गाजर के फायदे सौंदर्य वृद्धि और गाजर के विविध उपयोग

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गाजर से विकसित कीजिए सौंदर्य आकर्षण

गाजर खाने और उसका रस पीने से शारीरिक शक्ति और रोग निरोधक क्षमता विकसित होती है। गाजर में इतने अधिक गुणकारी खनिज तत्त्व और विटामिन होते हैं जो शरीर में रक्त की तेजी से वृद्धि करते हैं। रक्त के पर्याप्त मात्रा में होने से सौंदर्य-आकर्षण विकसित होता है।

गाजर के रस में विटामिन ‘ए’ होता है जो नेत्रों को विभिन्न रोगों से सुरक्षित रखकर नेत्रों को सुंदर बनाए रखता है। गाजर में लौह तत्त्व (आयरन) 1.5 मिली ग्राम होता है जो शरीर में रक्त की वृद्धि करके सुंदरता को बढ़ाता है। गाजर में पाए जाने वाले विटामिन ‘ई’ से स्त्री-पुरुषों में प्रौढ़ावस्था तक सौंदर्य सुरक्षित रहता है। गाजर में उपलब्ध विटामिन ‘ई’ स्तनों को कैंसर से सुरक्षित रखकर स्तन सौंदर्य और सुडौलता को अधिक आयु तक बनाए रखता है।

  • भोजन में विटामिन ‘ई’ के अभाव से अल्पायु में बाल सफेद होने लगते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार अल्पायु में तेजी से बाल टूटकर नष्ट होने और गंजा होने के पीछे भी विटामिन ‘ई’ का अभाव होता है। विटामिन ‘ई’ के अभाव से बाल नष्ट हो जाने पर गंजा हो जाने पर चेहरे का सौंदर्य आकर्षण नष्ट हो जाता है। गाजरों को प्रतिदिन खाने और गाजरों का रस पीने से शरीर को विशेष रूप से विटामिन ‘ई’ मिलता है और सिर के बाल लम्बे, घने और मजबूत होते हैं। दीर्घ आयु तक बालों का सौंदर्य बना रहता है।
  • गाजर के रस-में पालक, गोभी, चुकंदर व ककड़ी का रस मिलाकर पीने से शारीरिक शोथ की विकृति नष्ट होती है। हाथ-पांव, चेहरे पर शोथ होने से सौंदर्य आकर्षण कम हो सकता है। गाजरों के सेवन से शोथ की विकृति से बचकर, सौंदर्य आकर्षण को सुरक्षित रख सकते हैं।
  • गाजर का रस प्रतिदिन सेवन करने से स्त्रियों का श्वेत प्रदर रोग (ल्यूकोरिया) नष्ट होता है। श्वेत प्रदर स्त्रियों के स्वास्थ्य को नष्ट करके उनके सौंदर्य आकर्षण को भी नष्ट कर देता है। गाजर का रस पीने से श्वेत प्रदर नष्ट होने के कारण सौंदर्य सुरक्षित रहता है।
  • गाजरों को जल में उबालकर, पीसकर लेप बनाएं। इस लेप को चेहरे व दूसरे अंगों पर लगाने से त्वचा अधिक कोमल व स्निग्ध बनती है। सौंदर्य का आकर्षण विकसित होता है।
  • रात्रि को नींद न आने और लम्बे समय तक जागने से स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य विकृत होने से सौंदर्य भी विकृत होता है। अनिद्रा अर्थात नींद न आने का रोग होने पर गाजर का रस सुबह-शाम पीने से बहुत लाभ होता है। गाजर के रस का सेवन करने से अनिद्रा रोग नष्ट होता है। स्वास्थ्य को क्षति नहीं पहुंचने से शारीरिक सौंदर्य सुरक्षित रहता है।
  • गाजरों के रस में अंगूरों का रस मिलाकर पीने से रक्त वृद्धि होने से सौंदर्य आकर्षण विकसित होता है।
  • गाजर का रस प्रतिदिन पीने से शरीर की उष्णता नष्ट होती है। रक्त शुद्ध होने से फोड़े-फुंसियों का निवारण होता है और त्वचा सौंदर्य सुरक्षित रहता है।
  • गर्भावस्था में पौष्टिक व संतुलित आहार के अभाव में स्त्रियाँ शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाती हैं। शारीरिक निर्बलता के कारण शारीरिक सौंदर्य भी नष्ट होकर रह जाता है। प्रसव के समय अधिक रक्तस्राव होने से भी शारीरिक निर्बलता तीव्र गति से विकसित होती है। प्रसव के बाद स्त्रियों को प्रतिदिन गाजर का रस सेवन कराया जाए तो शारीरिक निर्बलता के निवारण के साथ रक्तवृद्धि होने से शारीरिक सौंदर्य विकसित होता है। गाजर का हलवा भी शारीरिक शक्ति विकसित करके सुंदरता बढ़ाता है।

विविधा

  • गाजर को कद्दूकस कर दूध में उबालें। जब गाजर गल जाए तब शक्कर मिलाकर सेवन करने से हृदय को शक्ति मिलती है।
  • गाजर 5-6 नग भूभल की आग में पकाएं अथवा कच्ची गाजर छीलकर रात भर बाहर ओस में रखे रहने दें। प्रातः समय केवड़ा या गुलाब अर्क और मिश्री मिलाकर खाने से हृदय की बढ़ी हुई धड़कन सामान्य हो जाती है।
  • गाजर को कद्दूकस कर दूध में उबालकर खीर की भांति सेवन करने से हृदय को शक्ति मिलती है तथा रक्ताल्पता दूर होती है।
  • गाजर को भाप में उबालकर उसमें 10 ग्राम रस निकालें। उसमें 20 ग्राम मधु मिलाकर सेवन करने से छाती की पीड़ा दूर होती है।
  • गाजर के रस में मिश्री मिलाकर चटनी सी बना लें। इसमें पिसी हुई कालीमिर्च बुरककर सेवन करने से खांसी में लाभ होता है। सीने में जमा हुआ बलगम सरलतापूर्वक बाहर निकल जाता है।
  • गाजर के पत्तों को घी से चुपड़कर गर्म करके उसका रस निकालकर 2-3 बूंदें नासाछिद्रों और कानों में डालने से आकर आधासीसी (आधे सिर का दर्द/माइग्रेन) में लाभ होता है।
  • गाजर के बीज 20 ग्राम, मूली , प्याज, सोया, पालक , मेथी, अजवायन और बथुआ इन सभी के बीज प्रत्येक 3-3 ग्राम, धमासा, कुटकी , बैंगन , उलटकम्बल, इंद्रायण और ऊंटकटारा इन सभी की जड प्रत्येक 3-3 ग्राम, बांस की लकड़ी का चूरा 3 ग्राम तथा पुराना गुड 20 ग्राम मिलाकर एक किलो पानी में क्वाथ करें। 100 ग्राम पानी शेष रहने पर काढ़े को नीचे उतार लें। इसकी 3 मात्राएं रोगी महिला को सेवन कराने से कष्टार्तव (मासिक दर्द/कष्ट के साथ आना) , मूढ़गर्भ और गर्भाशय के अंदर का समस्त परिस्राव बाहर निकलकर गर्भाशय पूर्ण रूपेण शुद्ध हो जाता है।
  • जंगली गाजर को कद्दृकस करके उसके रस में किसी साफ-स्वच्छ कपड़े को खूब तर करके योनि के अंदर गहराई के साथ रखने से गर्भाशय शुद्ध हो जाता है।
  • गाजर के 10 ग्राम बीज और गाजर के 100 ग्राम पत्तों का काढ़ा बनाकर रोगिणी को सेवन कराने से प्रसव के समय के कष्ट दूर होकर प्रसव सरलतापूर्वक हो जाता है।
  • योनि में गाजर के बीज की धूनी देने से भी प्रसवकालीन कष्ट कम होकर प्रसव में सुगमता होती है।
  • गाजर की पुल्टिस में नमक डालकर बांधने से पित्त शोथ उतर जाती है। जिसमें हो जाती हैं।
  • बिगड़े हुए फोड़ों पर गाजर की पुल्टिश बांधना लाभकर है।
  • गाजर को उबालकर या पीसकर इस लेप को पूय (मवाद) युक्त दुर्गंधित व्रणों (घावों) पर बांधने से व्रण जल्द ही अच्छे हो जाते हैं।
  • गाजर का रस कैंसर में बहुत लाभकर है। इसके सेवन से ब्लड कैंसर व पेट के कैंसर में बहुत लाभ होता है।
  • मूत्र में सफेदी (एल्ब्युमिन) के कष्ट में 250 ग्राम गाजर का रस दिन में 3 बार सेवन करना हितकर है।
  • गाजर का रस सेवन करते रहने से मोटापा बढ़ता है।
  • गाजर के बीज 2 चम्मच 1 गिलास पानी में उबालकर सेवन करने से मूत्र ज्यादा आकर गुर्दे की सृजन व गुर्दे के रोगों में लाभ होता है।
  • प्रातः समय बादाम 6-7 नग खाकर ऊपर से 125 ग्राम गाजर का रस आधा किलो गाय के दूध में मिलाकर सेवन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
  • यदि मासिक धर्म न आता हो तो 2 चम्मच गाजर के बीज और 1 चम्मच पुराना गुड 1 गिलास पानी में उबालकर प्रतिदिन सुबह-शाम 2 बार गर्म-गर्म सेवन करने से अनार्तव (मासिक धर्म न आना) , कष्टार्तव (मासिक धर्म कष्ट/दर्द के साथ आना) में आराम होता है। नोट : गर्भवती महिलाएं प्रयोग न करें, अन्यथा गर्भ गिर सकता है।
  • गाजर के बीज पानी में पीसकर निरंतर 5 दिन तक पीने से स्त्रियों का रुका हुआ मासिक धर्म प्रारम्भ हो जाता है। विशेष : जुकाम, जीर्ण ज्वर, न्यूमोनिया या तीव्र ज्वर इन रोगों में गाजर का रस सेवन न करें। टॉन्सिलाइटिस, पेचिश, आंत्रपुच्छ प्रदाह, एनीमिया (रक्त की कमी) , रक्त अम्लता, पथरी, बवासीर, अल्सर तथा रक्त विकार आदि रोगों में गाजर रस का सेवन अत्यंत ही हितकर है। मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी गाजर का सेवन न करें। गाजर खाने की अपेक्षा इसका रस सेवन विशेष लाभकर है।

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