बेल के फायदे अनिद्रा, मस्तिष्क की थकावट, सिरदर्द, शारीरिक निर्बलता, स्थूलता, सौंदर्य वृद्धि, लू का प्रकोप, ल्यूकोरिया, पसीने की दुर्गन्ध, सांप के विष से सुरक्षा, आग से जलने में

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Bael ~ Aegle Marmelos Benefits in Sleeplessness, Brain Fog, Headache, Adynamia, Obesity, Beauty Enhancement, Heat Stroke, Leukorrhea, Body Odor, Snake bite, Thermal (Heat or Fire) Burns In Hindi

विविध रोग-विकार

शरीर के विभिन्न अंग जब किसी रोग-विकार से प्रभावित होते हैं तो विविध रोगों की उत्पत्ति होती है। मस्तिष्क की विकृति, अनिद्रा, सिरदर्द और मस्तिष्क की थकावट रोगों की उत्पत्ति करती है।

पौष्टिक भोजन के अभाव में मस्तिष्क को हानि पहुंचती है तो इन रोगों की उत्पत्ति होती है।

प्रस्तुत अध्याय में बच्चों की शारीरिक निर्बलता, स्त्री-पुरुषों की स्थूलता, सौंदर्य वृद्धि, अंशुघात (लू का प्रकोप), स्त्रियों के कष्टदायक रोग, श्वेत प्रदर, पसीने की दुर्गन्ध, सांप के विष से सुरक्षा, आग से जलने की चिकित्सा का वर्णन किया गया है।

इन सब रोग-विकारों की चिकित्सा आप बेललगिरी से सरलता से कर सकते हैं।

अनिद्रा

Insomnia ~ Sleeplessness

कुछ स्त्री-पुरुषों को इतनी अधिक नींद आती है कि वह कुर्सी पर बैठे-बैठे सो जाते हैं। बस में यात्रा करते हुए भी कू व्यक्तियों को नींद आ जाती है, लेकिन कुछ ऐसे भी स्त्री-पुरुष होते हैं जिन्हें कोमल बिस्तर . पर भी नींद नहीं आती। सारी रात करवटें बदलते बीत जाती है, लेकिन थोड़ी देर भी सो नहीं पाते। नींद न आने की विकृति अनिद्रा से पीड़ित स्त्री-पुरुष ट्रैंक्वीलाइजर्स का सेवन करके सोने की कोशिश करते हैं।

Why does Insomnia happens?

अनिद्रा क्यों होता है?

उत्पत्ति : अनिद्रा रोग की उत्पत्ति अनेक कारणों, जैसे मानसिक तनाव, अधिक चिंता, शोक व किसी रोग के कारण हो सकती है।

पाचन क्रिया की विकृति से कोष्ठबद्धता (कब्ज) होने के कारण अनिद्रा की अधिक विकृति होती है।

What are Symptoms of Sleeplessness?

अनिद्रा के लक्षण क्या है?

लक्षण : अनिद्रा के रोगी को पूरी रात नींद नहीं आती। यदि कभी उसे नींद आ भी जाती है तो थोड़ी देर में आंख खुल जाती है।

नींद के लिए रोगी बेचैन हो उठता है। नींद के लिए बेचैन अनेक व्यक्ति नींद की अधिक गोलियां खाकर आत्महत्या तक कर लेते हैं।

Steps to cure Insomnia.

चिकित्सा

  • अनिद्रा के रोगी स्त्री-पुरुषों को ग्रीष्म ऋतु में शीतल जल से स्नान करने के बाद बेल का शर्बत पीना चाहिए। बेल का शर्बत पीने से अनिद्रा की विकृति नष्ट होती है।
  • बेल के रस में नारियल का जल मिलाकर पीने से नींद आने लगती है।
  • बेल के कोमल, ताजे पत्तों को जल के छीटे मारकर, सिल पर पीसकर मस्तक पर लेप करने से नींद आती है।
  • बेल का मुरब्बा रात्रि के समय खाने और दूध पीने से कोष्ठबद्धता नष्ट होने से रोगी को नींद आने लगती है।

मस्तिष्क की थकावट

Brain Fog ~ Mental fatigue

मस्तिष्क का अधिक काम करने वाले लोग मस्तिष्क की थकावट से अधिक पीड़ित होते हैं।

काफी देर तक लिखने-पढ़ने का काम करने से भी अधिक थकावट होती है।

Why does Brain Fog happens?

मस्तिष्क की थकावट क्यों होता है?

उत्पत्ति : भोजन में पौष्टिक तत्त्वों का अभाव होने से मस्तिष्क क्षीण हो जांता है। ऐसे में लिखने-पढ़ने का काम करने से थकावट होने लगती है। देर तक पढ़ने पर कुछ याद नहीं होता। भोजन में फल-सब्जी, मेवे व घी, दूध की कमी के कारण मस्तिष्क जल्दी थकने लगता है। रातों को है’अधिक समय तक जागने से भी मस्तिष्क में अधिक थकावट अनुभव होती है।

What are Symptoms of Brain Fog?

मस्तिष्क की थकावट के लक्षण क्या है?

लक्षण : अधिक पढ़ने-लिखने से थकावट के कारण सिरदर्द होने लगता है। सिर भारी-भारी लगता है। रोगी कोई रचनात्मक कार्य नहीं कर पाता। ऐसे में सोचने और काम करने से मानसिक शक्ति नष्ट होती है।

Steps to cure Brain Fog.

चिकित्सा

  • मस्तिष्क की थकावट के लिए सुबह-शाम स्वच्छ व शीतल वायु के वातावरण में भ्रमण के लिए निकलना चाहिए। शुद्ध वायु से मस्तिष्क को शक्ति मिलती है।
  • बेल का मुरब्बा खाकर दूध पीने से मस्तिष्क को अधिक शक्ति मिलती है। लिखने-पढ़ने से थकावट व सिरदर्द नहीं होता है।
  • बेलगिरी का शर्बत मस्तिष्क की उष्णता को नष्ट करके उसकी क्षमता को विकसित करता है। बेल का शर्बत मस्तिष्क को पर्याप्त शक्ति प्रदान करता है।
  • बेलगिरी का गूदा निकालकर कांच के बर्तन में जल भरकर मिला दें। रात को जल में गूदा डालकर रखें। प्रातः उस मिश्रण को छानकर उसमें मिश्री या मधु मिलाकर पीने से मस्तिष्क को भरपूर शक्ति मिलती है। अधिक काम करने पर भी थकावट अनुभव नहीं होती।
  • बेलगिरी के गूदे का रस निकालकर गन्ने के रस में मिलाकर सेवन करने से मस्तिष्क को पौष्टिक आहार मिलता है। इस मिश्रण में मधु मिलाकर सेवन करने से अधिक लाभ होता है।
  • बेल के गूदे में मक्खन और मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से मस्तिष्क को भरपूर शक्ति मिलती है। मस्तिष्क की थकावट से सुरक्षा होती है।
  • बेल के पत्तों के रस में बादाम घिसकर मिलाकर रखें। इस मिश्रण में मधु मिलाकर सेवन करने से मस्तिष्क को शक्ति मिलती है। थकावट नहीं होती। ‘

सिरदर्द

Headache

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सिरदर्द की उत्पत्ति दूसरे रोगों के है’कारण “होती है। लेकिन जब सिरदर्द होता है तो रोगी बहुत बेचैन हो जाता है।

कुछ स्त्री-पुरुष कभी-कभी सिरदर्द से पीड़ित होते हैं, लेकिन कुछ स्त्री-पुरुषों को दूसरे-तीसरे दिन सिरदर्द होता रहता है।

Why does Headache happens?

सिरदर्द क्यों होता है?

उत्पत्ति : अधिक तेल, मिर्च, उष्ण मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने से सिरदर्द की उत्पत्ति होती है।

धूप में चलने-फिरने, अधिक तथा अधिक निकट से अथवा लेटकर टेलीविजन देखने, बिस्तर पर लेटकर पुस्तक पढ़ने से सिरदर्द की उत्पत्ति होती है। कब्ज कई दिनों तक बनी रहे तो भी सिरदर्द होने लगता है।

What are Symptoms of Headache?

सिरदर्द के लक्षण क्या है?

लक्षण : सिरदर्द में रोगी बेचैन हो जाता है। रोगी की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगता है। कई बार तीव्र शूल होने पर वमन भी हो जाती है।

Steps to cure Headache.

चिकित्सा

  • कोष्ठबद्धता के कारण सिरदर्द होने पर रोगी को बेल का शर्बत या बेल का मुरब्बा सेवन कराएं। इनसे कोष्ठबद्धता नष्ट होने से सिरदर्द से मुक्ति मिलती है।
  • बेल का रस निकालें। उस रस को बर्फ पर रखकर ठंडा करें। फिर उसमें स्वच्छ कपड़े की पट्टियां भिगोकर मस्तक पर रखें। कुछ ही देर में सिर का दर्द छूमंतर हो जाएगा। बर्फ पर रस को ठंडा करने का उपक्रम ग्रीष्म ऋतु में ही करें।
  • बेल के कोमल व ताजे पत्ते, ग्यारह की संख्या में लेकर सिल पर जल के मारकर पीसें। फिर उन्हें कपड़े में बांधकर, निचोडकर रस निकग्लेहै३ । इस रस को पीने से बहुत दिनों से चला आ रहा सिरदर्द नष्ट होता है।
  • बेलगिरी के बीजों की मींग को सिल पर पीसकर मस्तक पर लेप करें। कुछ ही देर में सिरदर्द गायब हो जाएगा।
  • बेल के कोमल व ताजे पत्तों को गर्म तवे पर हल्का सेंककर मस्तक पर रखकर पट्टी बांध दें। कुछ ही देर में सिर का दर्द नष्ट हो जाएगा।
  • बेल का मुरब्बा खाने से नेत्रों की ज्योति प्रबल होती है और सिरदर्द से मुक्ति मिलती है।
  • बेल की जड को जल के साथ घिसकर या पीसकर मस्तक पर लेप करने से सिरदर्द नष्ट होता है।

शारीरिक निर्बलता

Adynamia

शारीरिक निर्बलता के कारण स्त्री-पुरुष को बहुत परेशानी होती है।

परिश्रम का काम करने में उन्हें बहुत कठिनाई होती है। सीढ़ियां चढ़ने में बहुत थकावट महसूस होती है।

Why does Adynamia happens?

शारीरिक निर्बलता क्यों होता है?

उत्पत्ति : किसी रोग से लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण शारीरिक निर्बलता होती है। सीढ़ियों से फिसलकर गिरने व चोट लगने से अधिक रक्त निकल जाने पर शारीरिक निर्बलता होती है। अतिसार (दस्त) के कारण स्त्री-पुरुष शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाते हैं। है”भोजन में पौष्टिक तत्त्वों के अभाव में शारीरिक निर्बलता तेजी से बढ़ती है।

What are Symptoms of Adynamia?

शारीरिक निर्बलता के लक्षण क्या है?

लक्षण : शारीरिक निर्बलता के कारण परिश्रम का काम करने पर हृदय की धड़कन बढ़ जाती है। सारा शरीर पसीने से भीग जाता है। नेत्रों के सामने अंधेरा छाने लगता है। रोगी के पांव लड़खड़ाने लगते हैं।

Steps to cure Adynamia.

चिकित्सा

  • बेल की गिरी को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर चूर्ण बनाया जाता है। दूध को उबालकर उसमें 5 ग्राम चूर्ण मिलाकर, थोड़ी-सी मिश्री घोलकर पिलाने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त इस प्रयोग के करने से वीर्य की कमजोरी और शारीरिक निर्बलता/दुर्बलता भी दूर होती है।
  • बेल का शर्बत पिलाने से बच्चों की कोष्ठबद्धता नष्ट होती है और उन्हें उदर शूल से मुक्ति मिलती है। बेल के शर्बत से उनकी पाचन क्रिया भी प्रबल होती है।
  • अतिसार की विकृति होने पर बेल के गूदे को सुखाकर, कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 3 ग्राम मात्रा में जल के साथ सेवन कराने से अतिसार में बहुत लाभ होता है।
  • शारीरिक निर्बलता के कारण दांत देर से निकलते हों तो बच्चों को प्रतिदिन 10-15 ग्राम बेल की गिरी खिलानी चाहिए।
  • बेल की गिरी का 10 ग्राम चूर्ण जल में उबालकर पिलाने से भी दांत सुगमता से निकलते हैं।
  • बच्चे को प्रवाहिका (पेचिश) होने पर बेल का शर्बत पिलाने से बहुत लाभ होता है।
  • 10 ग्राम बेल की गिरी के चूर्ण को 100 ग्राम दूध में उबालकर पिलाने से अतिसार बंद होता है।
  • बच्चों को बार-बार वमन होने पर बेल की गिरी का 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल के साथ सेवन कराने से लाभ होता है।
  • बच्चों को कोष्ठबद्धता होने पर बेल की गिरी मिश्री मिलाकर खिलाएं।

स्थूलता

Obesity

स्थूलता के कारण स्त्री-पुरुषों में मधुमेह, , उच्च रक्तचाप, वृक्कों की विकृति, कोष्ठबद्धता आदि अनेक रोगों की उत्पत्ति होती है। 68 –

स्थूलता के कारण स्त्री-पुरुष चलने-फिरने और सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ हो जाते हैं।

स्थूलता उनके शारीरिक सम्बंधों में अवरोध की उत्पत्ति करके उनके यौन आनंद को कम कर देती है।

Why does Obesity happens?

स्थूलता क्यों होता है?

उत्पत्ति : अधिक वसायुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर के विभिन्न अंगों में चर्बी एकत्र होने से स्थूलता की उत्पत्ति होती है। एक बार स्थूलता बढ़ने लगती है तो फिर सरलता से नष्ट नहीं होती। अधिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले जब शारीरिक श्रम, व्यायाम आदि नहीं करते तो स्थूलता के शिकार होते हैं।

Steps to cure Obesity.

चिकित्सा

  • प्रातः भ्रमण और तैरने से स्थूलता तेजी से नष्ट होती है।
  • बेल, नीम के पत्ते और साठी की जड को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर, छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। चूर्ण को कपड़े द्वारा छानकर रखें। प्रतिदिन 2-2 ग्राम चूर्ण जल के साथ सेवन करने से स्थूलता का निवारण होने लगता है।
  • बेलगिरी खाने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है। कोष्ठबद्धता के नष्ट होने से उदर में एकत्र मल निष्कासित होता है। धीरे-धीरे स्थूलता नष्ट होने लगती है।
  • बेल के शर्बत में नीबू का रस मिलाकर पीने से भी स्थूलता कम होती है।
  • बेल के पत्तों का रस और नीबू का रस मिलाकर सेवन करने से स्थूलता का निवारण होता है।

सौंदर्य वृद्धि

Beauty Enhancement

स्त्री-पुरुष सभी अपने को अधिक-से-अधिक सुंदर दिखाने की कोशिश करते हैं। शारीरिक सौंदर्य वृद्धि के लिए स्त्री-पुरुष तरह-तरह के सौंदर्य प्रसाधन, क्रीम, लोशन और तेलों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कृत्रिम सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल से अधिक बदसूरत दिखाई देते हैं।

विभिन्न रसायनों से बने सौंदर्य प्रसाधन कुछ देर के लिए सौंदर्य में वृद्धि हैग्नूकात्ते हैं, साथ ही त्वचा को विकृत करके अधिक बदसूरत बना देते है।

ऐसे में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का सौंदर्य प्रसाधनों के रूप में इस्तेमाल किया जाए तो अधिक सौंदर्य वृद्धि हो सकती है।

बेल के उपयोग से सौंदर्य वृद्धि

  • बेल का मुरब्बा खाने और बेल का शर्बत पीने से पाचन क्रिया संतुलित हैरहने से स्वास्थ्य ठीक रहता है और शारीरिक सौंदर्य आकर्षण बना रहता है।
  • बेलगिरी खाने से भी स्वास्थ्य को बहुत लाभ होता है और सौंदर्य विकसित होता है।
  • बेल की गिरी (गूदा), बेल के कोमल ताजे पत्ते, दही और बेसन लेकर, सिल पर पीसकर उबटन (लेप) बना लें। इस उबटन को चेहरे और गर्दन पर मलकर 15-20 मिनट तक सूखने दें। उसके बाद जल से धोकर उबटन को साफ कर लें। 15-20 उबटन लगाने से चेहरे का सौंदर्य विकसित होता है।

अंशुघात ( लू का प्रकोप )

Heat Stroke ~ Sunstroke

ग्रीष्म ऋतु में चलने-फिरने से अंशुघात अर्थात लू से पीड़ित होना साधारण बात है।

तेज धूप में स्कूल से लौटते बच्चे भी अंशुघात का शिकार हो जाते हैं। हैगृग्रीष्म ऋतु में घर से बाहर खेलने वाले बच्चे भी अंशुघात से पीड़ित हो जाते है।

Why does Heat Stroke happens?

लू क्यों होता है?

उत्पत्ति : ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों के प्रकोप से स्त्री-पुरुष, बच्चे व प्रौढ़ अंशुघात अर्थात लू के शिकार होते हैं। लू के कारण वमन होने से शरीर में जल की अत्यधिक कमी हो जाती है। शरीर का तापमान एकाएक बढ़ने से रोगी की घबराहट बढ़ जाती है। लू के प्रकोप से रोगी बेहोश भी हो सकता है।

What are Symptoms of Heat Stroke?

लू के लक्षण क्या है?

लक्षण : अंशुघात से पीड़ित व्यक्ति को पसीने बहुत आते हैं। शरीर में जलन होती है।

सिर में तेज दर्द होता है। सिर में चक्कर आते हैं। रोगी को प्यास अधिक लगती है। रोगी बेहोश भी हो सकता है। लू के प्रकोप से ज्वर भी होता है। वमन विकृति भी होती है। मूत्र अवरोध भी देखा जाता है। चेहरा और नेत्र लाल हो जाते हैं।

Steps to cure Heat Stroke.

चिकित्सा

  • अंशुघात से पीड़ित व्यक्ति को शीतल वातावरण में रखकर, उसके शरीर को शीतल जल में कपड़ा भिगोकर स्पंज करना चाहिए।
  • बेल का शीतल शर्बत नीबू का रस और हल्का-सा नमक मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।
  • बेल के गूदे का रस, नीबू व संतरे का रस मिलाकर भी रोगी को पिलाने से लाभ होता है।
  • अंशुघात से रोगी की सुरक्षा के लिए आम का पना बनाकर सेवन कराया जाता है। आम की तरह बेल की गिरी का पना बनाकर रोगी को कई बार सेवन कराने से लू का प्रकोप नष्ट होता है। _
  • बेलगिरी के गूदे में मलाई मिलाकर रोगी को सेवन कराने से बहुत लाभ होता है। बेलगिरी का गूदा व मलाई सामान्य व्यक्ति भी खाएं तो लू के प्रकोप से सुरक्षा होती है।
  • बेलगिरी के गूदे को मिक्सी में पीसकर जल में मिला लें। इसमें ग्लूकोज मिलाकर दो-तीन बार पिलाने से अंशुघात से सुरक्षा होती है।

श्वेत प्रदर ( ल्यूकोरिया )

Leukorrhea

प्रदर ऐसा रोग है जिसका स्त्रियों को बहुत समय तक पता ही नहीं चलता। कुछ स्त्रियाँ योनि से स्राव होने अर्थात प्रदर रोग’ होने पर लाज-संकोच के कारण काफी समय तक भी किसी को कुछ नहीं बतातीं। कुछ स्त्रियाँ प्रदर के संबंध में अपने पति से भी छिपाकर रखती हैं। स्त्रियों के ऐसा करने से प्रदर रोग अधिक उग्र रूप धारण कर लेता है और उसकी चिकित्सा अधिक मुश्किल हो जाती है।

Why does Leukorrhea happens?

ल्यूकोरिया क्यों होता है?

उत्पत्ति : प्रदर रोग की उत्पत्ति अनेक कारणों से हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रेप्टोकोकाई, ट्राइकोमोनास वैजाइनैलिस जीवाणुओं के संक्रमण से प्रदर रोग की उत्पत्ति हो सकती है।

योनि की स्वच्छता में लापरवाही बरतने, ऋतुस्राव के दिनों में गंदे कपड़े इस्तेमाल करने और गर्भाशय में शोथ होने से प्रदर रोग होता है। अधिक बच्चों को जन्म देने वाली स्त्रियां भी प्रदर रोग का शिकार होती हैं। अधिक सहवास से भी प्रदर रोग होता है।

What are Symptoms of Leukorrhea?

ल्यूकोरिया के लक्षण क्या है?

लक्षण : प्रदर रोग होने पर योनि से श्वेत, मटमैला, चावल के धोवन की तरह स्राव होता है। इस स्राव से आंतरिक वस्त्र (पेंटीज, चड्ढी) आदि गीले हो जाते हैं। रोग के बढ़ने के साथ योनि से स्राव भी अधिक होता है।

इस स्राव से दुर्गंध आती है जो आसपास वालों को भी परेशान कर सकती है। प्रदर रोग के चलते स्त्रियाँ अधिक निर्बल होती हैं और उनका शारीरिक सौंदर्य नष्ट होने लगता है।

Steps to cure Leukorrhea.

चिकित्सा

  • भोजन में उष्ण मिर्च-मसालों और अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। अश्लील फिल्में भी नहीं देखनी चाहिए।
  • बेल का मुरब्बा खाने से शारीरिक निर्बलता नष्ट होती है।
  • नीम के पत्तों और बेल के पत्तों को जल में उबालकर, छानकर योनि का प्रक्षालन करना चाहिए। दिन में कई बार योनि को जल से स्वच्छ करना चाहिए।
  • बेल की गिरी सुखाकर रसांजन (रसौत) और नागकेशर सभी चीजें बराबर-बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन 5 ग्राम चूर्ण दिन में दो-तीन बार चावल के मांड के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर नष्ट होता है।
  • श्वेत प्रदर में कोष्ठबद्धता की विकृति होने पर बेल का मुरब्बा खाकर दूध पीएं। दो-तीन दिन में कोष्ठबद्धता नष्ट हो जाएगी। शारीरिक निर्बलता भी कम होगी।
  • बेलगिरी का 5 ग्राम चूर्ण चावलों के मांड के साथ सेवन करने से श्वेत प्रदर रोग में बहुत लाभ होता है।

पसीने की दुर्गन्ध

Body Odor

ग्रीष्म ऋतु में सभी छोटे-बड़े पसीने की अधिकता से बहुत परेशान होते हैं, लेकिन कुछ स्त्री-पुरुषों को शीतऋतु में पसीने की शिकायत रहती है। पसीने से चेहरे पर दूषित तत्त्व एकत्र हो जाते हैं। आंतरिक वस्त्र भीग जाते हैं। यदि जल्दी पसीने को स्नान करके साफ न किया जाए तो पसीना सूख जाने पर दुर्गन्ध आने लगती है।

Why does Body Odor happens?

पसीने की दुर्गन्ध क्यों होता है?

उत्पत्ति : उष्ण वातावरण में अधिक समय तक रहने व धूप में घूमने-फिरने से पसीनों की अधिक उत्पत्ति होती है। ग्रीष्म ऋतु में अधिक उष्ण मिर्च-मसालों और अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने से अधिक पसीने आते हैं। चाय-कॉफी पीने वालों को भी अधिक पसीने आते है।

What are Symptoms of Body Odor?

पसीने की दुर्गन्ध के लक्षण क्या है?

लक्षण : पसीने की अधिकता किसी भी स्त्री-पुरुष को बेचैन कर देती है। पसीने की चिपचिपाहट से बहुत व्याकुलता होती है। पसीनों की दुर्गन्ध से जी मिचलाने लगता है।

Steps to cure Body Odor.

चिकित्सा

  • पसीने की दुर्गन्ध से बचने के लिए प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। यदि ग्रीष्म ऋतु हो तो दिन में दो-तीन बार भी स्नान कर सकते हैं। जल में . थोड़ा-सा नीबू का रस या डिटोल मिलाकर स्नान करने से पसीने की दुर्गन्ध नष्ट होती है।
  • बेल की गिरी को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में आंवलों को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर मिला लें। इन दोनों चूर्णों को कपड़े से छानकर स्नान के बाद पाउडर की तरह लगाने से पसीने की दुर्गन्ध का अंत होता है।
  • बेल की गिरी और हरड़ को कूट-पीसकर खूब बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में थोड़ा-सा जल मिलाकर शरीर पर मलने के 15-20 मिनट बाद स्नान करें तो पसीने की दुर्गन्ध नष्ट होती है।
  • ग्रीष्म ऋतु में बेल का शर्बत पीने से दुर्गन्ध की विकृति नष्ट होती है।
  • कोष्ठबद्धता के कारण कुछ व्यक्तियों को अधिक पसीने आने से दुर्गन्ध की अधिक उत्पत्ति होती है। ऐसे में बेल की गिरी खाने, बेल का शर्बत पीने और मुरब्बा खाने से कोष्ठबद्धता के निवारण से दुर्गन्ध की विकृति नष्ट होती है।

सांप के विष से सुरक्षा

Snake bite

खेत-खलिहान, बागों और तालाब के आसपास बिलों में सांप रहते हैं। सांप चूहों का पीछा करते हुए घरों तक पहुंच जाते हैं।

घरों में सांप चूहों के बिलों में और स्टोर में छिप जाते हैं। चूहों का शिकार करने जब रात को सांप निकलते हैं तो किसी स्त्री-पुरुष के पांव के नीचे आने पर काट लेते हैं। सांपों के दांतों में विष भरा होता है जो सांप के काटने से मनुष्य के शरीर में पहुंच जाता है। सांप के विष से तीव्र जलन या पीड़ा तो नहीं होती है, लेकिन विष के प्रभाव से मनुष्य बेहोश होने लगता ।

बेहोश होने पर मनुष्य की मृत्यु हो जाती है। विष का प्रभाव बहुत तेजी से मनुष्य को मृत्यु के कगार पर पहुंचा देता है। सांप के काटने पर रोगी को तुरंत आसपास के किसी अस्पताल या किसी डॉक्टर के पास ले जाएं। यदि आपके समीप अस्पताल या डॉक्टर की सुविधा न हो तो घरेलू चिकित्सा करें। सांप के काटने के स्थान के नीचे-ऊपर कुछ इंच जगह छोड़कर रस्सी या कपड़े की पट्टी कसकर बांध दें। फिर ऊपर-नीचे से दबाकर, काटने के स्थान से रक्त निकाल दें।

Steps to cure Snake bite.

चिकित्सा

  • सांप के काटने वाले अंग के ऊपर तुरंत कोई रस्सी बांधकर रक्त-संचार में अवरोध उत्पन्न करना चाहिए। उसके बाद काटे गए भाग पर चीरा . लगा दें। डिटोल से उस जख्म को साफ करना चाहिए।
  • बेलगिरी वृक्ष की जड को कूट-पीसकर, उसमें चौलाई की जड को कूट-पीसकर दोनों को कपड़े में बांधकर रस निकालकर रोगी को पिला दें। इस मिश्रण से विष का प्रभाव नष्ट होता है। (सांप के काटने पर उस व्यक्ति को तुरंत आसपास के किसी डॉक्टर या अस्पताल में ले जाने की कोशिश करें।)

आग से जलना

Thermal (Heat or Fire) Burns

रसोईघर में काम करते हुए अधिक गर्म चाय, दूध, जल व आग से जल जाने की छोटी-बड़ी दुर्घटना किसी के साथ भी हो सकती है। आग से जलने की दुर्घटना लापरवाही से होती है।

छोटे बच्चे भी माचिस मिल जाने पर उसे जलाने की कोशिश में आग से जल सकते हैं। आग से जल जाने पर तुरंत घर में इधर-उधर जलने पर लगाई जाने वाली औषधियों को ढूंढा जाता है।

लापरवाही से रखी हुई ट्यूब जब नहीं मिलती तो रोगी को समीप के किसी नर्सिग होम या डॉक्टर के पास ले जाते हैं। इस बीच रोगी को आग से जलने पर बहुत अधिक पीड़ा सहन करनी पड़ती है।

What are Symptoms of Heat Burns?

आग से जलना के लक्षण क्या है?

लक्षण : आग से जलने पर बहुत पीड़ा व जलन होती है। असहनीय पीड़ा से रोगी तड़प उठता है। जलने से त्वचा पर जरक बन जाते हैं।

घी, तेल से जलने पर फफोले बन जाते हैं। फफोलों में पूय (मवाद) की उत्पत्ति होती है। आग से पेट का भाग अधिक जल पर प्राणघातक स्थिति बन जाती है।

Steps to cure Fire Burns.

चिकित्सा

  • आग से जलने पर बेलगिरी के गूदे को पीसकर, गर्म तेल में मिलाकर मिश्रण बना लें। इस मिश्रण को जले हुए अंग पर लगाने से जलने की पीड़ा और जलन नष्ट होती है। बेलगिरी के कुछ दिन लगाने से जलने के निशान भी त्वचा पर नहीं बनते।
  • शारीरिक निर्बलता को दूर करने के लिए बेल का मुरब्बा खाकर दूध पीना चाहिए। जलने के कारण रोगी अधिक निर्बल हो जाता है।

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