एनल फिशर से बचने के घरेलू उपाय (Homemade remedies for avoiding anal fissure)

एनल फिशर से बचने के घरेलू उपाय

कई बार मल त्याग करते वक्त गूदा के आसपास की त्वचा छिल जाती है या फट जाती है, जिसकी वजह से उस जगह पर जलन और दर्द होने लगता है, इस समस्या को मुख्य रूप से ऐनल या रेक्टल फिशर कहते हैं, वर्तमान में यह समस्या काफी आम हो गई है, हालांकि यह समस्या कुछ ही कारणों से होती है।

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जैसे :-लगातार डायरिया होना, इंफ्लेमेटरी बोवेल डिसीज व टाइट अनल मांसपेशियां, इसका सबसे आम लक्षण है, खुजली होना, मल त्याग करते समय खून आना, यह समस्या किसी भी आम व्यक्ति को असहज बना देती है, व इसके कारण व्यक्ति को समाज में उठने-बैठने में शर्मिंदगी महसूस होती है, कई लोग तो इसका इलाज करवाने में भी शर्माते हैं, इसलिए हम लाए हैं कुछ घरेलू नुस्खे जिनसे इस बड़ी समस्या को घर में ही ठीक किया जा सकता है !

एनल फिशर के इलाज मे उपयोगी जैतुन का तेल

जैतून के तेल से होने वाले फायदे :- जैतून के तेल के इस्तेमाल से गूदा के आसपास होने वाली खुजली, खून, दर्द आदि कम हो जाता है, जैतून का तेल प्राकृतिक रूप से समृद्ध होता है, व इसमें अनेकों विशेषताएँ होती हैं। यह तेल मल त्याग प्रणाली को चिकनाई देता है, जिससे मल त्याग आराम से हो जाता है।

इस्तेमाल करने की प्रक्रिया : सबसे पहले जैतून के तेल को शहद के साथ मिला लें, इसके बाद इसको गैस या माइक्रोवेव ओवन पर गर्म होने दे, घोल के पिघल जाने पर इसको ठंडा होने दें और संभावित क्षेत्र पर दिन में 3-4 बार लगाएं।

एनल फिशर में उपयोगी है एलोवेरा

एलोवेरा से होने वाले फायदे :- एलोवेरा प्रकृति में मौजूद एक ऐसा पौधा है, जिसमें दर्द निवारण की शक्ति होती है, जो एनल फिशर के लक्षणों को कम करता है, व त्वचा को सुरक्षित रखता है। हर प्रकार की रेडीमेड क्रीम जो त्वचा के लिए बनी होती है, उनमें एलोवेरा का इस्तेमाल हमेशा होता है, एलोवेरा का लेप बनाकर लगाने से इस समस्या में काफी आराम मिलता है !

इस्तेमाल कैसे करें: एलोवेरा के पत्ते को काटकर, उसमें से उसका गूदा निकाल लें। अब इस जेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से इस समस्या में काफी आराम मिलता है !

गर्म पानी में नहाने से होता है एनल फिशर मे फायदा

गर्म पानी से नहाने के फायदे :- गूदा के आसपास की त्वचा को गर्म पानी से सहजता से धोएं, व रोज़ाना गर्म पानी से नहाने की कोशिश करें, इससे रक्तचाप में आसानी होगी, व प्रभावित क्षेत्र में जलन, खुजली की समस्या भी दूर हो जाएगी!

इस्तेमाल करने का तरीका :- सबसे पहले एक बड़े टब या बाल्टी में पानी को गर्म कर लें, उसमें 2 चम्मच लेवेंडर का तेल डाल कर अच्छे से मिला लें, प्रभावित क्षेत्र को सहजता से इस गर्म पानी से 15 से 20 मिनट तक धोएं, इस प्रक्रिया को दिन में लगभग 2 बार दोहराएं!

कम्फ्रे से करिये एनल फिशर का इलाज

कम्फ्रे के इस्तेमाल के फायदे :- कम्फ्रे एक लोकप्रिय जड़ीबूटी है, जिसमे अखंड प्रतिरोधक क्षमता व चिकित्सीय गुण होते हैं, इसके इस्तेमाल से इलाज की प्रक्रिया तेज हो जाती है व त्वचा के ऊतकों को ठीक करने में मदद मिलती है ।

इस्तेमाल:- सबसे पहले एक चम्मच सूखे कम्फ्रे को एक कप गर्म पानी में मिला लें, फिर बर्तन को ढककर 10-15 मिनट उबालें, ठंडा होने पर इसको प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं, इसके अलावा कम्फ्रे को सिकाई के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 2-3 बार प्रभावित क्षेत्र पर दिन में लगाने से समस्या से छुटकारा मिलता है!

एनल फ़िशर में उपयोगी है नारियल का तेल

नारियल के तेल का फायदा :- नारियल तेल एनल फिशर के लिए एक अन्य फायदेमंद घरेलू उपाय है, नारियल तेल लगाने से यह त्वचा में अवशोषित होकर उस प्रभावित क्षेत्र को चिकनाई देता है एवं इलाज की प्रक्रिया को शुरु करता है ।

इस्तेमाल कैसे करें :- नारियल तेल को प्रभावित क्षेत्र पर दिन में 2 -3 बार लगाएं, सहजता से मालिश करें, अगर कब्ज से जुड़ी कोई परेशानी है तो नारियल के तेल को अपनी डाइट में भी शामिल कर सकते हैं।

अर्जीनाइन जेल है एनल फिशर मे उपयोगी

अर्जीनाइन के फायदे :- अर्जीनाइन एक प्रकार का जेल है, जिसमें एमिनो एसिड पाया जाता है और यह प्रभावित क्षेत्र में नाइट्रिक एसिड को पंहुचाता है। एक रिसर्च के अनुसार एल-अर्जीनाइन जेल बिना किसी नुकसान के इलाज में बहुत प्रभावी होता है ।

इस्तेमाल का तरीका :- यह जेल कॉस्मेटिक की दूकान पर आसानी से मिल जाता है, इसको लेकर सहज रूप से प्रभावित क्षेत्र पर मालिश करें, दिन में 4 से 5 बार लगाने से ये काफी आराम पहुँचाता है !

सेब का सिरका है एनल फिशर में हैं उपयोगी

सेब के सिरके का फायदा :- सेब का सिरका कब्ज के लिए बेहद प्रभावी तरीका है, इसके तत्व व्यक्ति की पाचन क्रिया को सुधारते हैं व मल त्याग को ठीक करते हैं ।

इस्तेमाल :- 1-2 सेब के सिरके को पानी के गिलास में डालें और मिक्स कर ले, चाहे तो मिश्रण में शहद मिला सकते हैं, इस मिश्रण को दिन में 2 बार पीने से आराम मिलता है!

अलसी से कीजिए एनल फिशर का इलाज

अलसी के फायदे :- अलसी फाइबर और फैटी एसिड के कारण, कब्ज का इलाज करने में मदद करता है, कब्ज की वजह से हैंडल पिक्चर की समस्या और भी खराब हो सकती है, इस प्रकार यह मल त्याग करते हुए होने वाले दर्द को कम करता है ।

इस्तेमाल :- अलसी पाउडर की एक चम्मच को गर्म पानी में डालकर रख दें, ठंडा होने के बाद रात को सोने से पहले इसको जरूर पियें, इसके अलावा मार्केट से अलसी के कैप्सूल भी ले सकते हैं। केवल डॉक्टर से पूछताछ करने के बाद ही इसका प्रयोग करें।

फाइबर है एनल फिशर मे उपयोगी

फाइबर के फायदे :- रोजाना फाइबर युक्त डाइट का सेवन करने से मल त्याग करते वक्त अधिक जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे गूदा के आसपास की त्वचा को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

इस्तेमाल : फाइबर युक्त ओट्समील, आलूबुखारा, फलियां, पालक, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज का सेवन करें, इसके अलावा डॉक्टर से पूछने के बाद सप्लीमेंट भी खा सकते हैं!

एनल फिशर की समस्या होने पर रखें स्वच्छता का विशेष ध्यान

किसी भी प्रकार की बीमारी के बढ़ने में स्वच्छता का ना होना एक बहुत बड़ा रोल अदा करती है, इसलिए स्वच्छता का ध्यान रखना अनिवार्य है, प्रभावित क्षेत्र को साफ और धोकर रखें ताकि इन्फेक्शन के जोखिम कम रह सके।

ध्यान रखें : जब भी मल त्याग करें, प्रभावित क्षेत्र को अच्छे से साफ करें, नहाने के बाद बेबी पाउडर लगाएं, हमेशा बिना यूज किये कपड़े पहने, अंडरवियर अच्छे कॉटन वाला पहनेे, कभी भी एक ही अवस्था में ना बैठे रहें, हमेशा घूमते फिरते रहें जिससे प्रभावित क्षेत्र में नमी ना बढ़े!

 

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