अजीर्ण । अपच का घरेलू नुस्खे

All about Dyspepsia In Hindi?

अजीर्ण रोग के प्रारंभ में रोगी को कुछ पता नहीं चलता । जब अजीर्ण के कारण भोजन की इच्छा नहीं होती, स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों को देखकर अरुचि होती है और उदर हर समय भरा-भरा अनुभव होता है तो अजीर्ण रोग का पता चलता है। अजीर्ण रोग के चलते रोगी शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है।

Why does Indigestion happens?

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उत्पत्ति : पाचन क्रिया की विकृति से अजीर्ण की उत्पत्ति होती है। कुछ व्यक्तियों को हर समय कुछ-न-कुछ खाने की बुरी आदत होती है। ऐसे व्यक्ति भोजन के बाद, उसकी पाचन क्रिया संपन्न होने से पहले कुछ खाते हैं तो पाचन क्रिया विकृत होती है। कुछ व्यक्ति अधिक गरिष्ठ और वात कारक शीतल खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों की पाचन क्रिया बहुत देर में होती है और ऐसे में जब दूसरे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है तो पहला भोजन अधपचा रह जाता है। बार-बार भोजन करने से अजीर्ण रोग की उत्पत्ति होती है। अजीर्ण रोग को बदहजमी भी कह सकते हैं।

अनियमित, दूषित व बासी भोजन करने पर पाचन क्रिया की विकृति से अजीर्ण रोग की अधिक उत्पत्ति होती है। चिकित्सकों के अनुसार आधुनिक परिवेश में अधिक मानसिक तनाव, ईर्ष्या-द्वेष और चिंतित रहने वाले स्त्री-पुरुष अजीर्ण रोग से अधिक पीड़ित होते हैं। अधिक पौष्टिक भोजन करने वाले जब बिल्कुल शारीरिक श्रम नहीं करते, अधिक समय तक दिन में सोते हैं तो अजीर्ण रोग से पीड़ित होते हैं।

चाय-कॉफी और शराब का अधिक सेवन करने वालों को भी अजीर्ण रोग अधिक होता है। आधुनिक परिवेश में होटल-रेस्तरां में स्वादिष्ट, चटपटे व अम्ल रसों से बने खाद्य पदार्थ, चाउमीन, नूडल्स, पीजा, बर्गर और फॉस्ट फूड खाने वाले भी अजीर्ण रोग से पीड़ित होते हैं।

Symptoms of Dyspepsia?

लक्षण : अजीर्ण रोग में भूख एकदम नष्ट हो जाती है। अजीर्ण होने से वक्षस्थल (छाती) में बहुत जलन होती है। खट्टी डकारें आने से जी मिचलाता है। वमन विकृति भी होने लगती है। भोजन से अरुचि हो जाती है। अजीर्ण रोग की उग्रावस्था में सिर में चक्कर, नेत्रों के सामने अंधेरा, व प्रलाप के लक्षण भी प्रकट होते हैं। अजीर्ण के रोगी रक्ताल्पता के शिकार होते हैं। रक्त नहीं बनने से शारीरिक निर्बलता तेजी से विकसित होती है।

उदर में वायु एकत्र होने से आध्मान (अफारे) की विकृति होती है। उदर में शूल होता है। हृदय जोरों से धड़कता है और रोगी को बहुत बेचैनी होती है। अजीर्ण की चिकित्सा में विलम्ब करने से पेट में गैस बनने लगती है। अजीर्ण रोग में कोष्ठबद्धता (कब्ज) अधिक होती है। आंत्रों में मल के एकत्र होने से अधिक परेशानी होती है। आंत्र शूल, अम्ल पित्त और ज्वर भी हो सकता है।

What to eat on Indigestion?

क्या खाएं?

  • धनिया और सोंठ का क्वाथ बनाकर, छानकर पिएं।
  • प्रतिदिन सुबह-शाम नीबू का रस जल में डालकर, मिसरी मिलाकर पिएं।
  • 200 ग्राम तक्र (मट्ठे) में भुना हुआ जीरा, थोड़ी-सी काली मिर्च पीसकर और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें।
  • पीपल का चूर्ण 2 ग्राम मात्रा में मधु के साथ चाटकर खाएं।
  • गाजर के 200 ग्राम रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पिएं।
  • नाशपाती के 25 ग्राम रस में पीपल का चूर्ण 1 ग्राम मात्रा में मिलाकर सेवन करें।
  • दो टमाटर काटकर उस पर काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक छिड़ककर खाएं।
  • सोंठ और धनिए का चूर्ण बनाकर, 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म जल से सेवन करें।
  • प्याज को बारीक-बारीक काटकर उसमें नीबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर खाएं।
  • गाजर, मूली, चुकंदर, प्याज, खीरे का सलाद बनाकर, नीबू का रस मिलाकर खाएं।

What to not eat on Dyspepsia?

क्या न खाएं?

  • भोजन करने के बाद अधिक जल का सेवन न करें।
  • उष्ण मिर्च-मसाले व अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • घी, तेल, मक्खन से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी व शराब का सेवन बिल्कुल न करें।
  • बीड़ी-सिगरेट का इस्तेमाल न करें।
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