हो सकती है।

उदर में वायु विकार (गैस) होने के कारण डकार व हिचकी के साथ मुंह से दुर्गंध निकलती है।

What to eat on Bad Breath?

मुंह की बदबू होने पे क्या खाएं?

  • प्रतिदिन हरे पत्तों वाली सब्जियों का अधिक मात्रा में सेवन करें।
  • गाजर, संतरा, मौसमी, अनार के रस का सेवन करें।
  • कोष्ठबद्धता के कारण मुंह से अधिक दुर्गंध आती है, इसलिए कोष्ठबद्धता को शीघ्र नष्ट करना चाहिए।
  • गुलकंद खाकर दूध पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है।
  • भोजन के साथ गाजर, मूली, खीरा, ककड़ी, चुकंदर का नींबू के रस के साथ बनाया सलाद अवश्य खाएं।
  • भोजन के बाद लौंग या इलायची मुंह में रखकर चूसें।
  • भोजन के साथ धनिए, पोदीने, अनार के दानों से चटनी बनाकर खाएं।
  • मसूढ़ों का रोग होने पर मुंह से दुर्गंध आने पर प्रतिदिन फिटकरी जल में मिलाकर दो-तीन बार अवश्य कुल्ले करें।
  • रात्रि को सोने से पहले टूथपेस्ट अवश्य करें।
  • नींबू के रस में मधु मिलाकर पर मलने से रक्तस्राव बंद होने से दुर्गंध नष्ट होती है।
  • भोजन के बाद सौंफ चबाकर खाने से दुर्गंध नष्ट होती है।
  • टमाटर काटकर उन पर सेंधा नमक डालकर खाने से दुर्गंध नष्ट होती है।
  • दुर्गंध से छुटकारा पाने के लिए हल्का, सुपाच्य भोजन करें।
  • सप्ताह में एक-दो बार दलिया, खिचड़ी, दाल-चावल का सेवन करें।
  • प्रतिदिन सुबह-शाम किसी पार्क में भ्रमण के लिए जाएं।
  • प्रतिदिन अधिक-से-अधिक जल का सेवन करें।

What to not eat on Halitosis?

मुंह की दुर्गंध होने पे क्या नहीं खाएं?

  • मांस, मछली व अंडे का सेवन न करें।
  • लहसुन का अधिक मात्रा में सेवन न करें।
  • उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी और शराब का सेवन न करें।
  • चाइनीज व्यंजन व फास्ट फूड का सेवन न करें।
  • गोल-गप्पें, छोले-भटूरे, समोसे, कचौड़ी आदि का सेवन न करें।
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