हृदय रोग का आयुर्वेदिक उपचार

Cardiovascular Disease Natural Remedies । Heart Disease Home Remedies In Hindi

आधुनिक परिवेश में कार्य-व्यवस्था में सफलता, रातोंरात धनी बन जाने की लालसा अधिकांश स्त्री-पुरुषों को हृदय रोगी बना देती है। व्यवसाय में रात-दिन की दौड़-धूप, अनियमित भोजन और अधिक जागरण स्वास्थ्य को हानि पहुंचाकर हृदय रोग से पीड़ित करते हैं। वर्तमान युग में हृदय रोगियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।

Why does Heart Disease happens?

हृदय रोग क्यों होता है?

उत्पत्ति : आधुनिक परिवेश में दूषित वातावरण हृदय रोगों की उत्पत्ति करता है। सड़कों पर वाहनों से निकला पैट्रोल व डीजल का धुआं वातावरण में फैलकर श्वास द्वारा शरीर में पहुंचता है तो श्वास रोग व हृदय रोगों की उत्पत्ति करता है। घरों के आस-पास कल-कारखानों, फैक्टरियों से निकली विषैली गैसें वातावरण में फैलकर लोगों को हृदय रोगी बनाती हैं।

मानसिक तनाव, गहरी चिंता, अधिक क्रोध, आवेश और ईर्षा-द्वेष की भावना भी मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव डालकर हृदय रोगों का शिकार बनाती है। अधिक वसायुक्त घी-तेल से निर्मित, उष्ण मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों के सेवन से अधिक लोग हृदय रोगों से पीड़ित होते हैं।

भोजन में घी, मक्खन की अधिक मात्रा शरीर में अधिक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा विकसित करती है। कोलेस्ट्रॉल रक्त में मिलकर हृदय को रक्त ले जाने वाली धमनियों की दीवारों के साथ एकत्र होकर रक्त संचार में अवरोध उत्पन्न करते हैं। रक्त संचार के अवरोध से हृदय रोगों की उत्पत्ति होती है।

What are Symptoms of Cardiovascular Disease?

हृदय रोग के लक्षण क्या है ?

लक्षण : हृदय रोग से पीड़ित होने पर रोगी बहुत घबराहट अनुभव करता है। सीढ़ियां चढ़ते हुए, परिश्रम का काम करते हुए हृदय जोरों से धड़कने लगता है। सारा शरीर पसीने से भीग जाता है। उच्च रक्तचाप व मधुमेह रोग (डायबिटीज) से पीड़ित रोगी हृदय रोगों के अधिक शिकार होते हैं। हृदय शूल में मांसपेशियों में रक्त के अभाव में हृदय में तीव्र शूल होता है। ऐसा लगता है कि कोई हृदय को मुट्ठी में रहा है। तीव्र शूल से रोगी छटपटाने लगता है। बेहोश भी हो जाता है। हृदय शूल प्राण घातक भी हो सकता है।

हृदय रोग के कारण रोगी को श्वास लेने में पीड़ा होती है। सिर में अधिक समय तक शूल हो सकता है। रोगी के पांवों में, टखनों पर शोथ के लक्षण भी दिखाई देते हैं। रोगी बहुत शारीरिक निर्बलता और थकावट अनुभव करता है।

What to eat on Heart Disease?

हृदय रोग होने पे क्या खाएं?

  • हृदय रोग होने पर रोगी को दलिया, खिचड़ी आदि सुपाच्य भोजन करना चाहिए।
  • भोजन में खीरा, टमाटर, चुकंदर, गाजर, मूली, ककड़ी का सलाद अधिक मात्रा में लेना चाहिए।
  • कोष्ठबद्धता (कब्ज) होने पर रोगी को अधिक परेशानी होती है, इसलिए रोगी को कोष्ठबद्धता नष्ट करने के लिए फल-सब्जियों का रस पीना चाहिए।
  • सब्जियों का सूप सेवन करना चाहिए।
  • केले के छोटे-छोटे टुकड़े करके, उसमें मधु मिलाकर खाने से बहुत लाभ होता है।
  • लहसुन की दो-तीन कलियों को चबाकर रस चूसने से हृदय रोगी को बहुत लाभ होता है।
  • अर्जुन की छाल का चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण गाय का घी और मिसरी मिलाकर सेवन करने से हृदय रोगी को बहुत लाभ होता है।
  • अनार का रस सुबह-शाम पीने से तीव्र धड़कने सामान्य होती हैं।
  • धनिए के 3 ग्राम चूर्ण में, 3 ग्राम मिसरी मिलाकर ताजे जल से सेवन करें।
  • शहतूत का शरबत बनाकर पीने से ग्रीष्म ऋतु में हृदय रोगी को लाभ होता है।
  • हृदय रोग में प्रतिदिन 25-30 ग्राम गुलकंद खाने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है और हृदय को शक्ति मिलती है।
  • आंवले, सेब व गाजर का मुरब्बा खाने से बहुत लाभ होता है।

What to not eat on Cardiovascular Disease?

हृदय रोग होने पे क्या नहीं खाएं?

  • हृदय रोगी को घी, तेल, मक्खन, मछली आदि वसायुक्त खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए।
  • उष्ण मिर्च-मसाले व अम्ल रसों से निर्मित खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • बाजार में बिकने वाले गोल-गप्पें, टिकिया, समोसे व चाट न खाएं।
  • एक बार अधिक मात्रा में भोजन न करें।
  • दूषित, बासी, देर से रखा, अधिक शीतल भोजन न करें।
  • चाइनीज व फास्ट फूड का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी और शराब का बिल्कुल सेवन न करें।
  • मधुमेह रोग हो तो मीठे खाद्य पदार्थों व उच्च रक्तचाप होने पर नमक का सेवन न करें।
  • आइसक्रीम व कोल्ड ड्रिंक का बहुत कम मात्रा में सेवन करें। शीत ऋतु में सेवन न करें।

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